Nepal: 3 Days of Massive Protest- PM और President ने किया Resign, सेना प्रमुख अशोक सिग्देल ने संभाली कमान

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Nepal में जन-जी विद्रोह और विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने इस्तीफ़ा दे दिया है। हिंसा, आगज़नी और कर्फ्यू के बीच सेना ने देश की बागडोर संभाली। जानिए पूरी कहानी, नए सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल की भूमिका और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के प्रयास।

लखनऊ 10 सितम्बर, 2025: Nepal इन दिनों इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। 8 सितंबर 2025 से शुरू हुआ जेन-ज़ी विद्रोह केवल एक साधारण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी चिंगारी थी जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। सरकार द्वारा अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने युवाओं को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया।

युवाओं की यह नाराज़गी सिर्फ इंटरनेट बंद होने तक सीमित नहीं थी। बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, राजनीतिक परिवारों की ऐशो-आराम भरी ज़िंदगी और आम जनता की समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया—इन सबने मिलकर विद्रोह को और प्रचंड बना दिया।

विद्रोह की वजह और शुरुआत

8 सितंबर 2025 को जब Nepal सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया, तो इसे जनता ने सेंसरशिप का बड़ा हमला माना। खासकर Gen-Z यानी नई पीढ़ी जो डिजिटल दुनिया पर सबसे अधिक निर्भर है, उन्होंने इसे अपने अधिकारों का हनन समझा।

  • सरकार ने तर्क दिया कि सोशल मीडिया से फेक न्यूज़ और नफ़रत फैल रही है।
  • लेकिन युवाओं का मानना था कि यह कदम असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए उठाया गया।
  • पहले दिन सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, दूसरे दिन यह संख्या हज़ारों में पहुँच गई।
  • प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो गया और संसद भवन से लेकर अदालतों और नेताओं के घरों तक आगजनी शुरू हो गई।

विरोध के दौरान हुई भयावह घटनाएँ

यह विरोध प्रदर्शन कुछ ही घंटों में हिंसा में बदल गया।

  1. आगजनी और तोड़फोड़:
    • प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, अदालतों और कई मंत्रियों के घरों में आग लगा दी।
    • राजधानी काठमांडू की कई सड़कें रणभूमि में बदल गईं।
  2. सुरक्षा बलों की सख्ती:
    • पुलिस और सेना ने आंसू गैस, पानी की तोप और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया।
    • इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए और अफरा-तफरी मच गई।
  3. मौत और तबाही:
    • अब तक हुई घटनाओं में 19–22 लोगों की मौत हो चुकी है।
    • दर्जनों लोग घायल हैं और अस्पतालों में जगह कम पड़ रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की दर्दनाक मौत

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इन प्रदर्शनों की सबसे भयावह घटना रही—पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल के घर पर हमला। प्रदर्शनकारियों ने उनके निवास को आग के हवाले कर दिया।

  • उनकी पत्नी राज्यालयक्ष्मी चित्रकार घर के भीतर फंस गईं और बाहर निकलने से पहले ही जिंदा जल गईं।
  • यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली थी और विद्रोह के चरम बिंदु को दर्शाती है।
  • राजनीतिक वर्ग ने इसे लोकतंत्र के लिए सबसे काले दिन के रूप में देखा।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का इस्तीफ़ा – विस्तार से व्याख्या

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1. घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

2025 की शुरुआत से ही नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही थी।

  • महंगाई और बेरोज़गारी ने जनता को गुस्से में ला दिया।
  • सरकार पर आरोप था कि उसने जनता की आवाज़ दबाने के लिए सेना और पुलिस का दुरुपयोग किया।
  • भ्रष्टाचार के कई मामलों ने जनता का विश्वास तोड़ दिया।
  • विपक्ष ने लगातार संसद में पीएम ओली के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की।

इन सब कारणों ने धीरे-धीरे जनता और सरकार के बीच खाई को गहरा किया।

2. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर आरोप

ओली के इस्तीफ़े के पीछे सबसे बड़ा कारण था जनता का भरोसा खो देना।

  • जनता की आवाज़ दबाना: आंदोलनों और रैलियों को बलपूर्वक रोकने का आरोप।
  • भ्रष्टाचार: विपक्ष ने कहा कि सरकार ने राहत पैकेज और अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी गड़बड़ी की।
  • असफल नेतृत्व: महंगाई, बेरोज़गारी और निवेश संकट पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
  • हिंसा का माहौल: काठमांडू और अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें आम हो गईं।

