Special Report: Baba Vishwanath Mandir Varanasi में सावन महीने की तैयारियाँ पूरी!

Baba Vishwanath Mandir Varanasi में सावन माह के लिए बाबा विश्वनाथ की सभी आरती के टिकट ऑनलाइन बुक हो चुके हैं। जानें कैसे मिलेगा दर्शन का लाभ और क्या है शयन आरती की खास परंपरा।
सावन का पवित्र महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसकी तैयारियाँ काशी विश्वनाथ मंदिर में जोरों पर हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था की थी, जिसके तहत Baba Vishwanath Mandir Varanasi की सभी आरती के टिकट पहले ही बुक हो चुके हैं।
Baba Vishwanath Mandir Varanasi में क्या है आरती का क्रम?
काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन पांच आरती होती हैं, जिनमें से चार के लिए टिकट बुक किए जाते हैं:
- मंगला आरती – प्रातःकाल की पहली आरती
- भोग आरती – दोपहर में भोग लगाने के बाद
- सप्तऋषि आरती – संध्या के समय
- शृंगार/भोग आरती – शाम को बाबा का शृंगार
लेकिन, शयन आरती की कोई टिकट बुकिंग नहीं होती। यह आरती विशेष रूप से काशी के स्थानीय निवासियों द्वारा की जाती है। इस दौरान काशीवासी बाबा को भजन सुनाकर शयन कराते हैं, जो एक अद्भुत परंपरा है।
सावन में सुरक्षा और सुविधा का विशेष इंतजाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में काशी का दौरा कर प्रशासन को निर्देश दिए थे कि सावन के दौरान श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा, सफाई और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि किसी भी भक्त को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
Baba Vishwanath Mandir Varanasi के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग सुविधा का भरपूर उपयोग हुआ और सभी स्लॉट जल्दी ही भर गए। उन्होंने भक्तों से अनुरोध किया कि वे मंदिर प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें ताकि सभी को सुगमता से दर्शन का अवसर मिल सके।
क्या है शयन आरती की खासियत?
Baba Vishwanath Mandir Varanasi की एक अनोखी परंपरा है शयन आरती, जिसमें केवल काशी के स्थानीय निवासी ही भाग लेते हैं। इस आरती में बाबा को भजन-कीर्तन के साथ विश्राम कराया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें बाहरी भक्तों की भागीदारी नहीं होती।
सावन का महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और काशी विश्वनाथ मंदिर में इसकी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। अगर आपने टिकट बुक नहीं करवाए हैं, तो आप सामान्य दर्शन कर सकते हैं, लेकिन आरती में शामिल होने के लिए अगले सावन का इंतजार करना होगा।
जय बाबा विश्वनाथ!
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