अब क्रिकेट में भी हिंदू-मुस्लिम? टीम इंडिया की हार पर AIMIM ने उठाए सवाल, छिड़ा Cricket Politics पर नया विवाद!

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अब क्रिकेट में भी हिंदू-मुस्लिम? टीम इंडिया की हार पर AIMIM ने उठाए सवाल, छिड़ा Cricket Politics पर नया विवाद!

टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका से हार के बाद AIMIM ने गौतम गंभीर पर निशाना साधा। जानिए शोएब जमाई के बयान पर क्यों छिड़ा cricket politics का नया विवाद

अभी टी20 वर्ल्ड कप चल रहा है और भारतीय टीम को सुपर-8 के अपने पहले मुकाबले में साउथ अफ्रीका के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। लेकिन इस हार ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मैदान पर मिली हार के बाद अब सियासत गरमा गई है और इसमें हिंदू-मुसलमान की बात आ गई है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया है 

दरअसल, अहमदाबाद में खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम की हार के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। प्रदर्शन पर सवाल उठना लाजमी है, लेकिन इस बार बवाल कुछ और ही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता शोएब जमाई ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है । उन्होंने कहा कि मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और सरफराज खान जैसे काबिल और होनहार मुस्लिम क्रिकेटर्स को नजरअंदाज करके “पर्ची प्लेयर्स” को मौका देना टीम को महंगा पड़ गया।

क्या टीम इंडिया ‘नफरत की राजनीति’ का शिकार है?

इस बयान ने cricket politics को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। शोएब जमाई ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, अकीब नबी और सरफराज खान जैसे काबिल और होनहार क्रिकेटर्स को नजरअंदाज करके सारे पर्ची प्लेयर्स को शामिल करना आपको महंगा पड़ेगा ही। गौतम गंभीर को समझना होगा कि वह अब भाजपा के सांसद नहीं, एक कोच हैं।” 

इस टिप्पणी के बाद सियासी बवाल और गहरा गया। जहां एक तरफ शहजाद पूनावाला ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि AIMIM सिर्फ मुसलमानों की राजनीति करती है, उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि भारत का एक मुस्लिम कप्तान रह चुका है और टीम में अभी भी कई मुस्लिम खिलाड़ी नियमित रूप से खेल रहे हैं।

वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “किसी भी खेल में धर्म लाना गलत है। अगर कोई खिलाड़ी काबिल है तो उसे खेलना चाहिए। धर्म के नाम पर किसी को बाहर करना गलत है।” उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम खिलाड़ियों को सम्मान के साथ मौका दिया जाना चाहिए 

Cricket Politics :’बार-बार ऐसे बयानों से दिल दुखता है’

इस पूरे विवाद पर पूर्व क्रिकेटर्स ने भी निराशा जताई है। क्रिकेट में राजनीति लाने को लेकर पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन ने कहा कि क्रिकेट में राजनीति नहीं होनी चाहिए। एक जाने-माने क्रिकेटर ने इस मामले पर दुख जताते हुए कहा, “बार-बार ऐसी स्टेटमेंट आती है, थोड़ा दिल दुखता है। मजहब को स्पोर्ट्स में कोई सवाल नहीं बनना चाहिए। बार-बार इसी तबके के लोग ऐसी स्टेटमेंट देते हैं, जिससे टीम डिमोरलाइज होती है” 

उन्होंने आगे कहा कि आजकल हर जगह धर्म को लाया जा रहा है और विकास या इंसाफ की बात खत्म हो गई है। “जो किसी भी धर्म का आदमी हो, अच्छा खिलाड़ी हो, उसे खिलाना चाहिए। जानबूझकर किसी धर्म को साइड करना बड़ी नाइंसाफी है। टीम में वही खिलाड़ी टिकेगा जो अच्छा प्रदर्शन करेगा, न कि हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने से।”

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2024 के सुपर-8 मुकाबले में भारत को साउथ अफ्रीका के हाथों हार का सामना करना पड़ा था । इस हार के बाद टीम की प्लेइंग इलेवन की चयन नीति पर सवाल उठने लगे। AIMIM नेता का आरोप है कि टीम में चुनिंदा खिलाड़ियों को शामिल किया गया और काबिल मुस्लिम खिलाड़ियों को दरकिनार कर दिया गया 

हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब भारतीय क्रिकेट टीम को लेकर इस तरह की बयानबाजी हुई हो। इससे पहले भी जब कभी टीम का प्रदर्शन खराब रहा है, तो selection committee या टीम प्रबंधन पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। बीसीसीआई ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि टीम प्रबंधन इस हार से सबक लेते हुए आगामी मैचों में मजबूत वापसी करेगा 

देखना यह होगा कि cricket politics का यह नया मुद्दा आगे चलकर टीम के माहौल को कितना प्रभावित करता है और आगामी मैचों में टीम इंडिया कैसे उतरती है। फिलहाल तो यह बयानबाजी क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक नई बहस छेड़ गई है कि आखिर खेल को धर्म के चश्मे से देखना कितना सही है।

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