भारत ने दिया Zero Tariff का ऑफर; जानिये क्या है टैरिफ ?
Tariff पर बड़ा दावा! ट्रंप का कहना – भारत ने अमेरिका को बिना Tariff के ट्रेड डील का ऑफर दिया। जानें क्या है पूरा मामला और क्या है भारत की प्रतिक्रिया?”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर “शून्य टैरिफ” का प्रस्ताव दिया है। साथ ही उन्होंने एप्पल की भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर नाराजगी जताई, यह स्पष्ट करते हुए कि वे नहीं चाहते कि कंपनी अपना उत्पादन भारत में करे। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, और जल्द किसी डील की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप ने कतर की राजधानी दोहा में कहा कि भारत में अमेरिकी उत्पाद बेचना आसान नहीं है, लेकिन अब भारत से शून्य टैरिफ की पेशकश मिली है। अमेरिका ने पहले भारत पर 26% टैरिफ लगाया था, जिसे 90 दिनों के लिए घटाकर 10% कर दिया गया है। इस बीच, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि व्यापार वार्ताएं अभी चल रही हैं और किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं का संतुलन जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी समझौता तभी संभव है जब वह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो।
आइये एक नज़र डालते हैं और सरल शब्दों में समझते हैं की टैरिफ क्या है और जानते हैं इसके नुक्सान और फायदों के बारे में
Tariff क्या होता है?
Tariff एक तरह का कर (Tax) होता है, जो सरकारें दूसरे देशों से आयात की गई वस्तुओं या सेवाओं पर लगाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन वस्तुओं को महंगा बनाकर घरेलू वस्तुओं को बढ़ावा देना होता है।
सरकारें Tariff क्यों लगाती हैं?
सरकारें Tariff (आयात शुल्क) क्यों लगाती हैं, इसके चार मुख्य कारणों को विस्तार से समझते हैं:
- राजस्व कमाने के लिए:
- जब कोई देश विदेश से सामान आयात करता है, तो सरकार उस पर एक अतिरिक्त टैक्स लगाती है जिसे टैरिफ कहते हैं।
- यह टैक्स सीधे सरकार की जेब में जाता है और देश के विकास, सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों आदि पर खर्च होता है।
- उदाहरण: अगर भारत चीन से मोबाइल आयात करता है और उस पर 20% टैरिफ लगाता है, तो हर मोबाइल की बिक्री पर सरकार को पैसा मिलेगा।
- घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए:
- बिना टैरिफ के विदेशी सामान अक्सर सस्ता होता है क्योंकि वहां उत्पादन लागत कम होती है।
- अगर विदेशी सामान सस्ता मिलेगा, तो लोग भारतीय सामान नहीं खरीदेंगे और हमारे उद्योग बंद हो जाएंगे।
- टैरिफ लगाने से विदेशी सामान महंगा हो जाता है और लोग स्थानीय सामान खरीदते हैं।
- उदाहरण: चीन से सस्ते कपड़े आने पर भारतीय कपड़ा उद्योग को नुकसान हो सकता है, इसलिए सरकार टैरिफ लगाती है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और नीति कारणों से:
- कुछ उत्पाद जैसे हथियार, उन्नत तकनीक आदि सीधे देश की सुरक्षा से जुड़े होते हैं।
- सरकार कुछ खास देशों पर टैरिफ लगाकर उनके साथ व्यापार को नियंत्रित करती है।
- कभी-कभी राजनीतिक संबंधों के कारण भी टैरिफ लगाया जाता है।
- उदाहरण: अगर कोई देश हमारे साथ अच्छे संबंध नहीं रखता, तो सरकार उसके सामान पर ज्यादा टैरिफ लगा सकती है।
- घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए:
- कुछ विदेशी उत्पादों की गुणवत्ता खराब हो सकती है या वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- ऐसे उत्पादों पर ज्यादा टैरिफ लगाकर सरकार लोगों को उन्हें खरीदने से रोकती है।
- इससे नकली या निम्न गुणवत्ता वाले सामान की बिक्री कम होती है।
- उदाहरण: चीन से आने वाले कुछ खिलौने जहरीले रंगों से बने होते हैं, इसलिए सरकार उन पर ज्यादा टैरिफ लगाती है।
टैरिफ सरकार के लिए पैसा कमाने, अपने उद्योगों को बचाने, देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यह व्यापार नीति का एक ऐसा हथियार है जिसका उपयोग सोच-समझकर किया जाता है।
टैरिफ के प्रकार
विशिष्ट टैरिफ (Specific Tariff):
यह हर यूनिट पर एक तय राशि होती है।
उदाहरण: एक कार पर $500 का टैरिफ।
मूल्यानुसार टैरिफ (Ad Valorem Tariff):
यह वस्तु के मूल्य का एक प्रतिशत होता है।
उदाहरण: किसी उत्पाद के मूल्य का 10%।
Tariff के दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं?
घरेलू उद्योगों में प्रतिस्पर्धा घटती है, जिससे वे आलसी या कम नवाचारी हो सकते हैं।उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ते हैं।कुछ क्षेत्रों को फायदा मिलता है, पर बाकी को नुकसान।
उदाहरण: शहरों के उद्योगों को मदद मिलती है, लेकिन ग्रामीण उपभोक्ता महंगे दाम चुकाते हैं।व्यापार युद्ध:
जब एक देश टैरिफ लगाता है, तो दूसरा देश भी जवाब में टैरिफ लगा सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार टकराव बढ़ता है।
सीधा उदाहरण:
मान लीजिए भारत अमेरिका से मोबाइल आयात करता है। अगर भारत उस पर टैरिफ लगा दे (जैसे 20%), तो मोबाइल महंगा हो जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों के बनाए मोबाइल ज़्यादा बिक सकते हैं।
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