Shravana का महा रहस्य: भगवान शिव को प्रिय है ये 5 संकल्प और 2 अभिषेक विधियां

Shravana मास में भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। जानिए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर है, सावन सोमवार का महत्व और शिवभक्ति में लिए जा सकते हैं कौन-से 5 संकल्प।
लखनऊ, 16 जुलाई 2025: भगवान शिव का प्रिय माह Shravana (सावन) 11 जुलाई 2025 से आरंभ हो चुका है। यह महीना भक्ति, व्रत, तप और शिव उपासना का मिलन स्थल है। पूरे भारत में विशेष रूप से उत्तर भारत के शिव मंदिरों में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लाखों कांवड़िए हरिद्वार, गंगोत्री जैसे तीर्थों से गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। लेकिन इस महीने में एक धार्मिक उलझन भी देखी जाती है — जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में अंतर।
क्या है जलाभिषेक?
जलाभिषेक का अर्थ है भगवान शिव के शिवलिंग पर केवल जल चढ़ाकर उनकी पूजा करना। यह पूजा की सबसे सरल विधि मानी जाती है, जिसमें बिना मंत्रों के भी आप श्रद्धा से शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। विशेष रूप से सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है, क्योंकि यह शिव को शीतलता प्रदान करता है।
- शिवलिंग को जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का उच्चारण करना शुभ होता है।
- जलाभिषेक के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करना उत्तम माना जाता है।
- इसे कोई भी श्रद्धालु घर में या मंदिर में कर सकता है।
क्या है रुद्राभिषेक?
रुद्राभिषेक एक वैदिक और विस्तृत पूजा विधि है जिसमें वेद मंत्रों के साथ-साथ दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल (पंचामृत) से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इसे विशेष ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है और यह मानसिक शांति, रोग नाश, संतान सुख व मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है।
- रुद्राभिषेक के दौरान ‘रुद्राष्टाध्यायी’, ‘श्री रुद्रम’ जैसे वेद मंत्रों का पाठ होता है।
- शिवलिंग को उत्तर दिशा में रखें और पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करें।
- यह पूजा विशेष रूप से सावन में अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में फर्क?
| बिंदु | जलाभिषेक | रुद्राभिषेक |
|---|---|---|
| विधि | केवल जल चढ़ाना | पंचामृत व मंत्रों सहित पूजा |
| उद्देश्य | शीतलता व भक्ति | मनोकामना पूर्ति, दोष शांति |
| स्थान | मंदिर या घर | मंदिर, ब्राह्मण अनुष्ठान के साथ |
| समय | कभी भी | विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त |
Shravana में करें ये 5 आसान लेकिन असरदार संकल्प
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठने का संकल्प लें
हर दिन सूर्योदय से पहले उठें, हाथ में चावल और गंगाजल लेकर संकल्प लें कि आप पूरे महीने शिव साधना करेंगे।
2. योग और प्राणायाम का अभ्यास करें
हर दिन कम से कम 45 मिनट प्राणायाम या ध्यान करें। यह मानसिक व शारीरिक शुद्धता को बढ़ाता है।
3. मंत्र जाप करें
“ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जप करें। इसे 11, 21 या 108 बार माला से कर सकते हैं।
4. उपवास करें
सावन के सोमवार को व्रत रखें। यह व्रत जीवनसाथी प्राप्ति, वैवाहिक सुख और इच्छापूर्ति में सहायक होता है।
5. शिवलिंग पर अभिषेक करें
हर सोमवार या प्रतिदिन शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, पुष्प आदि से अभिषेक करें। मंत्रों के उच्चारण के साथ यह और प्रभावशाली होता है।
सावन सोमवार का महत्व
Shravana मास में पड़ने वाले सोमवारों को अत्यंत शुभ माना गया है। इस बार सावन में 4 सोमवार पड़ रहे हैं। मान्यता है कि Shravana सोमवार को उपवास और अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। विशेषकर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी के लिए और विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख के लिए इस दिन व्रत करती हैं।
पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- तुलसी के पत्ते शिव पूजा में न अर्पित करें।
- अभिषेक के दौरान हंसी-मजाक या बातचीत से बचें।
- मंत्रों का उच्चारण शुद्ध करें, तोड़-मरोड़ से बचें।
- रुद्राभिषेक के लिए वेदपाठी ब्राह्मणों की सहायता लें।
- तांबे के पात्र से जल चढ़ाना श्रेष्ठ माना जाता है।
Shravana में शिवभक्ति का लाभ उठाएं
Shravana केवल व्रत और अभिषेक का ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मनोकामना पूर्ति का महीना भी है। इस पावन समय में शिव की पूजा, साधना, और उपवास से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। चाहे आप जलाभिषेक करें या रुद्राभिषेक, दोनों ही विधियाँ शिव कृपा को आकर्षित करती हैं। इस सावन संकल्प लें, साधना करें और अपने जीवन को शिवमय बनाएं।
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