International Dog Day 2025: खास है आज का दिन, जानिए Hero Dogs की अटूट दोस्ती की अनसुनी कहानियां

International Dog Day 2025: जानिए इस दिन का इतिहास, क्यों मनाया जाता है, भारत में स्ट्रे डॉग्स की स्थिति, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, डॉग्स पर बढ़ते अपराध और Janzeer व Hachiko जैसे वफादार डॉग्स की भावुक कहानियां।
लखनऊ 26 अगस्त 2025: कुत्ते और इंसान का रिश्ता उतना ही पुराना है, जितना मानव सभ्यता का इतिहास। जब इंसान जंगलों में शिकार करता था, तब भी कुत्ते उसके साथी और रक्षक बने। समय बदला, सभ्यता आगे बढ़ी, लेकिन कुत्तों की वफादारी, निस्वार्थ प्रेम और सुरक्षा का वचन कभी नहीं बदला।
कुत्ते वह साथी हैं, जो बिना कोई अपेक्षा किए सिर्फ प्यार लौटाते हैं। चाहे खुशी का पल हो या दुख का — इंसान के आँसुओं को सबसे पहले कुत्ता ही पहचानता है। यही कारण है कि उन्हें “मैन’स बेस्ट फ्रेंड” कहा जाता है। उनकी मासूम आँखों में भरी करुणा और मालिक के लिए अद्भुत निष्ठा इंसान को हर पल याद दिलाती है कि सच्चे रिश्ते भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि दिल से बनते हैं।
International Dog Day इसी पवित्र रिश्ते का उत्सव है, जब पूरी दुनिया इन नन्हे फरिश्तों के योगदान, वफादारी और बलिदान को सलाम करती है।
International Dog Day 2025 का इतिहास और महत्व

International Dog Day की शुरुआत साल 2004 में कोलीन पेज ने की थी। वह अमेरिका की एक एनिमल वेलफेयर एडवोकेट और पेट लाइफस्टाइल एक्सपर्ट हैं। इस दिन यानी 26 अगस्त को चुनने के पीछे एक खास वजह है। दरअसल, जब कोलीन सिर्फ 10 साल की थीं, तभी उनके परिवार ने अपना पहला कुत्ता एक स्थानीय एनिमल शेल्टर से गोद लिया था।
शुरुआत में International Dog Day केवल अमेरिका में मनाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसे दुनियाभर में पहचान मिलने लगी। आज कई देश और संस्थाएं International Dog Day को खास कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों के जरिए मनाते हैं।
- International Dog Day का उद्देश्य था दुनिया को यह याद दिलाना कि डॉग्स सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं।
- International Dog Day हर साल लोगों को यह संदेश देता है कि हम कुत्तों की सुरक्षा, देखभाल और गोद लेने (Adoption) के लिए कदम उठाएं।
International Dog Day 2025 की थीम
इस साल International Dog Day 2025 की थीम है — “Compassion Beyond Species” यानी इंसान और जानवर के बीच करुणा की सीमाएं खत्म करना।
इसका सीधा मतलब है कि हमें कुत्तों को भी उतना ही प्यार और सम्मान देना चाहिए जितना इंसानों को।
International Dog Day- भारत और डॉग्स का भावुक रिश्ता

