Chaitra Navratri 2026 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त!

Chaitra Navratri 2026 Day 2 मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त जानें। माता को प्रसन्न करने के लिए करें इस विधि से पूजा।
चैत्र नवरात्रि का पवित्र पर्व 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। आज, 20 मार्च को नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है । मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, वैराग्य और साधना की देवी हैं। उनकी उपासना से भक्तों को अटल भक्ति, बुद्धि और संयम की प्राप्ति होती है । अगर आप भी मां की विधिवत पूजा करना चाहते हैं, तो यहां जानिए Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi, शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र और आरती के बारे में विस्तार से।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी? (Who are Maa Brahmacharini?)
‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली । मां ब्रह्मचारिणी ही वह स्वरूप हैं, जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी । इस कठोर तपस्या के कारण ही उन्हें ‘ब्रह्मचारिणी’ और ‘तपश्चारिणी’ नाम से जाना जाता है। मां के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है, जो साधना और त्याग का प्रतीक है।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Auspicious Muhurat for Puja)
नवरात्रि के दूसरे दिन मां की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। आप इन समय में पूजा कर सकते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:08 AM से 05:55 AM तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 PM से 03:18 PM तक
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
अगर आप घर पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर रहे हैं, तो इस सरल Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi का पालन करें:
- प्रातःकाल स्नान और संकल्प: नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें। पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है ।
- पूजा स्थल की सफाई: पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें और वहां पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें ।
- घी का दीपक जलाएं: मां के समक्ष घी का दीपक और धूप-दीप जलाएं।
- सामग्री अर्पित करें: मां को सफेद या लाल रंग के फूल, चंदन, रोली, अक्षत (चावल) अर्पित करें । मां को सफेद फूल अत्यंत प्रिय हैं।
- मंत्र जाप: मां के मूल मंत्र “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद अन्य मंत्रों का उच्चारण करें ।
- भोग लगाएं: मां ब्रह्मचारिणी को भोग में मिश्री (सफेद चीनी), फल, दूध और पंचामृत अर्पित करना चाहिए ।
- कथा और आरती: मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें।
मां ब्रह्मचारिणी के शक्तिशाली मंत्र (Powerful Mantras)
मां को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है :
मूल मंत्र (Mula Mantra):
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
प्रार्थना मंत्र (Prarthana Mantra):
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति मंत्र (Stuti Mantra):
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा (Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या का निर्णय लिया। नारद जी के कहने पर उन्होंने व्रत और संयम का जीवन व्यतीत करना शुरू किया। माना जाता है कि हजारों वर्षों तक माता ने केवल फल-फूल खाकर, बिल्वपत्र खाकर और अंत में निर्जला रहकर कठोर तपस्या की . इस कठिन तपस्या के कारण ही उनका नाम ‘तपश्चारिणी’ या ‘ब्रह्मचारिणी’ पड़ा।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ऋषि का रूप धारण कर उनकी परीक्षा लेना चाही। जब ऋषि रूपी शिव ने उनकी तपस्या की निंदा की और उन्हें विचलित करने का प्रयास किया, तो माता ने उनकी एक न सुनी और अपनी साधना में लीन रहीं। अंत में भगवान शिव ने अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया कि वे उनकी पत्नी बनेंगी ।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती (Aarti)
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जनश्रुतियों पर आधारित है। इसे प्रामाणिक वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लें। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले किसी विद्वान पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।
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