TET अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, दिल्ली जाम की चेतावनी

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TET अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, दिल्ली जाम की चेतावनी


राजधानी के शिक्षकों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बताया गलत, दिल्ली में बड़े आंदोलन की दी चेतावनी। #TeachersProtest, #TETExam,

लखनऊ 26 feb :राजधानी के शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर हजारों की संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए और अपने आक्रोश का जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ था, जिसमें सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य कर दिया गया है।

Teachers Protest Against TET

प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सिटी स्टेशन के पास स्थित मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बाद शिक्षकों का रोष लेकर भीड़ शिक्षा भवन परिसर पहुंची और वहां तीन घंटे से अधिक समय तक धरने पर बैठी रही। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को परिसर में आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उन्हें कुछ समय के लिए रोका भी गया। परिसर के बाहर शिक्षकों का आक्रोश देखते ही बन रहा था।

बता दें कि Teachers Protest Against TET का यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के 2025 में दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले की प्रतिक्रिया है। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TETअनिवार्य है। इस फैसले ने उन हजारों शिक्षकों को झटका दिया है, जो इस अधिनियम के लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे और अब उनके समक्ष नौकरी जाने का संकट मंडराने लगा है।

टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुधांशु मोहन ने प्रदर्शन स्थल पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आदेश पूरी तरह से गलत और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा, “शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 जुलाई 2011 में लागू हुआ था। इस अधिनियम के अनुसार, 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य है, लेकिन उससे पहले से कार्यरत शिक्षकों को इससे छूट प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम की इस मूल भावना को नजरअंदाज करते हुए सभी के लिए यह अनिवार्यता लागू कर दी, जो कि न्यायसंगत नहीं है।”

शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं और उनके पास पर्याप्त अनुभव है। ऐसे में अचानक से उनके लिए टीईटी अनिवार्य कर देना उनके साथ घोर अन्याय और मानसिक प्रताड़ना है। सुधांशु मोहन ने आगे बताया, “इस आदेश के बाद से शिक्षक मानसिक रूप से काफी परेशान हैं। हमने आज प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि टीईटी की इस अनिवार्यता को तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए और पुराने शिक्षकों को इसके दायरे से बाहर रखा जाए।”

बृहस्पतिवार का यह प्रदर्शन महज एक शुरुआत थी। शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांग नहीं सुनी गई, तो आंदोलन और तीव्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी मार्च महीने में नई दिल्ली में एक विशाल देशव्यापी धरना आयोजित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान देशभर से आए हजारों शिक्षक पूरी दिल्ली को जाम कर देंगे और केंद्र सरकार को घेरने का काम करेंगे।

इस प्रदर्शन में सहित प्रदेश के परिषदीय विद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद हर तरफ शिक्षकों का विरोध शुरू हुआ। बृहस्पतिवार को इसी सिलसिले में राजधानी के शिक्षकों ने भी एकजुटता का संदेश दिया। शिक्षा भवन परिसर में करीब एक हजार शिक्षक विभाग से आकस्मिक छुट्टी लेकर पहुंचे। पूरे परिषद को घेर लिया और इस दौरान विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी आने-जाने पर कुछ देर तक पाबंदी देखी गई। शिक्षकों का कहना है कि वे इस अन्याय के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे।

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