Newzealand Apple Import: हिमाचल के किसानों की चिंता, CM Sukku ने केंद्र से उठाया मुद्दा!

हिमाचल प्रदेश के सेब किसान Newzealand के साथ FTA से चिंतित। CM सुक्खू ने केंद्र सरकार के सामने रखी आशंकाएं, जानें पूरी खबर।#Apple Import
शिमला 15Jn । केंद्र सरकार द्वारा न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत सेब पर आयात शुल्क में की गई कटौती ने हिमाचल प्रदेश के लाखों सेब उत्पादकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि वह स्थानीय बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्रीय वित्त एवं वाणिज्य मंत्रियों के समक्ष यह मामला मजबूती से उठाएंगे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में प्रगतिशील सेब बागवानों के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था में सेब उत्पादन की अहम भूमिका है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर होने नहीं दिया जाएगा। “न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क (ड्यूटी) कम किए जाने से हिमाचल के उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है। हम केंद्र सरकार से बातचीत करके ऐसा समाधान निकालने की कोशिश करेंगे जिससे हमारे स्थानीय किसानों के हित सुरक्षित रहें,” उन्होंने कहा।
बैठक के दौरान किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की व्यापार नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। संयुक्त किसान मंच के सह-संयोजक संजय चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे व्यापार समझौतों में कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने का प्रावधान देश के किसानों के लिए सीधा खतरा है। चौहान के अनुसार, सेब जैसे संवेदनशील उत्पाद पर आयात शुल्क कम करने से विदेशी फल सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में पहुंचेंगे, जिससे स्थानीय बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
Newzealand Apple Import
किसान नेताओं ने बताया कि न्यूजीलैंड(Newzealand ) के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर मात्र 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, नाशपाती और कीवी जैसे अन्य फलों पर भी बेहद कम या शून्य शुल्क तय किया गया है। उनका मानना है कि ऐसे फैसलों का सीधा प्रभाव हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में रहने वाले करीब 15 लाख से अधिक बागवानी परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा।
सेब उत्पादक संगठनों ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक साझा रणनीति बनाने की मांग भी रखी। उनका सुझाव है कि अगर केंद्र सरकार इन व्यापार समझौतों से सेब और अन्य कृषि उत्पादों को बाहर नहीं करती है, तो राज्य सरकार को अन्य पहाड़ी राज्यों के साथ मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहिए। किसान नेताओं ने यहां तक संकेत दिए कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली तक संयुक्त रूप से मार्च करने के लिए तैयार हैं।
इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का रुख स्पष्ट और किसान-हितैषी दिखाई दिया। उन्होंने बागवानों को दोबारा आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके साथ पूरी तरह खड़ी है और हर संभव स्तर पर उनकी आवाज उठाई जाएगी। “हमारे लिए बागवानी क्षेत्र केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक रीढ़ है। किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी,” सुक्खू ने दृढ़तापूर्वक कहा।
यह मामला भारत की व्यापक व्यापार रणनीति और घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है। जहां एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए कई देशों के साफ्टा (FTA) कर रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू उत्पादकों को विदेशी आयात से होने वाले नुकसान की आशंका सता रही है। हिमाचल प्रदेश की सरकार का यह कदम दर्शाता है कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं और किसानों के जीवनयापन पर व्यापार समझौतों के प्रभाव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अब निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि क्या देश के सेब किसानों की फिक्र को व्यापार नीति में उचित स्थान मिल पाता है।
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