
Lucknow कोतवाली में इंचार्ज धनंजय सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 2 लाख रुपये की रिश्वत (bribe) लेते पकड़ा। देखें पूरा मामला। #LucknowPolice #Corruption
लखनऊ:30 Oct ,Lucknow महानगर कोतवाली में तैनात एक पुलिस अधिकारी की ‘करामात’ ने प्रशासन के माथे पर शर्मिंदगी की लकीर खींच दी है। धनंजय सिंह नामक यह चौकी इंचार्ज रिश्वत के दो लाख रुपये नगदी की अवैध कमाई करते हुए एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) की टीम द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर viral हो रहा है, जिसमें मेज पर पड़ा पैसा देखकर पुलिस अधिकारी के चेहरे पर खिल उठी मुस्कान साफ देखी जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, एसीबी को धनंजय सिंह पर एक मामले में दर्ज एफआईआर को कमजोर करने और आरोपियों को राहत दिलाने के बदले में भारी रकम वसूली की विश्वसनीय जानकारी मिली थी। इसी आधार पर, टीम ने एक जाल बिछाया और कोतवाली परिसर में ही उन पर नजर रखनी शुरू कर दी।
‘कैश’ देखते ही खिल उठा चेहरा
माना जा रहा है कि जब एक व्यक्ति (जो एसीबी का एजेंट हो सकता है) ने मांगी गई दो लाख रुपये की राशि एक मेज पर रखी, तो धनंजय सिंह का चेहरा तुरंत खिल उठा। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उस नकदी को अपने कब्जे में ले लिया। यही वह पल था जब छुपी हुई एसीबी की टीम ने दबिश देकर उन्हें आरोपों के साथ घेर लिया। पूरे ऑपरेशन को गुप्त कैमरों से रिकॉर्ड भी किया गया, जो उनके अपराध को साबित करने के लिए एक ठोस सबूत है।
Lucknow Police :नैतिकता पर गंभीर सवाल
यह घटना पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के एक और गंभीर पहलू को उजागर करती है। एक चौकी इंचार्ज, जिसका दायित्व कानून का पालन करवाना और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वही अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया गया। इस मामले ने पुलिस बल की नैतिक जिम्मेदारी और सत्यनिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिक पुलिस पर भरोसा करे, यह घटना उसी विश्वास को तोड़ने का काम करती है।
क्या है आगे की कार्रवाई?
धनंजय सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बरामद किए गए नकदी को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा गया है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारी को निलंबित कर दिया है। एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो इस बात की जांच करेगी कि क्या यह एक अकेली घटना थी या अधिकारी का कोई गिरोह इस तरह की गतिविधियों में शामिल था।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई में एंटी-करप्शन एजेंसियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह पुलिस विभाग के लिए एक चेतावनी भी है कि उसे अपने अंदर घर कर चुके भ्रष्ट तत्वों को बाहर निकालने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। आम जनता से अपील की गई है कि अगर उनके साथ भी इस तरह की कोई घटना होती है, तो वे तुरंत एसीबी की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
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