Iran Israel US Conflict : खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले!

अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया। पढ़ें पूरी खबर Iran Israel US Conflict पर। #IranIsraelConflict,
मध्य पूर्व में एक बार फिर से युद्ध की आग भड़क उठी है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए एक बड़े संयुक्त हमले के जवाब में, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी संपत्तियों और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में एक लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। Iran Israel US Conflict ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस संवेदनशील क्षेत्र की ओर खींचा है।
Iran की सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने शनिवार को बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी हवाई अड्डों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों की पुष्टि की है। IRGC ने एक बयान जारी कर कहा, “मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका के सभी सैन्य ठिकानों को ईरानी मिसाइलों के शक्तिशाली हमलों से निशाना बनाया गया है। यह अभियान तब तक निरंतर जारी रहेगा जब तक दुश्मन को निर्णायक रूप से पराजित नहीं कर दिया जाता।” बयान में आगे कहा गया कि पूरे क्षेत्र में स्थित अमेरिकी संपत्तियों को ईरान की सेना के लिए वैध लक्ष्य माना जाएगा।
Iran Israel US Conflict : विभिन्न देशों पर हमलों का विवरण
हमलों में सबसे ज्यादा असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में देखने को मिला। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान से दागी गई कई मिसाइलों को रोक लिया गया, लेकिन इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं बहरीन में, मिसाइल हमले का निशाना अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय था, जिसकी मेजबानी बहरीन करता है। बहरीन सरकार ने इसे “विश्वासघाती हमला” और “राज्य की संप्रभुता और सुरक्षा का घोर उल्लंघन” बताया है।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जहां अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान (CENTCOM) का मुख्यालय स्थित है। इस बीच कतर के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने अपने देश पर किए गए कई मिसाइल हमलों को “नाकाम” कर दिया। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “रक्षा मंत्रालय पुष्टि करता है कि पूर्व-अनुमोदित सुरक्षा योजना के अनुसार, खतरे का पता चलते ही उससे तुरंत निपटा गया और कतर की धरती तक पहुंचने से पहले ही सभी मिसाइलों को रोक दिया गया।”
शांति की उम्मीदों पर विराम
इन हमलों ने उन शांति प्रयासों को भी झटका दिया है, जो हाल ही में देखने को मिले थे। ओमान वर्षों से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाता आया है। ओमान और जिनेवा में हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताएं हुई थीं, जिनमें ओमान ने अहम भूमिका निभाई थी। केवल एक दिन पहले, ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन हमद अल-बुसैदी ने आशा व्यक्त की थी कि शांति संभव है, क्योंकि ईरान वार्ता के दौरान समृद्ध यूरेनियम का भंडारण न करने पर सहमत हो गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को एक बड़ी सफलता बताया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद अमेरिका-इजरायल के हमले और उसके बाद ईरान की इस जवाबी कार्रवाई ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावनाएं
क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह ताजा घटनाक्रम Iran Israel US Conflict के बाद बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दोहा में मौजूद पत्रकारों के अनुसार, पिछले कुछ घंटों में कम से कम एक दर्जन विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिनमें से अधिकांश पैट्रियट रक्षा मिसाइलों द्वारा ईरानी मिसाइलों को रोकने के प्रयास थे।
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) जो बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई का एक गठबंधन है, के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल द्वारा पहली गोली चलाई गई थी, ईरान अब अपनी प्रतिक्रिया में किसी भी हद तक जा सकता है। देखना यह होगा कि क्या यह संघर्ष सीमित रहता है या पूरे क्षेत्र में फैलकर एक बड़े युद्ध का रूप ले लेता है। पूरी दुनिया की निगाहें अब इस Iran Israel US Conflict के अगले मोड़ पर टिकी हैं।
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