भारत में डॉग्स को सिर्फ पालतू जानवर नहीं माना जाता। नेपाल और भारत में मनाए जाने वाले कुकुर तिहार में कुत्तों की पूजा होती है। यह दर्शाता है कि इंसान और डॉग्स का रिश्ता सिर्फ साथ तक सीमित नहीं, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी रखता है।
कुत्तों की बहादुरी और वफ़ादारी की कहानियाँ
कुत्तों को इंसान का सबसे अच्छा दोस्त यूँ ही नहीं कहा जाता। इतिहास गवाह है कि कई बार इन वफ़ादार साथियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इंसानों की जानें बचाई हैं। International Dog Day पर आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कुत्तों की प्रेरणादायक कहानियाँ—
1) बाल्टो (Balto): बर्फ़ीले तूफ़ान का नायक
1925 में अलास्का के नोम शहर में डिप्थीरिया की महामारी फैल गई थी। उस समय जीवनरक्षक सीरम पहुँचाने का जिम्मा बाल्टो नामक साइबेरियन हस्की पर था। भयंकर बर्फ़ीले तूफ़ान के बीच बाल्टो ने 54 मील लंबी यात्रा कर दवा लोगों तक पहुँचाई और सैकड़ों ज़िंदगियाँ बचाईं।
2) हचिको (Hachiko): वफ़ादारी की मिसाल
जापान का यह अकिता नस्ल का कुत्ता, हचिको, अपने मालिक की मृत्यु के बाद भी नौ साल तक रोज़ाना शिबुया रेलवे स्टेशन पर उनका इंतज़ार करता रहा। उसकी अटूट वफ़ादारी आज भी पूरी दुनिया में इंसान और कुत्ते के रिश्ते का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है।
3) पीनट (Peanut): मासूम बच्ची की रक्षक
पीनट एक रेस्क्यू डॉग थी, जिसने एक तीन साल की बच्ची को ठंड से जमने से बचाया। बच्ची को गड्ढे में कांपते हुए देखकर पीनट ने तुरंत अपनी मालकिन को सतर्क किया। शायद अपने दुखद अतीत की वजह से वह दूसरे के दर्द को पहचान पाई और बच्ची की जान बच गई।
4) रॉकी (Rocky): भूस्खलन से बचाने वाला हीरो
हिमाचल प्रदेश के एक गाँव में रॉकी नाम का कुत्ता अचानक भौंकने और इधर-उधर भागने लगा। ग्रामीणों को उसकी हरकत अजीब लगी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद भूस्खलन हुआ। रॉकी की चेतावनी की वजह से 63 से अधिक लोगों की जान बच सकी।

5) स्वानसी जैक (Swansea Jack): असली लाइफगार्ड
1930 के दशक में वेल्स के एक काले रिट्रीवर, स्वानसी जैक, ने पानी में डूब रहे कम से कम 27 लोगों की जान बचाई। बिना किसी आदेश के संकट को भांपकर मदद करना उसकी सबसे बड़ी ताकत थी।
6) एंजेल (Angel): शिकारी बिल्ली से बचाने वाली
कनाडा में ऑस्टिन नाम का 11 वर्षीय बच्चा अपने घर के बाहर लकड़ी इकट्ठा कर रहा था, तभी एक जंगली कौगर ने उस पर हमला कर दिया। लेकिन गोल्डन रिट्रीवर नस्ल का उसका कुत्ता, एंजेल, बीच में आ गया और साहसपूर्वक कौगर से भिड़ गया। एंजेल बुरी तरह घायल हुआ, लेकिन उसने अपने मालिक को बचा लिया।
7) सुल्तान, टाइगर और सीज़र: मुंबई पुलिस के सिपाही
ये तीनों बहादुर कुत्ते मुंबई पुलिस के बम निरोधक दस्ते का हिस्सा थे। 26/11 के आतंकवादी हमलों के बाद इन्होंने विस्फोटक खोजकर कई बमों को नाकाम कर दिया और शहर को और बड़े हादसों से बचा लिया।
8) जंजीर: मुंबई का हीरो
1993 के मुंबई बम धमाकों में जंजीर नामक एक लैब्राडोर ने 3,000 किलो आरडीएक्स, 600 डिटोनेटर और सैकड़ों ग्रेनेड व कारतूसों का पता लगाया। उसकी सूझबूझ और बहादुरी ने मुंबई को तबाही से बचा लिया और हजारों ज़िंदगियाँ सुरक्षित रहीं।
ये कहानियाँ साबित करती हैं कि कुत्ते सिर्फ इंसान के साथी नहीं, बल्कि कई बार भगवान की भेजी हुई रक्षा ढाल भी होते हैं। उनकी वफ़ादारी, निस्वार्थ प्रेम और साहस हमेशा मानवता को प्रेरित करते रहेंगे।
International Dog Day: भारत में स्ट्रे डॉग्स की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश

