H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी: Fortune 500 कंपनियाँ भारत को स्थानांतरित कर रहीं ऑपरेशन्स ?

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H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी:


डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा फीस 100,000 डॉलर बढ़ाए जाने के बाद एक Fortune 500 कंपनी ने अपना पूरा ऑपरेशन भारत स्थानांतरित करने का फैसला किया। जानें पूरी खबर

वाशिंगटन/नई दिल्ली 21 Sep: अमेरिका में H-1B वीज़ा शुल्क में अचानक और भारी बढ़ोतरी ने वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस नए नियम के तहत, कंपनियों को now एक विदेशी कर्मचारी को प्रायोजित करने के लिए 100,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) का भुगतान करना होगा। इस कदम को अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में हाल के वर्षों में सबसे महंगे बदलावों में से एक माना जा रहा है, और इसके व्यापक आर्थिक परिणाम सामने आने लगे हैं।

H-1B वीज़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी कंपनियाँ भारत की ओर रुख करने को मजबूर

इस नीतिगत बदलाव का सीधा प्रभाव एक प्रमुख Fortune 500 कंपनी के फैसले में देखने को मिला है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रेडिट पर, कंपनी के एक कर्मचारी ने खुलासा किया कि उनकी पूरी इकाई (Org) के ऑपरेशन्स को भारत स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने “Entire org moved to India” शीर्षक वाले एक पोस्ट में लिखा कि यह स्थानांतरण 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) तक पूरा कर लिया जाएगा।

कर्मचारी के अनुसार, “हमें इस सप्ताह सूचित किया गया है कि हमारे पूरे संगठन को भारत स्थानांतरित किया जा रहा है। हममें से कई लोगों को भारत relocate होने या फिर कंपनी के दूसरे divisions में स्थानांतरित होने का विकल्प दिया गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय वर्तमान अमेरिकी प्रशासन द्वारा आव्रजन नियमों में हो रहे उथल-पुथल भरे बदलावों के खिलाफ एक सुरक्षात्मक कदम (hedge) है।

इस खबर ने सोशल मीडिया पर चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। नेटिज़न्स की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली रहीं। कुछ ने कर्मचारियों के साथ सहानुभूति जताई और इस स्थिति को निराशाजनक बताया, तो वहीं कुछ अन्य ने इस फैसले पर राजनीतिक गुस्सा जाहिर किया। एक यूजर ने लिखा, “कम से कम आपको अब वीज़ा की चिंता तो नहीं करनी पड़ेगी,” जबकि एक अन्य ने चेतावनी देते हुए कहा, “वर्तमान प्रशासन का यह फैसला उल्टा पड़ने वाला है।”

H-1B वीज़ा अमेरिकी कंपनियों को वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कंप्यूटर प्रोग्रामर जैसे विशेष कौशल वाले विदेशी workers को sponsor करने की अनुमति देता है। हर साल, अमेरिका एक लॉटरी सिस्टम के through 85,000 H-1B वीज़ा जारी करता है, जिनमें से लगभग 73% (तीन-चौथाई) भारतीय पेशेवरों को मिलते हैं।

21 सितंबर से प्रभावी हो रहा यह नया शुल्क न केवल कर्मचारियों, बल्कि अमेरिकी कंपनियों की hiring practices को भी बदल कर रख देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका में talent की कमी हो सकती है और भारत जैसे देशों में outsourcing को बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि इस Fortune 500 कंपनी के मामले में देखने को मिल रहा है। यह trend भविष्य में और कंपनियों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

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