उत्तर प्रदेश में संजय निषाद के बागी तेवर ,BJP को धमकी!

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Sanjay Nishad,BJP

प्रदेश में Sanjay Nishad ने BJP को एक प्रेस कांफ्रेंस में गठबंधन तोड़ने की धमकी दी ,हालाँकि ये पहली बार नहीं है इस धमकी को उनकी निषाद समाज की आरक्षण की मांग से जोड़ कर देखा जा रहा है

गोरखपुर 27 Aug: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रमुख सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद(Sanjay Nishad) ने मंगलवार को गोरखपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान बागी तेवर दिखाए। उन्होंने सहयोगी दलों के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भाजपा को उन पर भरोसा नहीं है तो गठबंधन समाप्त करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।

क्या बोले Sanjay Nishad

डॉ. निषाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हम भाजपा(BJP) के सहयोगी दल हैं – सुभासपा, अपना दल, निषाद पार्टी और रालोद। अगर भाजपा को हम पर भरोसा है कि हम अपने-अपने समाज को सही दिशा में ले जा रहे हैं और इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल रहा है, तो यह रिश्ता आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन अगर यह भरोसा नहीं है तो साफ कह दें और गठबंधन खत्म कर दें।”

उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए सहयोगी दलों की भूमिका पर जोर दिया और किसी भी एक दल को जीत का श्रेय लेने के ‘घमंड’ पर सवाल उठाया। डॉ. निषाद ने कहा, “किसी को इस बात का घमंड नहीं होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की जीत केवल भाजपा की थी। ये जीत सभी सहयोगी दलों के योगदान से मिली।”

उन्होंने एक रोचक तथ्य साझा करते हुए आगे कहा, “2022 के चुनाव में जब रालोद और ओमप्रकाश राजभर (राजभर दल) समाजवादी पार्टी से जुड़े तो समाजवादी पार्टी की संख्या 45 से बढ़कर 125 हो गई थी। बाकी आप समझदार हैं।” यह बयान सहयोगी दलों के मतदाताओं के बीच निर्णायक भूमिका को दर्शाता है।

निषाद पार्टी प्रमुख ने आरक्षण के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह भाजपा की जिम्मेदारी है, लेकिन सहयोगी दल के रूप में वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, उन्होंने पार्टी के भीतर हो रहे विरोध पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “संजय निषाद के विरोध में जिन्हें सांसद और सुरक्षा मिली, उन्होंने समाज का आरक्षण कितनी बार उठाया?”

अपनी विचारधारा पर अडिग रहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, “त्रेता से ही हम प्रभु श्रीराम की विचारधारा से जुड़े हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे।” हालाँकि, उनका यह अंतिम वक्तव्य एक स्पष्ट चेतावनी के साथ समाप्त हुआ: “सहयोगियों की ताकत को कम मत आंकिए, जीत अकेले की नहीं, सबकी साझी है।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, डॉ. निषाद का यह बयान उत्तर प्रदेश की गठबंधन राजनीति में बढ़ते तनाव का संकेत देता है। सहयोगी दलों की मांगों और उनके महत्व को लेकर यह बयान आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा प्रवक्ताओं की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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