NASA Shutdown: कंगाली की कगार पर अमेरिकी सरकार , अंतरिक्ष मिशन प्रभावित!

अमेरिकी सरकार के Shutdown के कारण NASA के ऑपरेशन बंद। आर्टेमिस मून मिशन प्रभावित, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा चुनौती। जानें पूरी खबर।
वाशिंगटन 3 Oct । अमेरिकी सरकार में बजट को लेकर गतिरोध के चलते हुए शटडाउन का सीधा असर देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी नासा पर पड़ा है। एजेंसी को अपने अधिकांश ऑपरेशन्स, जनसंपर्क और दैनिक गतिविधियों को अनिश्चित काल के लिए निलंबित करना पड़ा है। नासा ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिस जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार से फंडिंग बंद होने के कारण एजेंसी “अगले आदेश तक बंद रहेगी।”
आप को बता दे यह संकट तब शुरू हुआ जब 1 अक्टूबर, 2025 को अमेरिकी कांग्रेस संघीय बजट को पारित करने या अस्थायी वित्तीय व्यवस्था पर सहमत होने में विफल रही। इसके परिणामस्वरूप, लगभग छह वर्षों में पहली बार, अमेरिकी सरकार ने शटडाउन की स्थिति में प्रवेश किया। इस फैसले ने नासा सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों में हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेज दिया है। दरअसल अमेरिका ट्रम्प की tariff-राजनीति से तारतम्य नहीं बैठा पा रहा है !
NASA shutdown: क्या बंद हुआ और क्या चल रहा है?
आधिकारिक दिशा-निर्देशों के तहत, केवल वे गतिविधियाँ ही जारी रखी जा रही हैं जो “जीवन और संपत्ति की सुरक्षा” के लिए आवश्यक हैं। इसका सीधा मतलब है कि नासा के अधिकांश वैज्ञानिक शोध, शैक्षिक कार्यक्रम और सार्वजनिक जुड़ाव के कार्य बंद कर दिए गए हैं। एजेंसी की सोशल मीडिया गतिविधियाँ लगभग पूरी तरह से ठप पड़ी हैं और नियमित मिशन अपडेट में भी व्यवधान आया है।
हालाँकि, कुछ महत्वपूर्ण अपवाद भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर स्थित अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी जारी है। इसी तरह, सौर मंडल में सक्रिय अंतरिक्ष यानों (जैसे कि मंगल रोवर्स) की कमांड और कंट्रोल, और पृथ्वी को खतरनाक क्षुद्रग्रहों से बचाने से जुड़ी ‘प्लैनेटरी डिफेंस’ गतिविधियाँ सीमित कर्मचारियों की देखरेख में चलती रहेंगी। क्योकि अभी भी बहुत से यात्री अंतरिक्ष में है !
आर्टेमिस चंद्र मिशन पर मंडराता खतरा
इस शटडाइन का सबसे गहरा प्रभाव NASA के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस कार्यक्रम पर पड़ने की आशंका है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य दशकों बाद पहली बार मनुष्यों को चंद्रमा की सतह पर वापस भेजना है। फंडिंग के रुकने से इसकी तैयारियों, जिनमें रॉकेट असेंबली और लॉन्च शेड्यूलिंग शामिल हैं, में देरी होने की पूरी संभावना है। यह ठहराव न केवल अमेरिका बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों की अंतरिक्ष योजनाओं के लिए भी एक झटका है।
इसके अलावा, NASA द्वारा वित्त पोषित देश भर की अनगिनत शोध परियोजनाएँ और विश्वविद्यालय सहयोग भी बाधित हो गए हैं। नासा के साथ काम करने वाले हजारों ठेकेदारों को भी वित्तीय अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है
यह पहली बार नहीं है जब नासा को ऐसी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है। 2018-19 में हुए 35 दिनों के लंबे शटडाउन ने भी एजेंसी के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया था, जिससे परियोजनाओं में देरी हुई और कर्मचारियों का मनोबल गिरा था। वर्तमान स्थिति एक बार फिर उस चिंताजनक पैटर्न को दोहरा रही है।
अमेरिकी सरकार का यह शटडाउन स्पष्ट कर देता है कि राजनीतिक गतिरोध कैसे वैज्ञानिक प्रगति और मानव जिज्ञासा की सीमाओं को पार करने की हमारी सामूहिक क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। जब तक वाशिंगटन में राजनीतिक दल कोई स्थायी समाधान नहीं निकालते, नासा का बड़ा हिस्सा निष्क्रिय पड़ा रहेगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी संसद पर टिकी हैं, जबकि नासा का एक छोटा दल चुपचाप इस बात की निगरानी में जुटा है कि अंतरिक्ष में हमारे यात्री और यान सुरक्षित रहें।
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