Bangladesh Violence Against Hindus :एक और हिंदू युवक पर क्रूर हमला, जलाकर की हत्या!

Bangladesh के शरियतपुर में हिंदू युवक खोकन दास पर मुस्लिम कट्टरपंथियों का जानलेवा हमला। जानिए हिंदुओं (Violence Against Hindus) पर बढ़ते अत्याचार की पूरी खबर और प्रतिक्रियाएं।
#BangladeshViolence
शरियतपुर (बांग्लादेश) 1 Jan पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की क्रूर श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। नववर्ष की पूर्व संध्या, 31 दिसंबर को एक और भीषण घटना सामने आई है, जिसने मानवता को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। शरियतपुर जिले में कट्टरपंथियों की एक भीड़ ने 50 वर्षीय हिंदू युवक खोकन दास पर धारदार हथियारों से हमला करने के बाद उन्हें जलाने की कोशिश की है। यह घटना लगातार बढ़ रहे साम्प्रदायिक उन्माद और अल्पसंख्यकों के प्रति नफ़रत की एक और कड़ी है।
क्या है पूरा मामला?
स्थानीय सूत्रों व रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार, 31 दिसंबर की शाम को जब खोकन दास अपने घर की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में एक हिंसक भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने न सिर्फ़ उन पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से कहर बरपाया, बल्कि उन्हें गंभीर रूप से घायल करने के बाद आग के हवाले करने की कोशिश की। इस क्रूर हमले में खोकन दास बुरी तरह जल गए और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद से क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, अभी तक इस हमले के पीछे के सटीक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे धार्मिक उन्माद से प्रेरित माना जा रहा है।
Bangladesh violence against Hindus : क्रमिक हिंसा की चौथी कड़ी
खोकन दास पर हुआ यह हमला बीते दो सप्ताह में हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई चौथी बड़ी हिंसक घटना है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की है।
- 18 दिसंबर, मैमनसिंह: यहां हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को एक भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। उसके बाद निर्ममता की सारी हदें पार करते हुए शव को एक पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई।
- 24 दिसंबर, कलिमोहर: 29 वर्षीय अमृत मंडल को हुसैनडांगा इलाके में भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी।
- हाल ही में, मैमनसिंह: एक कपड़ा कारखाने में एक हिंदू युवक की उसके सहकर्मी द्वारा बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इन लगातार हो रहे हमलों से स्पष्ट है कि देश में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेष रूप से हिंदू, असुरक्षा के गहन संकट से गुज़र रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
भारत में उठे विरोध के स्वर, कूटनीतिक कदम की मांग
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने भारत में भी गहरी प्रतिक्रिया पैदा की है। देश के कई हिस्सों—दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, गुवाहाटी आदि—में विभिन्न संगठनों और नागरिक समाज द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
भारतीय राजनीतिक गलियारों से भी मजबूत प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाने और हिंदू समुदाय की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है कि वह पड़ोस में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी आवाज उठाए।
शरियतपुर की यह दर्दनाक घटना बांग्लादेश में धार्मिक सद्भाव के लिए एक गंभीर चुनौती है। एक के बाद एक हो रहे ये हमले न सिर्फ़ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं, बल्कि बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए भी खतरा हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब बांग्लादेश सरकार की उस कार्रवाई पर टिकी है, जो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोक सके और सभी नागरिकों, चाहे उनकी मान्यता कुछ भी हो, को समान सुरक्षा व सम्मान का अधिकार दिला सके। शांति और सहअस्तित्व की राह पर लौटना ही इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता प्रतीत होता है।
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