Complete Guide: Jitiya Vrat 2025- जानें भगवान जीमूतवाहन की कथा और संतान-सुख का रहस्य

Jitiya Vrat 2025 का महत्व, पूजा विधि और भगवान जीमूतवाहन की कथा जानें। इस व्रत से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
लखनऊ 12 सितम्बर, 2025: भारत में हर महीने अलग-अलग व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन Jitiya Vrat (जीवित्पुत्रिका व्रत) का महत्व विशेष रूप से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि से जुड़ा हुआ है। यह व्रत खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पुत्र की लंबी उम्र और संतान की प्राप्ति की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ यह व्रत नेपाल के तराई क्षेत्र में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।इन इलाकों में यह व्रत मातृत्व और संतान के बीच गहरी भावनाओं का प्रतीक है।
जीवित्पुत्रिका व्रत 2025 की तिथि व शुभ मुहूर्त
इस वर्ष जितिया व्रत 2025 आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार महिलाएं इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत का पारण नवमी तिथि को सुबह स्नान और पूजन के बाद किया जाता है।
जितिया व्रत का महत्व

यह व्रत विशेष रूप से मातृत्व और संतान-सुख की रक्षा के लिए किया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत से पुत्र की आयु लंबी होती है और उसे जीवन में किसी प्रकार की बाधा या संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विवाहित महिलाएं निष्ठा और श्रद्धा के साथ यह व्रत रखती हैं ताकि उनके बच्चों पर कोई विपत्ति न आए।
मान्यता है कि जीमूतवाहन जी की पूजा करने से संतान को लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है संतान की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला व्रत।
Jitiya Vrat 2025 कब है?
पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Jitiya Vrat रखा जाता है। इस साल 2025 में अष्टमी तिथि 14 सितंबर को पड़ रही है।
- नहाय-खाय: 13 सितंबर 2025
- Jitiya Vrat (निर्जला व्रत): 14 सितंबर 2025
- पारण (व्रत खोलना): 15 सितंबर 2025
नहाय-खाय का महत्व (13 सितंबर 2025)

Jitiya Vrat से एक दिन पहले सप्तमी तिथि पर नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है।
- महिलाएं सुबह जल्दी स्नान कर सात्विक भोजन बनाती हैं।
- इस दिन खासतौर पर मडुआ की रोटी, नोनी की साग, दही और चूड़ा (पोहा) खाया जाता है।
- यही भोजन अगले दिन निर्जला व्रत का आधार बनता है।
Jitiya Vrat शुभ मुहूर्त (14 सितंबर 2025)
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 05:04 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, रात 03:06 बजे
- इस दौरान माताएं सूर्योदय से पहले सात्विक आहार ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करती हैं।
Jitiya Vrat पारण (15 सितंबर 2025)
अष्टमी तिथि के समापन के बाद नवमी तिथि में व्रत खोला जाता है।
- पारण का समय: 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद
- व्रती महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने के बाद पारण करती हैं।
शुभ योग: सिद्ध योग और शिववास योग
सिद्ध योग
- Jitiya Vrat 2025 पर सिद्ध योग बन रहा है।
- यह योग 14 सितंबर को सुबह 07:36 बजे से प्रारंभ होगा।
- इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शिववास योग
- 14 सितंबर को शिववास योग भी बन रहा है।
- अष्टमी तिथि पर भगवान शिव माता पार्वती संग कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे।
- मान्यता है कि इस योग में व्रत करने से सभी दुख दूर होते हैं और संतान को सुख-समृद्धि मिलती है।
Jitiya Vrat की पौराणिक कथा – जीमूतवाहन की कहानी