इन आरोपों ने ओली को राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद कमजोर कर दिया।

3. इस्तीफ़े की टाइमलाइन

  • 8 सितंबर 2025: संसद भवन के बाहर लाखों लोग जमा हुए। पुलिस और जनता में हिंसक टकराव हुआ।
  • 9 सितंबर सुबह: विपक्षी नेताओं ने ओली के इस्तीफ़े की मांग तेज़ की।
  • 9 सितंबर दोपहर: ओली ने आपात बैठक बुलाकर मंत्रिमंडल से चर्चा की।
  • 9 सितंबर शाम: टीवी पर राष्ट्र के नाम संबोधन में ओली ने कहा—
    “मैं लोकतंत्र और देश की स्थिरता के लिए पद छोड़ रहा हूँ।”

इसके साथ ही प्रधानमंत्री का पद खाली हो गया।

4. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल का इस्तीफ़ा

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प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े के तुरंत बाद राष्ट्रपति पौडेल पर भी दबाव बढ़ गया।

  • विपक्ष और जनता का मानना था कि राष्ट्रपति ने संकट के दौरान प्रधानमंत्री का पक्ष लिया।
  • उन पर आरोप था कि वे संवैधानिक पद पर रहते हुए भी तटस्थ नहीं रहे।
  • विरोध प्रदर्शनों में राष्ट्रपति भवन तक भी प्रदर्शनकारियों ने मार्च किया।

इन्हीं हालातों को देखते हुए पौडेल ने भी इस्तीफ़ा देकर राजनीतिक संकट को और गहरा दिया।

अब सत्ता किसके हाथ में?

Nepal में 8–9 सितंबर 2025 को हालात इतने बिगड़ गए कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल दोनों को पद छोड़ना पड़ा। इससे सत्ता का शून्य (Power Vacuum) पैदा हो गया। ऐसे समय में, जब प्रशासन ठप हो और राजनीतिक नेतृत्व गायब हो, तो संविधान और परंपरा के अनुसार देश की सुरक्षा और स्थिरता का जिम्मा सेना उठाती है। यही स्थिति Nepal में बनी।

सेना का मोर्चा संभालना

  • प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के इस्तीफ़े के तुरंत बाद Nepal सेना ने देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
  • सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल अब न केवल सेना के सर्वोच्च अधिकारी हैं, बल्कि उन्हें देश का वास्तविक शासक माना जा रहा है।
  • राष्ट्रपति ने औपचारिक तौर पर सत्ता हस्तांतरण की घोषणा नहीं की, लेकिन व्यावहारिक रूप से सेना की कमान ही नेपाल की असली सरकार बन गई।

कर्फ्यू और सुरक्षा कड़ी

  • काठमांडू, पोखरा, विराटनगर जैसे बड़े शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
  • सड़कों पर भारी संख्या में सैनिक तैनात किए गए।
  • रात में गश्त बढ़ा दी गई ताकि आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
  • कई जगहों पर सेना ने सीधे नियंत्रण स्थापित किया, यानी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय सैनिक ही आदेश दे रहे हैं।

मंत्रियों की सुरक्षा

  • विद्रोहियों ने कई मंत्रियों और नेताओं के घरों पर हमला किया।
  • सेना ने हेलीकॉप्टर और बख़्तरबंद वाहनों की मदद से मंत्रियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।
  • कई नेताओं को सेना के कैंपों और एयरबेस में शिफ्ट किया गया है ताकि भीड़ उन तक न पहुँच सके।

सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल की भूमिका

  • जनरल सिग्देल अब Nepal के वास्तविक फैसले लेने वाले नेता हैं।
  • वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि:
    1. कर्फ्यू और सुरक्षा व्यवस्था के ज़रिए हिंसा पर काबू पाया जाए।
    2. राजनीतिक अस्थिरता के बीच व्यवस्था बनी रहे।
    3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की छवि पूरी तरह ध्वस्त न हो।

आगे का रास्ता

  • सेना ने संकेत दिया है कि वह स्थिति सामान्य होने तक सत्ता अपने हाथ में रखेगी।
  • संभावना यह भी है कि सेना राजनीतिक दलों के बीच संवाद कराकर अस्थायी राष्ट्रीय सरकार (Interim Government) बनवाने की कोशिश करे।
  • अगर ऐसा नहीं हुआ तो Nepal लंबे समय तक सैन्य शासन (Military Rule) की स्थिति में जा सकता है।

जनरल अशोक राज सिग्देल: कौन हैं और भारत से क्या रिश्ता है?

