TCS Files :नासिक में Hindu Women का यौन उत्पीड़न की पूरी कहानी और चुप्पी पर सवाल !

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TCS Files :नासिक में Hindu Women का यौन उत्पीड़न की पूरी कहानी और चुप्पी पर सवाल !


TCS nasik ऑफिस में 2022-26 तक Hindu Women के साथ यौन शोषण, धर्मांतरण का दबाव और उत्पीड़न। पुलिस की कोवर्ट टीम ने किया भंडाफोड़।

TCS नासिक ऑफिस में चार साल चला हिंदू महिलाओं का यौन शोषण, पुलिस ने कोवर्ट ऑपरेशन से किया पर्दाफाश

नासिक। देश की अग्रणी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक स्थित अशोका मार्ग बीपीओ यूनिट में सालों से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न, धार्मिक मजाक उड़ाने और जबरन धर्मांतरण के प्रयासों का मामला सामने आया है। यह सिलसिला जनवरी 2022 से 2026 तक करीब चार साल तक चला। पुलिस की एक गुप्त टीम (कोवर्ट ऑपरेशन) ने स्वयं वहां काम कर इस मामले का भंडाफोड़ किया।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, यह इकाई एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड कलेक्शन डेटा को मैनेज करती थी। यहां छह मुस्लिम कर्मचारियों – शाहरुख कुरैशी, रजा मेनन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख और शफी शेख – के साथ एचआर मैनेजर निदा खान व अश्विनी चैनानी ने मिलकर एक व्यवस्थित साजिश रची। पीड़ित महिलाओं के अनुसार, आरोपी उनके हिंदू होने का मजाक उड़ाते थे।

एक पीड़िता ने बताया, “आसिफ अंसारी ने कहा कि हिंदू महिलाएं बुर्का नहीं पहनतीं, इसलिए उनके साथ बलात्कार होता है। रजा मेनन तो हमारे देवी-देवताओं को नंगा कहकर हमें बार-बार अपमानित करते थे। गुड़ी पड़वा के दिन उन्होंने हमारे सूट के पल्लू खींचकर बेइज्जती की कोशिश की।”

2022 से 2026 तक उत्पीड़न का दौर

यह श्रृंखला जनवरी 2022 में तब शुरू हुई जब दानिश शेख ने अपने कॉलेज की 23 वर्षीय हिंदू लड़की को TCS में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। शारीरिक संबंध बनाने और शादी का वादा कर उसे कंपनी ज्वाइन करवाया गया। वहां एचआर मैनेजर निदा खान ने उसे इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया।

इसके अलावा, TCS में 11 साल काम कर चुकी 36 वर्षीय टीम लीडर ने शफी शेख के उत्पीड़न की शिकायत उसके बॉस नितिन कपूर और दीपक सिंह तक की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शाहरुख कुरैशी महिलाओं की निजी जिंदगी, बॉयफ्रेंड और हनीमून के बारे में अश्लील सवाल पूछता था। दानिश शेख नासिक के होटल आनंद रिज़ॉर्ट में महिलाओं को ले जाकर उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करता था।आप किसी को फोर्सेबली कन्वर्ट करेंगे। काम करने का मतलब नहीं है कि आप किसी महिला का पल्लू खींचेंगे। काम करने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप किसी महिला के धर्म के बारे में उनके भगवानों के बारे में अपशब्द और इस प्रकार की टिप्पणियां करेंगे। और यदि अगर आप यह प्रकार का काम कर रहे हैं तो माफ कीजिएगा। आप काम करने के लायक नहीं है। आप हलाल करने के लायक हैं। लेकिन अनफॉर्चूनेट रियलिटी यहां पर यह है कि पूरा का पूरा लेफ्टिस्ट मीडिया पूरी विपक्षी पार्टियां साइलेंट है। सांप सूंघ गया है जैसे उनको प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हो रही। पीपीटी नहीं चल रही, कुछ नहीं हो रहा। क्यों? ये सब चीजें क्यों नहीं हो रही? आपको समझना है क्योंकि यहां पर इन लेफ्टिस्ट लोगों का जो थॉट प्रोसेस है वह सिंपल है। किसी भी केस में रिलीजियस आइडेंटिटी को देखकर यह डिसीजन लेना है कि क्राइम जो हुआ है उसको रिपोर्ट करना है। उजागर करके उसके बारे में शोषाबाजी करनी है, नौटंकियां करनी है या उसको सप्रेस करना है

पुलिस का कोवर्ट ऑपरेशन – कैसे हुआ भंडाफोड़?

