Magh Mela 2026: संगम स्नान तिथियाँ, महत्व व पूरी जानकारी

2026 के Magh Mela की सम्पूर्ण जानकारी। जानें संगम के सभी 6 महत्वपूर्ण स्नान पर्वों की तिथियाँ, धार्मिक महत्व और कल्पवास के फल। #MaghMela2026
प्रयागराज 9 Jan। पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ ही त्रिवेणी संगम के तट पर 03 जनवरी 2026 से “मिनी कुंभ” ख्यात माघ मेले का आगाज हो चुका है। आस्था, विश्वास और मोक्ष की कामना से सराबोर यह महामेला 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान लाखों श्रद्धालु कल्पवास करेंगे और करोड़ों की संख्या में भक्तगण संगम में आध्यात्मिक डुबकी लगाकर पाप से मुक्ति एवं पुण्य के भागी बनेंगे।
मान्यता है कि माघ मास में संगम स्नान, जप, तप एवं दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मेला उन साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है जो नियम-संयमपूर्वक कल्पवास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि पूरे माघ मास तक संगम तट पर निवास कर व्रत, स्नान एवं साधना करने वाले को सभी सुखों की प्राप्ति के पश्चात् मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस पावन मेले के दौरान कुल छह प्रमुख स्नान पर्व मनाए जाएंगे, जिनमें पहला स्नान पौष पूर्णिमा (03 जनवरी) को संपन्न हो चुका है। आइए, अब माघ मेले के आगामी सभी महत्वपूर्ण स्नान पर्वों की तिथि और उनके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Magh Mela 2026 सभी 6 महत्वपूर्ण स्नान पर्वों की तिथियाँ
1. मकर संक्रांति – दूसरा प्रमुख स्नान (15 जनवरी 2026)
माघ मेले का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्नान मकर संक्रांति के दिन होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण का प्रारंभ माना जाता है। हिंदू मान्यताओं में इस दिन को अत्यंत शुभ माना गया है। संगम स्नान के साथ-साथ तिल, गुड़, कंबल आदि का दान इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
2. मौनी अमावस्या – तीसरा प्रमुख स्नान (18 जनवरी 2026)
माघ मेले का तीसरा बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या का है। यह दिन मौन साधना के लिए विख्यात है। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर संगम स्नान व जप-तप करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं। सनातन परंपरा में इस तिथि को पितरों की तिथि भी कहा गया है, इसलिए इस दिन पिंडदान व तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन अखाड़ों के साधु-संत भी शाही स्नान करते हैं।
3. बसंत पंचमी – चौथा प्रमुख स्नान (23 जनवरी 2026)
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। संगम स्नान के पश्चात् मां सरस्वती की पूजा-आराधना करने का विधान है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना व पीले फूलों से पूजा करना शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।
4. माघी पूर्णिमा – पांचवा प्रमुख स्नान (01 फरवरी 2026)
माघ मेले का यह स्नान उन सभी कल्पवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिन्होंने पौष पूर्णिमा से कल्पवास प्रारंभ किया था। इस दिन उनके कल्पवास की पूर्णाहुति होती है। इस पूर्णिमा को संगम स्नान, दान, हवन व विशेष पूजा-अर्चना के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान एवं स्नान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
5. महाशिवरात्रि – मेले का अंतिम व अत्यंत महत्वपूर्ण स्नान (15 फरवरी 2026)
माघ मेले की परिणति महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ होती है। देवों के देव महादेव के इस पावन पर्व पर संगम स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तगण संगम में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं। रात्रि में चार प्रहर की विशेष पूजा-अर्चना व जागरण का आयोजन किया जाता है।
यात्रा एवं सुरक्षा तैयारियां:
उत्तर प्रदेश सरकार व प्रशासन द्वारा मेले के दौरान व्यापक सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात और चिकित्सा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे निर्धारित मार्गों व समय का ही पालन करें, भीड़ में सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन अवश्य करें।
माघ मेला केवल एक स्नान समागम नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति का एक जीवंत प्रतिबिंब है, जहां आस्था और विज्ञान का अनूठा मेल देखने को मिलता है। यह मेला आध्यात्मिक शुद्धि के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का भी एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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