
Rahul Gandhi ने हरियाणा में 25 लाख फर्जी मतदाताओं का आरोप लगाया। चुनाव आयोग (EC)ने दिए जवाब, पूछे तीखे सवाल। Rahul Gandhi की GenZ को भड़काने की कोशिश । पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली 06 Dec : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग (ईसीआई) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि राज्य की मतदाता सूची में 25 लाख फर्जी मतदाता दर्ज हैं। हालाँकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों का जो जवाब दिया है, उससे स्पष्ट है की Rahul Gandhi का ये बम राजनितिक ज्यादा है इसमें कुछ भी ऐसा नहीं जो कानूनन तौर पर EC को कहीं कठघरे में खड़ा कर सके !
Rahul Gandhi ने क्या कहा?
श्री गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया, “हमारे पास स्पष्ट सबूत हैं कि हरियाणा में 25 लाख मतदाता फर्जी हैं। या तो वे मौजूद ही नहीं हैं, या डुप्लीकेट हैं या फिर किसी को वोट देने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं।” उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि हरियाणा में हर आठवां मतदाता फर्जी है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 12.5% बैठता है।
उन्होंने इस मुद्दे को देश के युवाओं से जोड़ते हुए कहा, “मैं चाहता हूं कि भारत के युवा और जेन जेड इसे स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह आपके भविष्य का सवाल है… मैं भारत में चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा हूं और मैं यह 100% सबूतों के साथ कर रहा हूं।” उनका आरोप था कि कांग्रेस की भारी जीत को हार में बदलने की योजना बनाई गई थी।
चुनाव आयोग (EC) के सूत्रों ने आरोपों पर उठाए यह सवाल
चुनाव आयोग की ओर से किसी आधिकारिक बयान के बजाय, सूत्रों के हवाले से दिए गए जवाबों ने कांग्रेस की ओर से प्रक्रिया का पालन न करने के आरोप लगाए। आयोग के सूत्रों द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:
- प्रक्रियात्मक चूक: सूत्रों ने पूछा कि मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कांग्रेस विधायकों (BLAs) द्वारा डुप्लीकेट नामों को हटाने के लिए कोई दावा या आपत्ति क्यों नहीं दायर की गई?
- मतदान एजेंटों की भूमिका: यह सवाल किया गया कि यदि सब कुछ इतना ही गड़बड़ था, तो कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों ने मतदान केंद्रों पर पहचान पर संदेह होने या पहले से मतदान हो चुका होने की स्थिति में आपत्ति क्यों नहीं दर्ज करवाई?
- शून्य अपील: सूत्रों ने बताया कि मतदाता सूची के खिलाफ शून्य अपील दायर की गई और 90 सीटों के लिए केवल 22 चुनाव याचिकाएं ही उच्च न्यायालय में लंबित हैं।
- सबूत का अभाव: एक तीखे सवाल में पूछा गया, “राहुल गांधी को कैसे पता कि इन डुप्लीकेट मतदाताओं ने भाजपा को ही वोट दिया? यह स्पष्ट है कि इन डुप्लीकेट मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट दिया।”
- SIR पर स्थिति: सूत्रों ने पूछा कि क्या राहुल गांधी उस समग्र नागरिक पंजीकरण (SIR) का समर्थन करते हैं जो डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं को हटाता है, या वे इसका विरोध कर रहे हैं।
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा प्रस्तुत आंकड़े
इस बहस के बीच, हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए आंकड़े चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता दिखाने का प्रयास करते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार:
- मतदाता सूची का मसौदा 2 अगस्त, 2024 को जारी किया गया और राजनीतिक दलों के साथ साझा किया गया।
- इस दौरान कुल 4,16,408 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं।
- अंतिम मतदाता सूची 27 अगस्त, 2024 को प्रकाशित की गई।
- महत्वपूर्ण रूप से, मतदान के अगले दिन हुई समीक्षा के दौरान उम्मीदवारों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों की संख्या शून्य बताई गई है।
- मतगणना के दौरान रिटर्निंग ऑफिसरों को केवल 5 शिकायतें प्राप्त हुईं।
यह मामला अब ‘आरोप’ और ‘जवाब’ के दौर में फंस गया है। एक तरफ विपक्ष के नेता हैं जो लोकतंत्र के मंदिर में सेंधमारी का आरोप लगा रहे हैं और देश के युवाओं का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग है, जो आधिकारिक तौर पर तो मौन है, लेकिन उसके सूत्र प्रक्रियागत दस्तावेजों और आंकड़ों के सहारे इन आरोपों का पलटवार कर रहे हैं। अब नजर यह टकराव है कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत या अन्य मंचों पर आगे बढ़ाएगी, या फिर यह विवाद आंकड़ों के इस जंगल में ही दम तोड़ देगा।इस बात की उम्मीद ज्यादा है कानून के जानकारों के अनुसार ये मामला अदालत में जाने लायक नहीं है ये एक राजनीतिक स्टंट ही है जो चुनाव को लेकर चला गया है !
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