RahulGandhi पर BNS Section 337 का खतरा – डबल वोटिंग के दावे में कानूनी पेंच!

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BNS Section 337 ,RahulGandhi

कर्नाटक में डबल वोटिंग के दावे पर RahulGandhi को चुनाव आयोग का नोटिस। BNS Section 337 के तहत 7 साल की जेल का खतरा। पूरी खबर पढ़ें।

बेंगलुरु: 10 Aug :कर्नाटक में डबल वोटिंग के मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेजेंटेशन में दावा किया था कि शगुन रानी नाम की एक महिला के पास दो वोटर आईडी हैं और उसने दो बार वोट डाला। उन्होंने इसके लिए एक दस्तावेज भी दिखाया, जिस पर पोलिंग बूथ अधिकारी का टिक मार्क था। लेकिन अब चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए राहुल गांधी को नोटिस जारी किया है और सबूत मांगे हैं।

चुनाव आयोग का पलटवार

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा है कि उनकी जांच में शगुन रानी के दो बार वोट डालने का कोई सबूत नहीं मिला है। आयोग ने राहुल गांधी से पूछा है कि वे जिस दस्तावेज को चुनाव आयोग का रिकॉर्ड बता रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता कैसे साबित करेंगे? अगर यह दावा गलत साबित होता है, तो राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता BNS Section 337 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

क्या है BNS Section 337?

BNS Section 337 एक गंभीर अपराध से जुड़ी है, जो सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी पर लागू होती है। इसमें वोटर आईडी, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु रजिस्टर, कोर्ट रिकॉर्ड या किसी भी सरकारी प्रमाणपत्र में छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति को 7 साल तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है। साथ ही, अदालत असीमित जुर्माना भी लगा सकती है। यह अपराध गैर-जमानती भी हो सकता है, यानी अगर राहुल गांधी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है और जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है।

राजनीतिक करियर पर संकट?

अगर राहुल गांधी को इस मामले में दोषी ठहराया जाता है और उन्हें 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत उनकी संसदीय सदस्यता खत्म हो सकती है। इससे उनका राजनीतिक करियर गंभीर संकट में पड़ सकता है।

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के नोटिस को खारिज करते हुए कहा है कि राहुल गांधी ने जो दस्तावेज पेश किया, वह आयोग के सार्वजनिक डेटा पर आधारित था। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, “जब राहुल गांधी ने आयोग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, तो उनसे सबूत क्यों मांगे जा रहे हैं? यह डेटा तो आयोग के पास ही है।”

यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अगर राहुल गांधी के दावे गलत साबित होते हैं, तो उन्हें गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। वहीं, अगर चुनाव आयोग की जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो यह विवाद और बढ़ सकता है। अब सबकी नजरें कोर्ट और चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

क्या राहुल गाँधी इससे कुछ हासिल कर पाएंगे ये एक बड़ा सवाल है ये इस लिए भी है कि राफेल , चोकीदार चोर , से मोदी वोट चोर तक अभी तक सभी दांव उलटे पड़े है ! एक सवाल जो मीडिया और जनता पूछेगी वो कि अगर उनके पास सबूत है तो क्या उसे साबित कर पाएंगे ! कही ऐसा तो नहीं ये सारा नाटक बिहार में जारी SIR को रोकने के लिए है ! पर अबकी इल्जाम उन्होने बीजेपी पर नहीं चुनाव आयोग पर लगाए है ! इस लिए कानूनन BNS Section 337 की तलवार उन पर भी लटकती रहेगी !

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