Big Breaking : भयंकर गोलीबारी के बीच टैंकर ‘देश गरिमा’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया

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Big Breaking : भयंकर गोलीबारी के बीच टैंकर 'देश गरिमा' ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया

ईरान-इजराइल तनाव के बीच कच्चे तेल से भरा टैंकर ‘देश गरिमा (Desh Garima)’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया। 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचेगा जहाज, जानें भारतीय जहाजों पर फायरिंग की पूरी कहानी।

नई दिल्ली/मुंबई 19 April । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कच्चे तेल से लदा भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ (Desh Garima) रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक और सुरक्षित पार कर गया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हुई है, जब क्षेत्र में दो अन्य भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

संकट के बीच बड़ी राहत

भारत सरकार के सूत्रों से मिली अद्यतन जानकारी के अनुसार, भारतीय नौवहन निगम (SCI) के स्वामित्व वाला यह टैंकर 18 अप्रैल को इस खतरनाक जलमार्ग से गुजरा। ‘देश गरिमा’ अब 22 अप्रैल को मुंबई बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। इस टैंकर पर सवार 31 भारतीय नाविकों ने इस कठिन परिस्थिति में साहस का परिचय दिया। खास बात यह है कि मार्च की शुरुआत से अब तक यह होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाला दसवां भारतीय ध्वज वाला जहाज है।

हालांकि, यह सफर उतना आसान नहीं था, जितना दिखता है। इससे पहले 24 घंटों के भीतर ही दो भारतीय जहाजों—तेल टैंकर ‘समनार हेराड’ और बल्क कैरियर ‘जग अर्नव’—ने इसी जलडमरूमध्य से गुजरते समय गोलीबारी की सूचना दी थी। इन हमलों के बाद दोनों जहाजों को वापस फारस की खाड़ी में लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। गनीमत रही कि इन घटनाओं में चालक दल के किसी भी सदस्य के हताहत होने की सूचना नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने Indian tanker security (भारतीय टैंकर सुरक्षा) को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है।

क्यों है होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी से निकलने वाले वैश्विक कच्चे तेल के लगभग 20-30% परिवहन का मार्ग है। किसी भी बड़े संकट के समय इस मार्ग का बंद होना, भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। ऐसे में ‘देश गरिमा’ का सुरक्षित पार होना न केवल जहाज के चालक दल के लिए, बल्कि पूरे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत है।

भारत सरकार की सक्रिय कूटनीति

इन बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, भारत सरकार ने तुरंत सक्रिय रुख अपनाया। पिछले हफ्ते, भारत ने ईरान के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया था और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही कूटनीतिक प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं, क्योंकि ‘देश गरिमा’ को किसी अप्रिय घटना का सामना नहीं करना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए एक स्थायी नीति बनानी चाहिए। क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव जितना बढ़ रहा है, भारतीय जहाजों के लिए जोखिम उतना ही अधिक होता जा रहा है। फिलहाल, ‘देश गरिमा’ की सुरक्षित यात्रा ने पूरे देश को संकट के इस घड़ी में एक नई उम्मीद दी है। अब सबकी निगाहें 22 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह टैंकर मुंबई के तट पर लंगर डालेगा और सैकड़ों परिवारों की चिंताएं समाप्त होंगी।

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