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जनरल अशोक राज सिग्देल का जन्म 1 फरवरी 1967 को नेपाल में हुआ था। वे पेशेवर और अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं।

  • उन्होंने 9 सितंबर 2024 को नेपाली सेना के प्रमुख का पद संभाला।
  • पढ़ाई और ट्रेनिंग उन्होंने नेपाल, भारत और चीन—तीनों जगह की है।
  • Nepal के त्रिभुवन विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री और चीन की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से रणनीति में मास्टर किया।
  • भारत में उन्होंने डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स पूरा किया।

भारत और Nepal के बीच उनके संबंध विशेष हैं। भारत ने उन्हें भारतीय सेना का मानद जनरल भी बनाया है। इसी कारण उन्हें भारत का करीबी माना जाता है।

भारत सरकार की भूमिका और भारतीयों की सुरक्षा

Nepal में स्थिति बिगड़ने के बाद भारत सरकार भी सक्रिय हो गई।

  1. विदेश मंत्रालय की एडवायजरी:
    • भारतीयों को घर में सुरक्षित रहने और अनावश्यक यात्रा टालने की सलाह दी गई।
    • आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए।
  2. सीमा पर अलर्ट:
    • उत्तर प्रदेश सरकार ने नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी।
    • SSB और PAC की अतिरिक्त तैनाती की गई है।
  3. आंध्र प्रदेश सरकार की पहल:
    • दिल्ली स्थित आंध्र भवन में इमरजेंसी सेल बनाया गया।
    • तेलुगू नागरिकों के लिए भोजन, दवाई और रहने की व्यवस्था की गई।
  4. विशेष विमान से वापसी की तैयारी:
    • त्रिभुवन एयरपोर्ट बंद होने से 400 से अधिक भारतीय नागरिक वहाँ फंसे हैं।
    • भारत सरकार उन्हें निकालने के लिए भारतीय वायुसेना के दो विमान भेजने की तैयारी कर रही है।
    • काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास, नेपाली सेना से समन्वय कर रहा है ताकि यात्रियों को सुरक्षित दिल्ली लाया जा सके।

Nepal में कर्फ्यू और हवाई अड्डा बंद

तीन दिनों से जारी हिंसा के बीच कर्फ्यू लगाया गया है।

  • राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है।
  • त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।
  • इसके कारण न सिर्फ भारतीय बल्कि सैकड़ों विदेशी यात्री भी फंसे हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय नजरिया और भविष्य की चुनौतियाँ

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Nepal में इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।

  • चीन और भारत दोनों देशों की कड़ी नज़र Nepal की स्थिति पर है।
  • अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने हिंसा रोकने और लोकतंत्र बहाल करने की अपील की है।
  • भविष्य में Nepal को सबसे बड़ी चुनौती होगी—राजनीतिक स्थिरता और जनता का भरोसा वापस जीतना।

Nepal का यह जेन-ज़ी विद्रोह केवल सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध का परिणाम नहीं है, बल्कि यह वर्षों से पनप रही नाराज़गी का विस्फोट है। भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, राजनीतिक अस्थिरता और जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिशों ने इस विद्रोह को जन्म दिया।

आज Nepal की सत्ता सेना के हाथों में है और जनरल अशोक राज सिग्देल इसकी कमान संभाले हुए हैं। हालांकि, लोकतंत्र की बहाली और जनता के विश्वास को कायम रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि Nepal न केवल पड़ोसी है बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी उससे गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय सरकार द्वारा अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी और सीमा पर सुरक्षा कड़ा करना इस बात का प्रमाण है कि नेपाल का हर संकट भारत पर सीधा असर डालता है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि Nepal लोकतंत्र की राह पर वापस लौट पाता है या सेना के नियंत्रण में नई राजनीतिक तस्वीर उभरती है।

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One thought on “Nepal: 3 Days of Massive Protest- PM और President ने किया Resign, सेना प्रमुख अशोक सिग्देल ने संभाली कमान

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