Middle East Tensions: शेयर बाज़ार में कोहराम , सेंसेक्स 2400 अंक लुढ़का,सोने-चांदी में के दाम मेंभारी फेरबदल!

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Middle East Tensions: शेयर बाज़ार में कोहराम , सेंसेक्स 2400 अंक लुढ़का,सोने-चांदी में के दाम मेंभारी फेरबदल!

Middle East बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल के दाम 115 डॉलर के पार पहुंचने से सोमवार को शेयर बाज़ार में भारी गिरावट। सेंसेक्स 2400 अंक टूटा, निवेशकों को बड़ा नुकसान। पढ़ें ताजा अपडेट।

Middle East के बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला और सोमवार को कारोबार की शुरुआत बेहद खराब रही। ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई जबरदस्त उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स 2400 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,700 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस गिरावट से निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति डूब गई है।

बाजार में हड़कंप: सेंसेक्स 2400 अंक लुढ़का

कारोबार के शुरुआती घंटे में ही बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। बीएसई सेंसेक्स 2,401 अंक (3 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 76,518 के स्तर पर आ गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 727 अंक गिरकर 23,723 पर बंद हुआ । सुबह 9:25 बजे तक यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला था। एक समय सेंसेक्स 2,081 अंक की गिरावट के साथ 74,837.67 के लेवल पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले 6 महीनों में सबसे निचला स्तर है 

बाजार में बिकवाली का दौर इतना व्यापक रहा कि सिर्फ 537 शेयरों में बढ़त देखने को मिली, जबकि 2,603 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई । शुरुआती सत्र के दौरान श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, एशियन पेंट्स, एल एंड टी और अडानी पोर्ट्स निफ्टी के प्रमुख लूजर स्टॉक्स रहे। वहीं, ओएनजीसी और कोल इंडिया के शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली।

सभी सेक्टर लाल निशान में, पीएसयू बैंकों को सबसे अधिक नुकसान

Middle East tensions का सबसे अधिक असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 5.6 प्रतिशत टूट गया, जो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा । निफ्टी बैंक इंडेक्स 4 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया। वहीं, ऑटो सेक्टर में भी 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी करीब 3-3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जो बताता है कि छोटे और मझोले निवेशकों पर भी इस तूफान का गहरा असर हुआ है 

क्यों मचा बाजार में हाहाकार? ये हैं 5 बड़ी वजहें

  1. कच्चे तेल का उछाल: Middle East tensions के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई । यह 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती और होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग बंद होने की आशंका ने तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है 
  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflow): बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक जोखिम की वजह से विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने 21,831 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है 
  3. रुपये पर दबाव: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.28 के ऑल-टाइम निचले स्तर पर पहुंच गया । एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊपर बनी रहीं तो रुपया 92.50 तक फिसल सकता है 
  4. महंगाई की मार: कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव बढ़ेगा और महंगाई और तेज होगी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है, “इस ऑयल शॉक से इकोनॉमी पर काफी बुरा असर पड़ेगा और महंगाई बढ़कर ही रहेगी, भले ही सरकार इसके बोझ को कंज्यूमर पर डाले या नहीं” 
  5. वैश्विक बाजार में खलबली: Middle East tensions का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई और वॉल स्ट्रीट का फियर इंडेक्स VIX अप्रैल 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर 29.49 पर पहुंच गया । एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 6% से अधिक टूट गया 

गिरावट के बीच सुरक्षित निवेश की ओर रुख

जहां शेयर बाजार में आग लगी है, वहीं निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven) यानी सोने की ओर रुख किया है, लेकिन इस बार सोने के भाव में भी गिरावट देखी गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव 0.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गया । अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगने से ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें 5,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गईं 

प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव (9 मार्च):

  • दिल्ली: ₹16,183 प्रति ग्राम
  • मुंबई: ₹16,168 प्रति ग्राम
  • कोलकाता: ₹16,363 प्रति ग्राम
  • चेन्नई: ₹16,309 प्रति ग्राम

एक्सपर्ट की राय: क्या करें निवेशक?

कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट के फाउंडर विकास खेमनी का मानना है कि Middle East tensions के चलते बाजार में 10 प्रतिशत तक की और गिरावट आ सकती है, लेकिन यही वो समय है जब निवेश के लिए पैसा तैनात किया जा सकता है । उन्होंने कहा, “मेरे करियर में ऐसा कोई दौर नहीं रहा जब कोई जोखिम न रहा हो। भारत ने 17-18 प्रतिशत CAGR रिटर्न दिया है। इसलिए, मौजूदा समय में बैंकिंग, फार्मा और कंजम्पशन सेक्टर पर फोकस करना चाहिए और ग्लोबली जुड़े सेक्टर से बचना चाहिए।” 

वहीं, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील का कहना है कि जब तक कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते या भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता, बाजार पर दबाव बना रहेगा 

निवेशकों के लिए सलाह: विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रहेगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराएं नहीं और अपने निवेश को चरणबद्ध तरीके से (Staggered manner) करें। बाजार की इस गिरावट को लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से देखा जा सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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