बहुत समय पहले एक गंधर्वराज के घर जीमूतवाहन नामक पुत्र का जन्म हुआ। जीमूतवाहन बचपन से ही दयालु, परोपकारी और धर्मनिष्ठ थे। वे सांसारिक सुखों की बजाय त्याग और सेवा में विश्वास रखते थे।
गद्दी छोड़कर तपस्या का मार्ग
जीमूतवाहन के पिता के निधन के बाद उनके पास राजगद्दी संभालने का अवसर आया। लेकिन उन्होंने राज्य, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं को त्यागकर वनवास और तपस्या का मार्ग चुना। उनका मानना था कि इंसान का असली धर्म दूसरों की रक्षा करना और उनके दुःख को दूर करना है।
नाग कुल की पीड़ा
वन में भ्रमण करते हुए जीमूतवाहन ने देखा कि एक वृद्धा रो रही है। पूछने पर पता चला कि वह एक नाग माता है और उसका पुत्र गरुड़ देव के भक्षण हेतु ले जाया जाने वाला था।
दरअसल, पुरानी मान्यता के अनुसार गरुड़ प्रतिदिन नागवंश से एक नाग लेकर जाते और उसे भक्षण करते थे। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही थी, जिससे नाग कुल हमेशा भय और दुःख में जीवन जी रहा था। उस दिन बारी नाग माता के पुत्र की थी।
जीमूतवाहन का त्याग
जीमूतवाहन ने नाग माता को सांत्वना दी और कहा—
“माता! आज मैं आपके पुत्र की रक्षा करूंगा। आपके पुत्र की जगह मैं स्वयं गरुड़ के सामने जाऊंगा।”
इतना कहकर उन्होंने अपने शरीर को लाल वस्त्र में लपेटा और चट्टान पर लेट गए, ताकि गरुड़ उन्हें नाग समझ लें।
गरुड़ और जीमूतवाहन का संवाद
थोड़ी देर बाद गरुड़ वहां पहुंचे और जीमूतवाहन को पकड़ लिया। तभी जीमूतवाहन ने गरुड़ से निवेदन किया—
“हे गरुड़ देव! मैं जानता हूं कि आप प्रतिदिन नाग कुल से किसी को भोजन के रूप में ले जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इससे पूरे नागवंश का नाश हो रहा है? आज मैं आपके सामने आया हूं, ताकि एक निर्दोष की जान बच सके।”
जीमूतवाहन की करुणा, साहस और त्याग को देखकर गरुड़ का हृदय पिघल गया। उन्होंने कहा—
“हे महापुरुष! आपने आज जो किया है, वह असाधारण है। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि आज से नाग कुल को कष्ट नहीं दूंगा।”
देवताओं का आशीर्वाद
गरुड़ ने जीमूतवाहन को आशीर्वाद दिया और देवताओं ने भी उनकी दयालुता और बलिदान की सराहना की। उन्हें दिव्य स्वरूप और अमरता का वरदान मिला।
Jitiya Vrat और जीमूतवाहन

तभी से जीमूतवाहन देवता के रूप में पूजे जाने लगे। विवाहित महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु और सुरक्षा के लिए उनकी पूजा करती हैं। यह व्रत मातृत्व की शक्ति और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
यही कारण है कि Jitiya Vrat में माताएं निर्जला उपवास करती हैं और जीमूतवाहन की कथा सुनकर अपने पुत्रों की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
Jitiya Vrat पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मिट्टी और कुश से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाएं।
- पूजा के समय दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
- फल, मिठाई, पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि चढ़ाएं।
- व्रत के दौरान कथा श्रवण और संतान की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
Jitiya Vrat पूजा सामग्री सूची
- कुश और गाय का गोबर (प्रतिमा बनाने हेतु)
- धूप-दीप, फूल और फल
- पान-सुपारी, लौंग-इलायची
- श्रृंगार का सामान, सिंदूर पुष्प
- दूर्वा की माला
- मिठाई और पेड़ा
- गांठ का धागा
- बांस के पत्ते
- सरसों का तेल
Jitiya Vrat में क्या करें और क्या न करें

करें:
- स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- पूजा-पाठ और कथा श्रवण करें।
- घर को स्वच्छ रखें और दीपक जलाकर रखें।
न करें:
- व्रत के दौरान लहसुन-प्याज और मांसाहार का सेवन न करें।
- घर में कलह या झगड़े से बचें।
- पारण से पहले कुछ भी न खाएं।
लाल धागा बांधने की परंपरा

जितिया व्रत केवल उपवास और पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लाल धागा बांधने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे संतान की लंबी आयु और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
लाल धागा बांधने का तरीका:
- पवित्र करें: पूजा से पहले धागे पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें।
- पूजा: भगवान जीमूतवाहन की मूर्ति या चित्र के सामने धागे की विधिवत पूजा करें।
- गांठें या लॉकेट: यदि आप गांठें बांध रहे हैं तो अपने पुत्रों की संख्या के बराबर गांठें बांधें। कई परंपराओं में महिलाएं सोने या चांदी के लॉकेट भी पहनती हैं, जिनकी संख्या बच्चों की संख्या के बराबर होती है।
- धारण करें: पूजा के बाद इस धागे को अपनी दाहिनी कलाई पर या गले में धारण करें।
महत्व और मान्यताएं:
- यह धागा मां की ममता, आस्था और संकल्प का प्रतीक है।
- इसे संतान की रक्षा के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है, जो बच्चों को बुरी नजर और विपत्तियों से बचाता है।
- धागे की प्रत्येक गांठ संतान के लिए मां के एक संकल्प का प्रतीक होती है।
- यह भगवान जीमूतवाहन और माता गंगा की कृपा का प्रतीक भी माना जाता है।
Jitiya Vrat 2025 सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मातृत्व की शक्ति का उत्सव है। इस व्रत की खासियत इसकी कठोरता और गहरी आस्था है। निर्जला उपवास और जीमूतवाहन जी की पूजा से संतान को दीर्घायु और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
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