Tamil Nadu Government का गठन: Vijay Thalapathy का 8 ग्राम गोल्ड बना चैलेंज !

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Tamil Nadu Government गठन: Vijay Thalapathy का 8 ग्राम गोल्ड बना चैलेंज !

VijayThalapathy की TVK ने Tamil Nadu में सरकार बनाने का दावा किया। जानिए 8 ग्राम सोने के वादे की आर्थिक चुनौतियों का पूरा गणित।

चेन्नई 09 May । तमिलनाडु की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से राजनेता बने Vijay Thalapathy के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। शनिवार को हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में VCK और IUML ने TVK को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की। इन दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं, जिसके बाद Tamil Nadu Government Formation की प्रक्रिया को मजबूती मिल गई है। अब विजय के पास कुल 120 विधायकों का समर्थन पहुंच गया है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है।

पिछले चार दिनों से चल रहा राजनीतिक असमंजस अब खत्म होता दिख रहा है। TVK ने राज्यपाल से सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए शनिवार शाम मिलने का समय मांगा है। पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपने की तैयारी में है। दो साल पुरानी इस पार्टी ने DMK और AIADMK जैसी दिग्गज पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए 108 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया है। हालांकि, विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिसके बाद पार्टी की वास्तविक संख्या 107 रह जाएगी।

Vijay Thalapathy सोने का वादा: खुशियां या आर्थिक संकट?

लेकिन सरकार बनते ही तमिलनाडु के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आएगी। यह चुनौती है विजय का चुनावी घोषणापत्र। उन्होंने चुनाव से पहले गरीब परिवारों को जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए हजारों किलो सोने की जरूरत पड़ेगी। उनके दो सबसे चर्चित वादे हैं – हर नवजात बच्चे को गोल्ड रिंग और गरीब परिवार की हर दुल्हन को 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी।

यह वादे जितने सुनने में अच्छे लगते हैं, उतने ही चुनौतीपूर्ण हैं। आइए इसके गणित पर नजर डालते हैं:

तमिलनाडु में हर साल लगभग 4 से 5 लाख शादियां होती हैं। यदि इनमें से 60 फीसदी परिवार इस योजना के दायरे में आते हैं, तो करीब 2.7 लाख दुल्हनों को हर साल सोना देना होगा। एक दुल्हन को 8 ग्राम सोना देने का मतलब सिर्फ इस एक योजना पर ही हजारों करोड़ रुपये का खर्च होगा। इसी तरह, राज्य में हर साल करीब 7 से 8 लाख बच्चे जन्म लेते हैं। गरीब परिवारों में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या अगर 60 फीसदी मानी जाए, तो करीब 4.7 लाख बच्चों को गोल्ड रिंग देनी पड़ेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर सिर्फ दुल्हन को 8 ग्राम सोना दिया जाए तो सरकार को हर साल 2160 किलो सोना खरीदना पड़ेगा। बच्चों की गोल्ड रिंग मिलाकर यह मात्रा और बढ़ जाएगी। इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीदने के लिए सरकार को RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विशेष अनुमति और सहयोग की आवश्यकता होगी। यानी अब यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था का बन गया है।

वेलफेयर बजट में 52 फीसदी का उछाल?

Vijay Thalapathy का घोषणापत्र केवल सोने तक सीमित नहीं है। उन्होंने महिलाओं के मुखिया वाले हर घर को ₹2500 मासिक, हर परिवार को छह मुफ्त LPG सिलेंडर और 10 लाख बेरोजगार युवाओं को ₹4000 मासिक भत्ता देने का वादा किया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर ये सभी योजनाएं लागू होती हैं, तो तमिलनाडु का वेलफेयर बजट मौजूदा 65,000 करोड़ से बढ़कर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी करीब 52 फीसदी की भारी बढ़ोतरी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या थालापति विजय ये वादे पूरे कर पाएंगे? क्या ये योजनाएं राज्य के खजाने पर भारी पड़ेंगी? क्या मुफ्त योजनाओं की यह राजनीति तमिलनाडु को आर्थिक संकट में डाल सकती है? विपक्षी पार्टियां और अर्थशास्त्री यही सवाल पूछ रहे हैं।

समर्थन का आंकड़ा बढ़ा, राजनीतिक दांव भी तेज

Tamil Nadu Government Formation को लेकर जहां TVK के समर्थन में लगातार इजाफा हो रहा है, वहीं विपक्षी गठबंधन बौखलाया हुआ है। चुनाव में DMK गठबंधन के साथ उतरी कांग्रेस ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन नतीजों के बाद उसने DMK से अलग होकर विजय को समर्थन दे दिया। इसके बाद वाम दलों ने भी अपने 4 विधायकों के साथ TVK का साथ देने का ऐलान किया।

TVK विधायक रेवंत चरण ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “तमिलनाडु के लोगों के लिए स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है। लोगों ने DMK-AIADMK और BJP के गठबंधन का असली चेहरा पहचान लिया है। अब आने वाले 25 वर्षों तक कोई भी विरोधी गठबंधन हमारे भावी मुख्यमंत्री विजय के करीब नहीं पहुंच पाएगा।”

सुनहरा वादा या सुनहरा सपना?

फिलहाल, तमिलनाडु की जनता की निगाहें राजभवन और TVK कार्यालय पर टिकी हैं। सरकार बनने की प्रक्रिया तो लगभग तय है, लेकिन असली परीक्षा सरकार चलाने की होगी। क्या विजय अपने सुनहरे वादों को पूरा कर पाएंगे, या ये सिर्फ चुनावी सपना बनकर रह जाएंगे? क्या राज्य की अर्थव्यवस्था इतना बड़ा बोझ उठा पाएगी? ये वो सवाल हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। फिलहाल, पूरा देश तमिलनाडु की इस अनोखी राजनीतिक प्रयोगशाला पर नजर बनाए हुए है।

Next Chief Minister Of West Bengal: Shubhendu Adhikari

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