रानी कर्णावती की हुमायूं को राखी भेजने की कहानी: सच या झूठ?

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Rani Karnavati Humayun Rakhi Story

क्या रानी कर्णावती (Rani Karnavati )ने हुमायूं को राखी भेजी थी? जानिए इस ऐतिहासिक कहानी की सच्चाई और एनसीईआरटी किताबों में छिपे तथ्य।

#रक्षाबंधन #मुगल_इतिहास


Rani Karnavati Humayun Rakhi Story:

क्या आपने स्कूल की किताबों में रक्षाबंधन से जुड़ी वह कहानी पढ़ी है, जिसमें मेवाड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी? क्या वाकई हुमायूं ने “राखी की लाज” रखते हुए चित्तौड़ की रक्षा की थी? या फिर यह कहानी भी “जोधा-अकबर” की तरह एक झूठा नैरेटिव है? आइए, इस ऐतिहासिक घटना की सच्चाई जानते हैं।

क्या है कहानी?

कर्नल जेम्स टॉड की किताब “एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान” (1829) के अनुसार, 1535 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर हमला किया। रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी, और हुमायूं “बहन की इज्जत” बचाने दौड़ पड़ा। लेकिन, क्या यह सच है?

इतिहासकारों का दावा: कोई प्रमाण नहीं!

प्रख्यात इतिहासकार सतीश चंद्र के अनुसार, 16वीं सदी के किसी भी समकालीन दस्तावेज़ (जैसे- अकबरनामा, बाबरनामा) में राखी भेजने का जिक्र नहीं मिलता। यह कहानी सिर्फ कर्नल टॉड ने गढ़ी, जो ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकारी था।

History of Medieval India by Satish Chandra pg.212

सच्चाई क्या है

  1. हुमायूं ने मदद नहीं की:
    • बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर 1534 में हमला किया, लेकिन हुमायूं 1535 में पहुंचा।
    • हुमायूं ने बहादुर शाह को पत्र लिखकर कहा:
      “हम दोनों का लक्ष्य काफिरों (राजपूतों) से लड़ना है, इसलिए मैं हमला नहीं करूंगा।”
  2. रानी कर्णावती ने जौहर किया:
    • बहादुर शाह के हमले के दौरान, रानी कर्णावती (Rani Karnavati) ने 13,000 महिलाओं के साथ जौहर किया।
    • हुमायूं ने कुछ महीने बाद गुजरात पर हमला कर बहादुर शाह को भगाया, न कि राखी के कारण।

एनसीईआरटी क्यों पढ़ाती है यह झूठ?

  • अंग्रेजों का एजेंडा: कर्नल टॉड ने “मुगलों की दयालुता” का नैरेटिव फैलाया, ताकि भारतीय मुस्लिम शासकों को “उदार” दिखाया जा सके।
  • जोधा-अकबर जैसी कहानियां: ठीक वैसे ही जैसे अकबर-महाराणा प्रताप की लड़ाई को “राजपूत-मुगल एकता” के रूप में पेश किया गया।

निष्कर्ष

रानी कर्णावती (Rani Karnavati) और हुमायूं की राखी कहानी एक मिथक है, जिसे अंग्रेज इतिहासकारों ने गढ़ा। सच यह है कि हुमायूं ने धर्म के नाम पर राजपूतों की मदद करने से इनकार कर दिया था। आज भी एनसीईआरटी की किताबों में यह झूठ पढ़ाया जाता है।

क्या आपको लगता है कि भारतीय इतिहास में मुगलों की छवि सुधारने के लिए ऐसी कहानियां गढ़ी गईं? कमेंट में बताएं!

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