
Ashok Lahiri नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष नियुक्त, पीएम मोदी से मुलाकात की। जानें कैसे उनका अनुभव भारत को Viksit Nation बनाने में करेगा मदद।
नई दिल्ली 25 April : भारत के विकास पथ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक मुलाकात की। यह मुलाकात केंद्र सरकार द्वारा नीति आयोग के पुनर्गठन के तहत उनकी नियुक्ति के मात्र एक दिन बाद हुई। प्रधानमंत्री मोदी, जो स्वयं नीति आयोग के अध्यक्ष हैं, ने लाहिड़ी के अनुभव को भारत के सुधारों की रीढ़ बताया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि लाहिड़ी का गहन अर्थशास्त्र और लोक नीति का ज्ञान देश को विकसित राष्ट्र (Viksit Nation) बनाने के संकल्प को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
नीति आयोग का पुनर्गठन: एक नई शुरुआत
हाल ही में हुए इस पुनर्गठन के तहत, सरकार ने न केवल उपाध्यक्ष पद पर बदलाव किया है, बल्कि वैज्ञानिक गोबर्धन दास को भी नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। गोबर्धन दास ने अपनी प्रतिक्रिया में इस फैसले को आम जनता के सपनों का प्रतिनिधित्व बताते हुए कहा कि नीति आयोग अब जमीनी हकीकत को रणनीति में बदलने पर काम करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पुनर्गठन दीर्घकालिक योजना और समावेशी विकास की ओर सरकार के स्पष्ट इरादे को दर्शाता है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के अनुसार, “जब किसी संस्था में अशोक लाहिड़ी जैसा अनुभवी व्यक्ति आता है, तो नीति-निर्माण में गुणात्मक बदलाव आना स्वाभाविक है।”
Ashok Lahiri : चार दशकों का अटूट अनुभव
अशोक लाहिड़ी का नाम भारतीय अर्थव्यवस्था के रणनीतिकारों में शीर्ष पर आता है। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में, वे न केवल भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे हैं, बल्कि 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में उन्होंने केंद्र-राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों को सुदृढ़ करने में भूमिका निभाई। वैश्विक मंच पर उनकी पकड़ इस बात से साफ होती है कि उन्होंने एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
शैक्षणिक विरासत की बात करें, तो अशोक लाहिड़ी दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता जैसी प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों के पूर्व छात्र हैं। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल से भाजपा विधायक भी हैं, जो दर्शाता है कि वे सिर्फ सिद्धांतकार नहीं, बल्कि जमीनी राजनीति और प्रशासन के भी जानकार हैं।
‘विकसित राष्ट्र’ के लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि विकसित राष्ट्र (Viksit Nation) बनने का जो लक्ष्य है, वह कोई सपना नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है। “अशोक लाहिड़ी जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री की नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि हमारी नीतियाँ वैश्विक चुनौतियों के बीच भी टिकाऊ और प्रगतिशील रहें। उनकी सेवाएं न सिर्फ सुधारों को गति देंगी, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाने में मदद करेंगी।” पीएम मोदी ने लाहिड़ी को बधाई देते हुए उनके समृद्ध अनुभव को भारत के सुधारों और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य के लिए अहम बताया।
विपक्ष और अर्थशास्त्रियों की प्रतिक्रिया
हालांकि इस नियुक्ति पर अधिकांश आर्थिक विशेषज्ञों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लाहिड़ी की नियुक्ति पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, एक सक्रिय विधायक को इतनी बड़ी संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी देना, सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को और मजबूत करता है। वैज्ञानिक गोबर्धन दास के निजी क्षेत्र और तकनीकी अनुभव को भी सराहा जा रहा है, क्योंकि यह नीति आयोग के डिजिटल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसे अभियानों को नई दिशा दे सकता है।
आगे की राह: क्या बदलेगा?
अशोक लाहिड़ी की प्राथमिकता क्या होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में नीति आयोग अल्पकालिक चुनौतियों (मुद्रास्फीति, रोजगार) के साथ-साथ दीर्घकालिक लक्ष्यों जैसे 2047 तक विकसित राष्ट्र (Viksit Nation) बनने का रोडमैप पेश कर सकता है। लाहिड़ी के वैश्विक संस्थाओं के अनुभव से भारत को अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यापार समझौतों में मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद लाहिड़ी ने कहा कि वे देश की सेवा और नीति-निर्माण में पारदर्शिता व कुशलता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल, नीति आयोग के इस नए नेतृत्व से यह उम्मीद जगी है कि भारत जल्द ही आर्थिक सुधारों की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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