परिषदीय स्कूलों Schools के Merger को हाईकोर्ट ने दी हरी झंडी!
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के परिषदीय स्कूलों(Schools) के विलय (Merger) के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिकाएं खारिज की। कोर्ट ने कहा कि यह नीतिगत फैसला बच्चों के हित में है और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।**
लखनऊ: 7 july उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को परिषदीय स्कूलों के विलय (Merger) के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी कानूनी राहत मिली है। कोर्ट ने सीतापुर जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और एक अन्य याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार का फैसला बच्चों के हित में है। अदालत ने यह भी कहा कि नीतिगत फैसलों को तब तक चुनौती नहीं दी जा सकती, जब तक वे असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण न हों।
सरकार का तर्क: Merger से शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का बेहतर उपयोग

बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून, 2025 को एक आदेश जारी करके प्रदेश के हजारों स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर नजदीकी उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में मर्ज करने का निर्देश दिया था। सरकार का तर्क था कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
याचिकाकर्ताओं का आरोप: आरटीई का उल्लंघन और बच्चों की परेशानी
सरकार के इस फैसले के खिलाफ सीतापुर जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों और एक अन्य याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्कूलों का विलय (Merger)शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) का उल्लंघन है और इससे छोटे बच्चों को दूर के स्कूलों में जाने की समस्या होगी।
कोर्ट का फैसला: नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी अदालत
सोमवार को न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूलों (Schools)का विलय (Merger) राज्य सरकार की नीतिगत योजना का हिस्सा है और अदालत ऐसे फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बताया कि यह मर्जर नहीं, बल्कि स्कूल पेयरिंग की प्रक्रिया है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नहीं है, ऐसे में इन्हें नजदीकी स्कूलों में मिलाना ही उचित है।
सरकार के लिए बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले को योगी सरकार के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। अब सरकार अपनी योजना के तहत प्रदेश भर में परिषदीय स्कूलों के विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी।
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