Lucknow में देव दीपावली की धूम : 2.51 लाख दीपों की रोशनी से जगमगाया शहर!

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Lucknow में देव दीपावली

Lucknow में 5 नवंबर को देव दीपावली (dev deepawali) का भव्य आयोजन। 2.51 लाख दीये, गोमती तट पर महा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम। जानिए पूरी कार्यक्रम की रूपरेखा।

Lucknow में देव दीपावली की धूम

Lucknow :6 nov Lucknow में देवताओं के त्योहार ‘देव दीपावली’ की इस बार अद्भुत छटा देखने को मिली । इस पावन अवसर पर शहर को 2.51 लाख (दो लाख इक्यावन हज़ार) मिट्टी के दीपों की ज्योति से सजाया गया । यह जानकारी मंकामेश्वर मंदिर के महंत देवयागिरी ने दी। यह उत्सव 3 नवंबर से शुरू होकर 5 नवंबर तक चला , जिसमें मुख्य आयोजन 5 नवंबर को संपन्न हुआ ।

इस अवसर पर गोमती तट पर एक ‘महा आरती’ का आयोजन किया गया , जिसके बाद सांस्कृतिक गतिविधियाँ हुई इस मौके पर महंत देवयागिरी ने लोगों से अपील की कि वे गोमती नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने में सहयोग दें, ताकि इस पवित्र उत्सव की शोभा और बढ़ सके।

तीन दिवसीय उत्सव की रूपरेखा

उत्सव का शुभारंभ 3 नवंबर से विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ शुरू हुआ । 4 नवंबर को छात्राओं और महिलाओं के लिए रंगोली और वेदी सज्जा प्रतियोगिताएँ आयोजित की महंत देवयागिरी ने बतया कि इन कार्यक्रमों के पश्चात, भक्तगण दीप प्रज्ज्वलन कर उत्सव में शामिल हुए 5 नवम्बर को सांस्कृतिक कार्यक्र्म के साथ आतिशबाज़ी भी की गई ।

देव दीपावली का धार्मिक महत्व

देव दीपावली देश भर में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह occasion भगवान शिव की त्रिपुरासुर नामक राक्षस पर विजय का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सभी देवी-देवता भगवान शिव की इस विजय को celebrate करने के लिए काशी (वाराणसी) में एकत्रित हुए थे और गंगा तट पर दीप जलाए थे। इसीलिए, कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व को ‘देवताओं की दीपावली’ कहा जाता है।

एक सामूहिक उत्सव का संदेश

यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण भी है। गोमती तट की स्वच्छता के लिए की गई अपील इस बात पर जोर देती है कि हमारे त्योहार और प्रकृति का आपस में गहरा नाता है। एक स्वच्छ परिवेश ही किसी भी उत्सव की शोभा को दोगुना कर सकता है।

इस Dev Deepawali Lucknow उत्सव में शहर से हज़ारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हुए है। 2.51 लाख दीपों की जगमगाती लौ, गोमती नदी का निर्मल जल, महा आरती की गूंज और आकाश में फैली सुगंधित धूप का समागम एक अलौकिक वातावरण का सृजन कर रहा था । यह त्योहार न केवल आस्था, बल्कि सामूहिक उल्लास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बनकर उभर रहा है

News In short : 6 November की खबरें संक्षेप में 


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