Karwa Chauth Vrat Katha 2025: जानें पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और 5 कथाएं !

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10 अक्टूबर को है करवा चौथ। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha)। पति की दीर्घायु के लिए पढ़ें यह पौराणिक कहानी।

नई दिल्ली 9 Oct : हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और श्रद्धापूर्ण पर्वों में से एक है। यह पर्व पति की दीर्घायु और सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस बार सन 2025 में करवा चौथ का यह पावन पर्व 10 अक्टूबर, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं।

करवा चौथ 2025: शुभ मुहूर्त एवं पूजन सामग्री

चतुर्थी तिथि का आरंभ: 09 अक्टूबर को रात 10 बजकर 13 मिनट से
चतुर्थी तिथि का समापन: 10 अक्टूबर को रात 09 बजकर 17 मिनट तक
चंद्रोदय समय: शाम लगभग 08:15 बजे (शहर के अनुसार अलग-अलग)

पूजन के लिए आवश्यक सामग्री में करवा (मिट्टी का बर्तन), चुनरी, श्रृंगार का सामान, हल्दी, कुमकुम, चावल, मिठाई, फल, फूल, दीपक और जल से भरा कलश प्रमुख हैं। पूजा में चौथ माता की कथा का पाठ अवश्य किया जाता है। मान्यता है कि बिना कथा सुने व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

करवा चौथ व्रत कथा: पति की दीर्घायु का पावन आख्यान

पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। सभी भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। एक बार करवा चौथ के दिन सभी भाइयों ने देखा कि उनकी बहन निर्जला व्रत रखकर बहुत कमजोर हो गई है। इससे व्यथित होकर उन्होंने पीपल के पेड़ के ऊपर से दीया जलाकर यह दिखाया कि चंद्रमा उदित हो गया है। बहन ने सच मानकर व्रत खोल लिया।

जैसे ही उसने भोजन किया, उसके पति की मृत्यु का समाचार आ गया। यह सुनकर वह बिलख-बिलख कर रोने लगी। तभी वहां से देवी इंद्राणी गुजरीं। उन्होंने बताया कि झूठे चंद्रमा की पूजा करने और समय से पहले व्रत तोड़ने के कारण ही यह दुर्घटना हुई है। देवी ने उसे करवा चौथ की सच्ची विधि और कथा बताई।

उसने देवी के निर्देशानुसार पुनः करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा से रखा। उसकी भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर चौथ माता ने उसके पति को जीवनदान दे दिया। इस प्रकार, सच्चे मन से व्रत रखने और पूरी विधि के साथ कथा सुनने का महत्व औरों तक पहुंचा।

करवा चौथ का आध्यात्मिक महत्व

यह व्रत केवल एक रीति-रिवाज नहीं, बल्कि पत्नी की अपने पति के प्रति अटूट निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है। यह कथा हमें सिखाती है कि सही विधि, श्रद्धा और संयम से किया गया हर कार्य अवश्य फलित होता है। करवा चौथ का पर्व सांसारिक बंधन के साथ-साथ आध्यात्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है।

इस पावन पर्व पर सभी सुहागिनों को उनके पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की मंगल कामनाएं।

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