
Lucknow के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रोजगार महाकुंभ (Employment Maha Kumbh-2025) में भारी अव्यवस्था। जानें कैसे हज़ारों युवा भीड़ और प्रशासनिक लापरवाही से परेशान हुए।
लखनऊ 28 Aug । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को आयोजित ‘रोजगार महाकुंभ’ युवाओं के लिए निराशा और अव्यवस्था के महाकुंभ में तब्दील हो गया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ यह आयोजन प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलते हुए नजर आया, जहां हजारों की संख्या में पहुंचे युवाओं को भीषण भीड़, देरी और सुस्त व्यवस्था का सामना करना पड़ा। घंटों इंतजार और धक्कम-धक्का के बाद भी अधिकांश युवाओं को नौकरी के नाम पर महज आश्वासन ही हाथ लगा।
Employment Maha Kumbh-2025:युवाओं के सपनों पर बिखरे शीशे
कार्यक्रम की शुरुआत ही देरी से हुई, जिसने युवाओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के चलते रोजगार महाकुंभ को दोपहर 12 बजे के बाद ही शुरू किया जा सका। इस दौरान, सुबह 7 बजे से ही प्रतिष्ठान के बाहर जमा हजारों युवा लंबी और अंतहीन प्रतीक्षा में खड़े रहे। करीब 4-5 घंटे तक धूप में खड़े रहने के बाद जब युवाओं को एंट्री मिली, तब तक उनका उत्साह थकान और निराशा में बदल चुका था।
भीड़ इतनी बेकाबू हो गई कि सभागार में लगे मजबूत शीशे के दरवाजे भी टूटकर चकनाचूर हो गए। युवाओं के बीच हुई धक्का-मुक्की में कई लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं। प्रशासन भीड़ पर नियंत्रण पाने और युवाओं को व्यवस्थित तरीके से अंदर ले जाने में पूरी तरह से नाकाम रहा।

देश और प्रदेश के कोने-कोने से रोजगार की आस लिए पहुंचे युवा इस अव्यवस्था से बेहद निराश और मायूस नजर आए। कई युवाओं ने बताया कि रोजगार स्टॉल तक पहुंचने में ही घंटों लग गए। वहां पहुंचने पर पता चला कि ज्यादातर कंपनियां सिर्फ रिज्यूमे जमा करवा रही थीं या फोन नंबर नोट कर रही थीं। कई स्टॉलों पर नौकरी के ठोस ऑफर या नियुक्ति पत्र के बजाय भविष्य में फोन करने के आश्वासन दिए जा रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी आयोजनों में योजनाबद्धता और कुशल प्रबंधन के अभाव पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए आयोजित किए जाने वाले ऐसे कार्यक्रमों का यह हाल युवाओं के मोहभंग का कारण बन रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या बेरोजगार युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ जायज है? प्रशासन की ओर से अभी तक इस अव्यवस्था पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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