Jyestha Purnima 2025: इस पूर्णिमा पर करें ये 7 उपाय, दूर होगा चंद्र दोष और बढ़ेगा धन

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Jyestha Purnima (ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025) का पर्व 11 जून को मनाया जाएगा। जानें पूजा का मुहूर्त, चंद्र और लक्ष्मी पूजन की विधि, साथ ही धन प्राप्ति के 7 विशेष उपाय।

लखनऊ 10 जून 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इस बार Jyestha Purnima 2025 (ज्येष्ठ पूर्णिमा) का पावन पर्व 11 जून 2025 को मनाया जा रहा है। यह दिन दान, स्नान, व्रत और चंद्र पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, शिव और विष्णु पूजन, व्रत और दान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Jyestha Purnima 2025: पूजा और व्रत मुहूर्त

  • व्रत का संकल्प समय: सुबह 5:00 बजे से 7:00 बजे तक
  • लक्ष्मी पूजन और चंद्र दर्शन: सूर्योदय के बाद 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक शुभ कार्य कर सकते हैं।

स्नान और दान का समय:
सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक किया गया स्नान और दान अक्षय पुण्य देता है।

व्रत पूजन विधि और धार्मिक अनुष्ठान

  • स्नान के बाद श्वेत वस्त्र धारण करें और शिव व विष्णु की पूजा करें।
  • पीपल के वृक्ष की पूजा और अर्घ्य देना शुभ फलदायी है।
  • चंद्रमा को दूध से अर्घ्य दें और धन-समृद्धि की कामना करें।
  • चंद्र देव की पूजा में शहद और चंदन मिला दूध चढ़ाएं।
  • गंगाजल में दूध मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।

चंद्र दर्शन मुहूर्त

रात 10:50 बजे पूर्णिमा का चंद्रमा अपने पूर्ण तेज से आकाश में दिखाई देगा। इसे देखना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

धन प्राप्ति के विशेष उपाय | उपायों से भरेंगे तिजोरी

  1. पीपल पर जल चढ़ाएं: एक लोटे में जल, दूध और थोड़ा मीठा मिलाकर पीपल को अर्पित करें।
  2. चावल और लाल वस्त्र उपाय: लाल कपड़े में चावल बांधकर तिजोरी में रखें और चंद्र देव की पूजा करें।
  3. शिव पूजन: दूध मिला गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करें, कुंडली का चंद्र दोष कम होगा।
  4. मंत्र जप:
    शाम के समय
    “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः”
    मंत्र का जप करें। यह माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है।
  5. तोरण सज्जा: मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएं या आम/अशोक के पत्तों से तोरण लगाएं, जिससे घर में लक्ष्मी का वास होता है।
  6. चावल दान करें: इस दिन चावल का दान आर्थिक समृद्धि लाता है।

Jyestha Purnima (ज्येष्ठ पूर्णिमा) का पौराणिक महत्व

पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा सम्पूर्ण होता है, इस कारण इसे पूर्णत्व की तिथि कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, शिव-विष्णु पूजन व दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सभी पापों का नाश होता है। यह दिन वट सावित्री व्रत के लिए भी जाना जाता है, जो पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

  • पूर्णिमा तिथि: संपूर्णता और शांति की प्रतीक मानी जाती है।
  • चंद्र दोष निवारण: चंद्र देव की पूजा से चित्त की शांति और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
  • व्रत और उपवास का फल: अक्षय पुण्य, विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति, और मनोकामना पूर्ति का विशेष दिन।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 केवल व्रत और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और धन-वैभव प्राप्ति का एक दिव्य संयोग है। भक्तिभाव से किए गए यह उपाय जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन लाते हैं। इस पवित्र दिन को श्रद्धा के साथ मनाएं और माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें।

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