भारत में अनुमान है कि लगभग 6 करोड़ स्ट्रे डॉग्स रहते हैं। ये न सिर्फ सड़कों पर खुले में जीने को मजबूर हैं बल्कि भूख, बीमारी और हिंसा का शिकार भी होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपने पुराने आदेश में बदलाव किया है। अब कोर्ट ने साफ कहा है कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाएगा और फिर उन्हें उसी जगह पर छोड़ा जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।
लेकिन इसमें दो अपवाद हैं –
- अगर कोई कुत्ता आक्रामक है (यानि बार-बार लोगों पर हमला करता है)।
- अगर कोई कुत्ता रेबीज से संक्रमित है।
ऐसे कुत्तों को उनके मूल स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए आश्रय गृहों (shelters) में रखा जाएगा।
मामले का इतिहास और बदलाव
- 11 अगस्त 2025 का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखा जाए और उन्हें वापस न छोड़ा जाए।
लेकिन इस आदेश का जमकर विरोध हुआ। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और कई संगठनों ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर शेल्टर बनाना संभव ही नहीं है। - 14 अगस्त 2025 का संशोधन: विरोध और दलीलों को सुनने के बाद, तीन जजों की बेंच ने पुराना आदेश बदल दिया और नया, संतुलित आदेश जारी किया।

नया आदेश (Final Decision)
- पकड़ना और छोड़ना: कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी व टीकाकरण के बाद उसी जगह छोड़ा जाएगा।
- अपवाद: आक्रामक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को शेल्टर में रखा जाएगा।
- भोजन स्थल: नगर निकायों को शहरों में कुत्तों के लिए अलग-अलग खाने की जगह (feeding zones) बनाने होंगे।
- सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक: अब सड़क या पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होगी।
- राष्ट्रीय नीति: सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं को अपने पास मंगवाया है और कहा है कि पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाई जाएगी।
- फौरन कार्रवाई: अगर कुत्ते के काटने का कोई मामला सामने आता है तो 4 घंटे के भीतर उस कुत्ते को पकड़ना, उसका इलाज और टीकाकरण करना जरूरी होगा। साथ ही पीड़ित व्यक्ति का इलाज भी तुरंत कराया जाएगा।
दुनिया भर में डॉग्स पर अपराध
दुर्भाग्य से, दुनिया भर में डॉग्स पर क्रूरता लगातार बढ़ रही है। कई जगहों पर डॉग्स को खेल-तमाशे के लिए लड़वाया जाता है, उनकी हत्या की जाती है या उन्हें भूखा छोड़ा जाता है।
NGO और पशु अधिकार संगठनों के अनुसार, हर साल लाखों डॉग्स हिंसा और लापरवाही का शिकार बनते हैं। International Dog Day हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम उनकी सुरक्षा के लिए क्या कर रहे हैं।
International Dog Day: डॉग्स, सिर्फ जानवर नहीं परिवार हैं

डॉग्स का प्यार निःस्वार्थ और पवित्र होता है। वे हमारी भाषा नहीं समझते, लेकिन हमारी भावनाओं को पढ़ लेते हैं। वे हमें कभी धोखा नहीं देते, चाहे हालात जैसे भी हों।
International Dog Day 2025 हमें यही याद दिलाता है कि अगर हम दुनिया के सबसे वफादार दोस्त को सम्मान नहीं देंगे, तो इंसानियत का असली चेहरा अधूरा रह जाएगा। भारत हो या दुनिया, कुत्ते सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि प्यार और भरोसा का प्रतीक हैं।
इसलिए, अगर आपके पास डॉग है तो उसे सिर्फ पालतू न मानें, बल्कि परिवार का सदस्य बनाएं। और अगर नहीं है, तो किसी Stray Dog को एक वक्त का खाना ज़रूर दें — शायद वही आपके लिए दुआ बन जाए।
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