Makar Sankranti 2026: 14 को या 15 जनवरी को, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि!

कब है मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी 2026 को ?। जानें सटीक शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, इस पर्व का धार्मिक महत्व और खास उपाय। #Makar Sankranti 2026
नई दिल्ली 13 Jan । सूर्य देव के उत्तरायण होने का शुभ पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष 15 जनवरी, 2026, गुरुवार को पूरे देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल फसलों के त्योहार के रूप में प्रसिद्ध है, बल्कि हिंदू धर्म में इसका गहरा आध्यात्मिक और खगोलीय महत्व भी है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है। उत्तरायण काल को देवताओं का दिन माना जाता है, जिसमें किया गया कोई भी शुभ कार्य विशेष फलदायी होता है।
Makar Sankranti 2026 14 या 15 को, पंडितों ने दूर किया कंफ्यूजन, जानें सही तिथि :
इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा जी इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा जी ने सभी असमंजस को दूर करते हुए कहा की अबकी एकदशी और मकरसंक्रान्ति एक दिन पड़ने पर उदया तिथि से मानना अति उत्तम रहे गा दरअसल, मकर संक्रांति( Makar Sankranti )की तिथि 14 जनवरी 2026, बुधवार को पड़ रही है, जो एकादशी तिथि है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का दान और सेवन वर्जित माना जाता है. इस बारे में वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 35 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. इसलिए, संक्रांति की मान्यता अगले दिन 15 जनवरी उदया तिथि के अनुसार मानी जाएगी. इसलिए सभी प्रकार के दान पुण्य और पूजन पाठ 15 जनवरी की तिथि पर उदया तिथि के अनुसार मानी जाएगी. इसलिए सभी प्रकार के दान पुण्य और पूजन पाठ 15 जनवरी की तिथि पर करने से ही फलदायी साबित होगा
शुभ मुहूर्त: इन समय में करें दान और पूजा
Makar Sankranti के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। इस वर्ष, संक्रांति का पुण्य काल सुबह लगभग 7:15 बजे से शुरू होकर शाम 5:35 बजे तक रहेगा। हालाँकि, सर्वाधिक महत्वपूर्ण महापुण्य काल दोपहर 12:30 बजे से 1:45 बजे तक का है। मान्यता है कि इस दौरान स्नान, दान और तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान का भी इस दिन विशेष महत्व है, जिसके लिए देश भर के तीर्थस्थलों पर भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होंगे।
पर्व का सांस्कृतिक एवं कृषि महत्व
मकर संक्रांति (Makar Sankranti ) मूलतः एक कृषि प्रधान त्योहार है, जो रबी फसलों की कटाई के समय आता है। किसान इस दिन नई फसल का स्वागत करते हैं और प्रकृति तथा सूर्य देवता का आभार प्रकट करते हैं। यही कारण है कि इस दिन नई फसल से बने व्यंजनों, जैसे तिल और गुड़ के लड्डू, गजक, और खिचड़ी का विशेष महत्व है। दक्षिण भारत में इसे ‘पोंगल’ के रूप में, गुजरात में ‘उत्तरायण’ के रूप में और पंजाब में ‘लोहड़ी’ के उत्सव से जोड़कर मनाया जाता है। आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें इस त्योहार की खुशी को और भी बढ़ा देती हैं।
धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक उपाय
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने मकर राशि में जाते हैं। इसलिए, शनि के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन तिल, गुड़, अनाज, गर्म वस्त्र और दक्षिणा का दान करना चाहिए। काले तिल से बने पकवान बनाने और दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। साथ ही, ‘ओम सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करने और जल में लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सावधानी एवं महत्वपूर्ण तथ्य
मकर संक्रांति के दिन सूर्यास्त के बाद दान-पुण्य का कार्य नहीं किया जाता है। इस पर्व की गिनती हिंदू पंचांग के अनुसार होने वाले निश्चित त्योहारों में होती है, क्योंकि यह सूर्य की स्थिति से जुड़ा है। इसलिए अधिकतर यह 14 या 15 जनवरी को ही पड़ता है। स्नान के समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामाजिक नियमों का पालन करना चाहिए।
मकर संक्रांति (Makar Sankranti ) का पर्व प्रकाश, ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह हमें प्रकृति के चक्र के साथ सामंजस्य बनाकर चलने और कड़ी मेहनत के फल का आनंद लेने की प्रेरणा देता है। इस पावन अवसर पर आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। (Happy Makar Sankranti)
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