तालिबान (Taliban)को आधिकारिक मान्यता: रूस बना पहला देश, क्या बदलेगा अफगानिस्तान का भविष्य?

रूस ने तालिबान (Taliban) शासन को आधिकारिक मान्यता दे दी है। जानिए इस ऐतिहासिक फैसले के मायने, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और भविष्य पर क्या होगा असर।
काबुल/मॉस्को 4 July, अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) के शासन को रूस ने आधिकारिक मान्यता दे दी है। यह कदम उठाने वाला रूस दुनिया का पहला देश बन गया है। गुरुवार को काबुल में हुई एक बैठक के बाद इसकी घोषणा की गई, जिसमें अफगान (Taliban) विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और रूस के राजदूत दिमित्री झिरनोव शामिल थे।
तालिबान(Taliban) ने क्या कहा?
तालिबान (Taliban) सरकार ने रूस के इस फैसले को “साहसिक और ऐतिहासिक” बताया। विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कहा, “यह दूसरे देशों के लिए एक मिसाल बनेगा। रूस ने मान्यता देकर बहादुरी दिखाई है।” तालिबान के प्रवक्ता जिया अहमद तकाल ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि रूस पहला देश है जिसने इस्लामिक अमीरात को मान्यता दी है।
रूस ने क्यों लिया यह फैसला?
रूस के अफगानिस्तान मामलों के विशेष प्रतिनिधि जामिर काबुलोव ने कहा कि इससे द्विपक्षीय सहयोग बढ़ेगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।”
अन्य देश क्या कर रहे हैं?
- चीन, पाकिस्तान और ईरान जैसे देशों ने तालिबान (Taliban) के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए हैं, लेकिन अभी तक किसी ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी थी।
- अमेरिका, भारत और यूरोपीय देश अभी भी तालिबान सरकार को मान्यता देने से इनकार कर रहे हैं।
आधिकारिक मान्यता के क्या मायने हैं?
जब कोई देश किसी सरकार को मान्यता देता है, तो इसका मतलब है कि वह उसे एक स्वतंत्र और वैध सरकार मानता है। इससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सदस्यता, व्यापार और कूटनीतिक संबंध बनाने में मदद मिलती है।
मोंटेवीडियो संधि के अनुसार, मान्यता के लिए चार शर्तें:
- स्थायी आबादी
- निश्चित सीमा
- सरकार का होना
- दूसरे देशों से संबंध बनाने की क्षमता
तालिबान का सत्ता में आना
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। तब से वह दुनिया से मान्यता की मांग कर रहा है। तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्लाह याकूब ने कहा था कि उनकी सरकार ने सभी शर्तें पूरी कर ली हैं, लेकिन अमेरिका के दबाव के कारण देश उन्हें मान्यता नहीं दे रहे।
रूस और तालिबान का पुराना रिश्ता
- 2003 में रूस ने तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
- 2017 में रूस ने तालिबान और अफगान सरकार के बीच शांति वार्ता की पहल की थी।
- अब यह फैसला रूस की नई भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा लगता है।
रूस का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर अन्य देश भी तालिबान को मान्यता देने लगें, तो अफगानिस्तान को वैश्विक मंच पर स्वीकार्यता मिल सकती है। हालांकि, मानवाधिकार और महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंताएं अभी भी बरकरार हैं।
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