
पाक ऑक्युपाइड कश्मीर (POK ) में अल बदर कमांडर Hamza Burhan मारा गया। जानें कैसे अज्ञात हमलावरों ने पुलवामा अटैक के मास्टरमाइंड को किया खत्म।
6. Hindi Article Body (800–1000 words)
मुज़फ़्फ़राबाद (पाक ऑक्युपाइड कश्मीर)। आतंक के खिलाफ जारी इस वैश्विक जंग में एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पाक ऑक्युपाइड कश्मीर (PoK) की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में आज सुबह अज्ञात हमलावरों ने भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक Hamza Burhan को गोलियों से भून दिया। यह वही चेहरा था जिसने नवंबर 2020 में पुलवामा स्थित CRPF कैंप पर ग्रेनेड हमले की साजिश रची थी और सालों से दक्षिण कश्मीर में आतंक की फसल बो रहा था।
कैसे अंजाम दिया गया वारदात को अंजाम?
स्थानीय मीडिया और खुफिया सूत्रों के अनुसार, Hamza Burhan, जो आतंकी संगठन अल बदर का ऑपरेशनल कमांडर था, मुज़फ़्फ़राबाद के एक स्कूल के सामने अपनी गाड़ी में सवार था। इसी दौरान दो बाइक पर सवार तेज रफ्तार हमलावरों ने उसकी गाड़ी को रोक लिया। घटना इतनी अचानक हुई कि बुरहान के अंगरक्षक भी कुछ नहीं कर पाए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, Hamza Burhan ने जान बचाने के लिए गाड़ी से उतरकर भागने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उसे मौका नहीं दिया। उस पर तब तक गोलियां बरसाई गईं जब तक कि वह सड़क पर गिरकर ढेर नहीं हो गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
कौन था आतंकी Hamza Burhan?
इस सवाल का जवाब जितना चौंकाने वाला है, उतना ही खतरनाक भी। Hamza Burhan का असली नाम अर्ज़ुमंद गुलज़ार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपुरा इलाके का रहने वाला था। करीब सात साल पहले वह वैध दस्तावेजों के जरिए सीमा पार करके पाक ऑक्युपाइड कश्मीर चला गया। वहां जाकर वह ISI की मदद से चलने वाले आतंकी संगठन अल बदर में शामिल हो गया।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसे साउथ कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने, नए युवाओं को दहशतगर्दी में भर्ती करने और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियारों की सप्लाई करने की जिम्मेदारी मिली हुई थी। नवंबर 2020 में पुलवामा CRPF कैंप पर हुए ग्रेनेड हमले का मास्टरमाइंड यही आतंकी था। इस हमले के बाद ISI ने उसे अल बद्र का ऑपरेशनल कमांडर बना दिया था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2022 में उसे आधिकारिक रूप से ‘मोस्ट वांटेड आतंकवादी’ घोषित किया था।
पुलवामा से पीओके तक का सफर
यह कोई आम आतंकी नहीं था। Hamza Burhan उसी खतरनाक ‘डिजिटल कट्टरपंथ’ मॉडल का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल पहले बुरहान वानी जैसे आतंकियों ने किया था। वह पीओके में बैठकर सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए कश्मीर घाटी के युवाओं को भड़काता था, उन्हें हथियार उठाने के लिए उकसाता था और फंडिंग मुहैया कराता था। पुलवामा का इलाका लंबे समय से आतंकियों का गढ़ रहा है, और अर्ज़ुमंद गुलजार उसी सांप की एक और कड़ी था, जिसे आज उसके ही अड्डे में दबोच लिया गया।
बढ़ता सिलसिला: क्या है अज्ञात हमलावरों का खेल?
दिलचस्प बात यह है कि Hamza Burhan की यह हत्या कोई अलग या अनहोनी घटना नहीं है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान और पीओके के अंदर अज्ञात हमलावरों ने एक से बढ़कर एक बड़े आतंकियों और ISI एजेंटों को सप्रेटेड सलाखों के पीछे या सड़क पर मार गिराया है। यह माना जा रहा है कि या तो यह ‘डेथ स्क्वॉड’ का काम है या फिर यह आपसी गुटबाजी का ऐसा दौर है, जहां एक आतंकी दूसरे को मिटा रहा है।
- जनवरी 2025: लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर अब्दुल ग़फ़्फ़ार को अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया। ग़फ़्फ़ार लश्कर चीफ हाफ़िज़ सईद का करीबी था।
- मार्च 2025: ISI के एजेंट मुफ़्ती शाह मीर को बलोचिस्तान में मारा गया। वही मुफ्ती, जिसने पूर्व नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव का किडनैप किया था।
- मार्च 2024: पाकिस्तानी सेना के मेजर दानियाल की पेशावर में हत्या, जो 2016 में बारामुला के हमले का साजिशकर्ता था।
- दिसंबर 2023: कराची में हाफ़िज़ सईद के करीबी अदनान अहमद की गोली मारकर हत्या, जो पंपोर CRPF हमले का आरोपी था।
क्या कहते है एक्सपर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि Hamza Burhan जैसे कमांडरों का सफाया पीओके के अंदरूनी संगठनों में गहरे सेंध का संकेत है। एक तरफ जहां पाकिस्तानी सेना और ISI इन आतंकियों को छुपाकर रखती थी, वहीं अब लगातार ये घटनाएं बता रही हैं कि उनके अपने ही गढ़ में उनकी ‘हनीमून पीरियड’ खत्म हो चुकी है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस मौत पर आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, Hamza Burhan का मारा जाना कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है। वह ‘मोस्ट वांटेड’ इसलिए था क्योंकि वह हर साल दर्जनों युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ता था।
मुज़फ़्फ़राबाद की सड़कों पर बहे इस खून का सियासी और सुरक्षा दोनों ही स्तरों पर गहरा असर होगा। एक तरफ जहां यह घटना भारत के लिए एक बड़ी राहत है, वहीं दूसरी तरफ यह पाक ऑक्युपाइड कश्मीर के अंदर बढ़ती अराजकता की निशानी भी है। Hamza Burhan जैसे कुख्यात आतंकी का अंत इस बात का सबूत है कि आतंक की यह दुनिया हमेशा अपने ही हाथों तबाह होती है। जब तक जिहादी विचारधारा रहेगी, अंदरूनी कलह और ‘अज्ञात की गोलियां’ उनका पीछा करती रहेंगी।
Iran का ‘Janfada’ मिशन: शहादत से पहले शादी, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग का अनोखा हथियार!
(स्रोत: पीओके लोकल मीडिया, खुफिया सूत्र, और गृह मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड)
Discover more from Utthan Xpress
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
