Kashi Vishwanath: यादव बंधुओं द्वारा होगा पारंपरिक जलाभिषेक, प्रशासन ने कसी कमर

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Kashi Vishwanath

सावन के प्रथम सोमवार को Kashi Vishwanath मंदिर में यादव बंधुओं द्वारा पारंपरिक जलाभिषेक की व्यवस्था को लेकर प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और विभिन्न समितियों की बैठक हुई। जानें पूरी खबर।

लखनऊ 19 जून 2025: सावन मास के पहले सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath) में यादव बंधुओं द्वारा होने वाले पारंपरिक जलाभिषेक को लेकर बुधवार को मंदिर प्रबंधन, पुलिस प्रशासन और जलाभिषेक समितियों की समन्वय बैठक हुई। यह आयोजन प्राचीन परंपरा का हिस्सा है और हर वर्ष काशी में श्रद्धा व भक्ति के साथ संपन्न होता है।

बैठक की प्रमुख बातें:

  • जलाभिषेक की यात्रा मार्ग, सुरक्षा, जल व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण पर चर्चा
  • यादव समुदाय की धार्मिक परंपरा को पूरा सम्मान देने का आश्वासन
  • आयोजन को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रशासन की पूर्ण तैयारी

उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि:

  • मंदिर सीईओ: विश्व भूषण मिश्र
  • चंद्रवंशी गोप सेवा समिति, गोवर्धन पूजा समिति, अखिल भारतीय यादव समाज
  • राज्यमंत्री: रविंद्र जायसवाल
  • शिवसेना, व्यापार मंडल, जलाभिषेक मंडल व अन्य समिति सदस्य
  • यात्रा संचालकगण: रामनारायण बाबा, चंदन यादव, पृथ्वीनाथ शर्मा, पप्पू विश्वकर्मा आदि

Kashi Vishwanath की मंदिर परंपरा का सम्मान:

प्रशासन ने आश्वासन दिया कि जलाभिषेक की ऐतिहासिक परंपरा को यथावत रखा जाएगा। सभी श्रद्धालुओं की सहभागिता और आस्था का सम्मान किया जाएगा। सावन सोमवार को हजारों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन व जलाभिषेक के लिए जुटते हैं।

प्रशासन की तैयारी:

  • यात्रा मार्गों पर सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम
  • जल व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा और निगरानी तंत्र की तैनाती
  • मंदिर व आसपास के क्षेत्रों में सफाई व ट्रैफिक कंट्रोल

Kashi Vishwanath मंदिर में सावन के पहले सोमवार को यादव बंधुओं द्वारा जलाभिषेक की यह पारंपरिक यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि काशी की गंगा-जमुनी संस्कृति और आस्था की अद्वितीय मिसाल है। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन द्वारा की गई समन्वित तैयारियां इस बात का प्रमाण हैं कि परंपरा, सुरक्षा और श्रद्धा के संतुलन को पूरी गंभीरता से निभाया जा रहा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से काशी न केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में, बल्कि सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता के आदर्श के रूप में भी अपनी पहचान को और मजबूत करती है।

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