
ममता सरकार के बाद बंगाल में BJP की नई लहर। जानिए कोलकाता बैठक में क्यों Shubhendu Adhikari बने Next Chief Minister और 9 मई को क्या होगा खास।
कोलकाता 8 May । पश्चिम बंगाल की सत्ता में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। राज्यपाल आरएन रवि द्वारा ममता बनर्जी सरकार को भंग किए जाने के बाद, अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर Next Chief Minister of West Bengal कौन होगा? सभी की निगाहें कोलकाता में होने वाली विधायक दल की अहम बैठक पर टिकी थीं, और अब इस पहेली का समाधान हो गया है।
Shubhendu Adhikari बनेंगे नए मुख्यमंत्री
बंगाल के अगले मुख्यमंत्री को लेकर जारी असमंजस को विराम देते हुए, भारतीय जनता पार्टी ने सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगा दी है। कोलकाता के एक प्रतिष्ठित कन्वेंशन सेंटर में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से दल का नेता चुना गया। इस निर्णय की घोषणा केंद्रीय पर्यवेक्षक और गृह मंत्री अमित शाह ने की।
बैठक के दौरान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने Shubhendu Adhikari के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष समेत सभी विधायकों ने जोरदार समर्थन किया। शुभेंदु अधिकारी वही चेहरा हैं, जिन्होंने हाल ही में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को दूसरी बार हराकर राजनीतिक इतिहास रच दिया था। उनकी इस जीत को बंगाल में बीजेपी के बढ़ते कद का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है।
क्यों शुभेंदु अधिकारी ही बने पहली पसंद?
शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे होने के कई कारण हैं। पहला, वे एक कुशल रणनीतिकार हैं और उनकी तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आने के बाद से पार्टी ने बंगाल में अपनी पैठ मजबूत की है। दूसरा, वे एक मजबूत जनाधार वाले नेता हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के बीच काफी स्वीकार्यता प्राप्त है। तीसरा, सत्ता विरोधी लहर और ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलने में उनकी भूमिका को पार्टी हाईकमान ने काफी सराहा।
अमित शाह की निगरानी में तैयार होगी कैबिनेट
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की पूरी कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दी है। शुक्रवार को कोलकाता में हुई इस ऐतिहासिक बैठक की अध्यक्षता भी अमित शाह ने ही की। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी भी शामिल हुए, जिससे संकेत मिलते हैं कि बीजेपी बंगाल में एक मजबूत और संतुलित कैबिनेट बनाने की योजना बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने विधायक दल की बैठक में कहा कि कांग्रेस को पिछले 42 सालों में सिक्किम, 36 सालों में बिहार, 26 सालों में ओडिशा, 23 सालों में नगालैंड, 50 सालों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में लंबे समय से शासन नहीं मिला है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन राज्यों में वोट चोरी हो रही थी? उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अपनी राजनीतिक कमजोरी छिपाने के लिए चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
9 मई को होगा भव्य शपथग्रहण
बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी बंगाल के नए मुख्यमंत्री (Next Chief Minister of West Bengal) का शपथ ग्रहण 9 मई को करा सकती है। इस तारीख का चुनाव बेहद खास माना जा रहा है। दरअसल, बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। ऐसे में इस दिन शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन एक सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश देने का प्रयास माना जा रहा है।
खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक अवसर पर शामिल होने के लिए कोलकाता आ सकते हैं। कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान या साल्ट लेक स्टेडियम में इस भव्य समारोह के आयोजन की संभावना जताई जा रही है, जिसमें हजारों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे।
क्या होगा आगे का सियासी समीकरण?
Shubhendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनने के बाद, अब सबकी निगाहें कैबिनेट मंत्रिमंडल के गठन पर टिकी हैं। बंगाल इकाई में सुवेंदु अधिकारी, राहुल सिन्हा और अन्य दिग्गज नेताओं को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी युवाओं और पिछड़े वर्गों को भी उचित प्रतिनिधित्व देने की योजना बना रही है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस अब फिर से संगठनात्मक मोर्चे पर सक्रिय हो सकती है, लेकिन बीजेपी के पास अब बहुमत का आंकड़ा है और वह केंद्र की सरकार की ताकत के साथ बंगाल में अपनी नई सरकार को स्थिरता प्रदान करेगी।
बीजेपी का बंगाल अभियान
बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण राज्य रहा है, लेकिन अब पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि वह “दीदी” के किले में भी सेंध लगा सकती है। अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने न सिर्फ चुनावी रणनीति को धार दिया, बल्कि शुभेंदु अधिकारी जैसे दिग्गज नेता को जोड़कर जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत किया।
अब देखना यह होगा कि नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बंगाल में विकास, उद्योग और कानून व्यवस्था के जिन वादों के साथ सत्ता में आए हैं, उन्हें कैसे पूरा करते हैं। पूरे देश की निगाहें अब 9 मई को होने वाले इस ऐतिहासिक शपथग्रहण पर टिकी हैं, जहां एक नए नेतृत्व के साथ पश्चिम बंगाल की तस्वीर बदलती नजर आएगी।
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