नासिक पुलिस की सात महिला पुलिसकर्मियों ने कर्मचारी बनकर TCS ज्वाइन किया। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से उत्पीड़न का अनुभव कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मामले की जांच कर इसे सार्वजनिक किया। पीड़ितों में दलित महिलाएं भी शामिल हैं, जैसा कि FIR में दर्ज है।

TCS का AI-जनरेटेड PR स्टेटमेंट

मामला उजागर होने के बाद TCS ने एक सामान्य PR स्टेटमेंट जारी किया, जिसे पीड़ितों ने “चैटGPT से जनरेटेड” बताया। स्टेटमेंट में कहा गया कि “टॉलरेंस के साथ कार्रवाई होगी।” लेकिन सवाल यह है कि जब चार साल से शिकायतें मिल रही थीं, तब कंपनी क्यों चुप थी? पीड़िता का कहना है, “आज कोई जवाब नहीं देगा। क्योंकि हिंदू महिलाएं शामिल हैं, इसलिए मामला रफा-दफा हो जाएगा।”

Hindu Women यौन उत्पीड़न पर विपक्ष, मीडिया और ‘अल्टरनेट मीडिया’ की चुप्पी

यह मामला उन कई सवालों को खड़ा करता है, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला। जबकि 2017 के अखलाक मामले को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया गया था, यहां हिंदू महिलाओं के यौन शोषण पर विपक्षी पार्टियों और वामपंथी मीडिया ने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। तथाकथित ‘अल्टरनेट मीडिया’ ने इस पर चर्चा तक नहीं की। वहीं, कुछ यूट्यूबर्स ने इसे “हिंदुओं की साजिश” बताकर मुसलमानों को नौकरी से निकालने की साजिश करार दे दिया।

लेखक ने अपने एमबीए (एचआर) के अनुभव का हवाला देते हुए कहा, “हमें पढ़ाया गया था कि TCS की HR नीतियां सबसे बेहतर हैं। लेकिन यहां चार साल तक ऐसा होता रहा।”

क्या बदलेगा?

यह मामला न सिर्फ TCS जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के कामकाजी माहौल पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे धर्म के आधार पर महिलाओं का यौन शोषण और उपहास कॉर्पोरेट दीवारों के अंदर सालों तक चल सकता है।दोषी माफ कीजिएगा। अपने हिंदू भाई बहनों को भी मानता हूं क्योंकि अगर और कोई नहीं तो आज आपको कौन रोक रहा है इस सोशल मीडिया के जमाने में इस चीज को उजागर करने के लिए। आपके हाथ पर हाथ रखकर आपका उद्देश्य केवल यह है कि हम सिर्फ पांच दिन पैसा कमाएंगे और छठे दिन जाकर ₹150 की किंगफिशर पी के मूंगफली खा के नाच गाना अय्याशी करके और सातवें दिन हम जो है मॉल जाकर घूमेंगे और सो जाएंगे। जागो यार जागो। यहां पर सारी जिंदगी सिर्फ पैसे की बात नहीं है। आपकी यदि आइडेंटिटी और अगर वजूद ही खत्म हो गया ना तो फिर कुछ नहीं बचेगा। और यहां पर कुछ ऐसे लोग हैं जो यह चाहते हैं कि यह हो जाए। आज अगर इस इतने घिनौने इंसिडेंट के बाद भी आपकी यदि रूह नहीं कांपी और अगर इस इंसिडेंट के बाद भी अगर आप अभी तक अनफेक्टेड रहना चाहते हैं कि कोई बात नहीं हो गया तो हो गया तो फिर मैं इससे ज्यादा कुछ बोलना नहीं चाहता।

अब देखना यह होगा कि TCS और पुलिस इस मामले में कितनी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर हैशटैग #JusticeForHinduWomen और #TCS_HarassmentCase तेजी से वायरल हो रहे हैं।

नासिक Carporate Love Jihad: हिन्दूओ के जबरन धर्मांतरण की पूरी कहानी !

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