
Luckow में Private schoolअभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। जिला शुल्क नियामक समिति ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। पूरी खबर पढ़ें।
लखनऊ।07 May शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की जेब काटने वाले Private school Luckow खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी हो रही है। जिला शुल्क नियामक समिति (DSRC) द्वारा कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, लखनऊ के कई निजी विद्यालयों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। स्कूल प्रशासन अभिभावकों पर एक निर्धारित दुकान से ही किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। यहीं नहीं, जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मात्र 65 रुपये कीमत वाली एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें निजी प्रकाशकों के माध्यम से अभिभावकों को 700 रुपये में बेची जा रही थीं।
यह मामला तब उजागर हुआ जब कई अभिभावकों ने इस अनियमितता और मनमानी के खिलाफ समिति से शिकायत की। अब इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है और Private school price hike (निजी स्कूलों द्वारा मूल्य वृद्धि) की यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।
अभिभावकों ने उठाया मोर्चा
दरअसल, जिला शुल्क नियामक समिति के पास अब तक 25 से अधिक Private school के खिलाफ अभिभावकों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को बाजार के बजाय एक विशिष्ट दुकान से ही किताबें, कॉपियां और अन्य स्टेशनरी सामान खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। ऐसा न करने पर बच्चे को स्कूल में प्रताड़ित किए जाने की आशंका जताई गई।
सबसे गंभीर आरोप यह था कि स्कूलों ने एनसीईआरटी की उन पाठ्यपुस्तकों के लिए जो मूल रूप से सस्ती हैं, कई गुना अधिक कीमत वसूली। 65 रुपये की किताब पर अभिभावकों को 700 रुपये तक देने पड़ रहे थे, जो कि स्पष्ट रूप से शोषण है।
जांच में आरोप साबित
समिति ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी। जांच समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी और अनिवार्य किताबें खरीदने का दबाव बनाने के आरोप पूरी तरह से सही हैं। न सिर्फ किताबों की कीमतें मनमानी थीं, बल्कि निर्धारित दुकान से ही खरीदारी करने की शर्त पूरी तरह से अवैध और अभिभावकों के अधिकारों के खिलाफ पाई गई।
जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि समिति ने नोटिस जारी कर कई स्कूलों से जवाब मांगा था। बुधवार को दो प्रमुख स्कूलों – शीलवती आइडल पब्लिक स्कूल और एलन हाउस पब्लिक स्कूल ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। हालांकि, स्कूलों के पक्ष और जांच कमेटी के निष्कर्षों के बीच साफ विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
अब आगे क्या?
जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने पुष्टि की है कि रिपोर्ट और स्कूलों द्वारा दिए गए जवाबों की गहन जांच अगले दो दिनों में पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसी सप्ताह दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। समिति ने आश्वासन दिया है कि अभिभावकों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और ऐसी मनमानी करने वाले स्कूलों को कोई छूट नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि समिति ने पहले ही तीन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी, जबकि अन्य मामलों का निपटारा अभिभावकों की मौजूदगी में किया जा चुका है। अब सबकी निगाहें इस सप्ताह होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अभिभावकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निजी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि किसी स्कूल में ऐसा दबाव बनाया जाता है, तो अभिभावक तुरंत जिला शुल्क नियामक समिति या जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
यह मामला साफ संकेत देता है कि शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रही इस सामान्य मनमानी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Private school price hike के खिलाफ यह कार्रवाई अन्य स्कूलों के लिए भी एक चेतावनी है।
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