Hartalika Teej 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा की Complete Guide

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Hartalika Teej 2025 व्रत की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और व्रत कथा जानें। इस पर्व पर सुहागिनें पति की दीर्घायु और अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

लखनऊ 22 अगस्त 2025: भारत की संस्कृति और परंपराओं में हरितालिका तीज (Hartalika Teej) का विशेष स्थान है। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसे सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पावन पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएँ माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं और अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर की प्राप्ति हेतु निर्जल उपवास रखती हैं। हरितालिका तीज का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नारी शक्ति, समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

हरितालिका तीज (Hartalika Teej) 2025: कब है?

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज (Hartalika Teej) मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, मध्य भारत और राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है।
2025 में हरितालिका तीज 27 अगस्त, बुधवार को पड़ रही है।

  • तृतीया तिथि आरंभ: 26 अगस्त 2025, रात 11:42 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त: 27 अगस्त 2025, रात 09:15 बजे
  • पूजा मुहूर्त: 27 अगस्त को सुबह 06:00 से 08:30 बजे तक
  • प्रदोष (गोघुलि) मुहूर्त: शाम 6:49 PM से 7:11 PM
  • व्रत पारण: अगले दिन सुबह आरती व हलवे के साथ

हरितालिका तीज (Hartalika Teej) व्रत का महत्व

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  1. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की स्मृति में मनाया जाता है।
  2. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
  3. अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।
  4. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

हरितालिका तीज (Hartalika Teej) की पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र को मंडप में स्थापित करें।
  • कुमकुम, हल्दी, चंदन, पुष्प और धूप-दीप से पूजन करें।
  • कलश स्थापना कर उसमें जल, आम्रपल्लव और नारियल रखें।
  • रातभर जागरण करें और हरितालिका तीज की कथा का श्रवण करें।
  • अगले दिन पारण के समय व्रत का समापन करें।

हरितालिका तीज (Hartalika Teej) व्रत कथा

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पुराणों के अनुसार, हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
कथा के अनुसार पार्वती जी की सखियों ने उन्हें पिता के घर से “हरित” (हरकर ले जाना) कर वन में ले जाकर कठोर तप करने के लिए प्रेरित किया। इसी वजह से इसे हरितालिका तीज (Hartalika Teej) कहा जाता है।

हरितालिका तीज (Hartalika Teej) पर व्रत नियम

  • यह व्रत निर्जला उपवास के रूप में किया जाता है।
  • व्रती को दिनभर जल या भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • केवल शिव-पार्वती की पूजा, भजन, कथा और कीर्तन में दिन बिताना चाहिए।
  • व्रत का समापन अगले दिन प्रातः काल पूजा के बाद पारण से करना चाहिए।

Hartalika Teej का सांस्कृतिक स्वरूप (विस्तृत विवरण)

हरितालिका तीज केवल एक धार्मिक व्रत भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और नारी शक्ति के उत्सव का पर्व है। विभिन्न राज्यों में इसका स्वरूप अलग-अलग दिखाई देता है, जो भारत की विविधता में एकता को भी दर्शाता है।

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1. उत्तर प्रदेश और बिहार

यहाँ हरितालिका तीज को सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा है।

  • महिलाएँ मोहल्लों और गांवों में इकट्ठा होकर तीज गीत गाती हैं, जिनमें शिव-पार्वती विवाह की कथा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामनाएँ शामिल होती हैं।
  • पारंपरिक झूले लगाए जाते हैं, जिन पर महिलाएँ और युवतियाँ झूलती हैं।
  • श्रृंगार का विशेष महत्व होता है – लाल, हरे और पीले रंग की साड़ियाँ, चूड़ियाँ और मेहंदी को शुभ माना जाता है।
  • इस दिन गृहस्थ जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की जाती है।

2. राजस्थान

राजस्थान में हरितालिका तीज को बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है।

  • यहाँ सिंदूर, चुनरी और सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है।
  • महिलाएँ मंदिरों में जाकर सामूहिक गणगौर पूजा करती हैं और शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को सजाती हैं।
  • कई जगहों पर तीज माता की शोभायात्रा भी निकलती है, जिसमें लोकनृत्य और पारंपरिक गीतों का समावेश होता है।
  • राजस्थानी लोकगीतों में इस दिन का विशेष वर्णन मिलता है, जिन्हें महिलाएँ मिलकर गाती हैं।

3. मध्य प्रदेश

यहाँ तीज का उत्सव धार्मिक होने के साथ-साथ सांस्कृतिक लोक-उत्सव भी बन जाता है।

  • महिलाएँ पारंपरिक फाग और नृत्य करती हैं।
  • गाँवों और कस्बों में सामूहिक रूप से लोकगीत और भजन गाए जाते हैं।
  • कई जगह मेलों का भी आयोजन होता है, जहाँ हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन देखने को मिलते हैं।

4. झारखंड और छत्तीसगढ़

  • यहाँ तीज को नारी जीवन और प्रकृति पूजा के रूप में देखा जाता है।
  • महिलाएँ व्रत के साथ-साथ पेड़-पौधों की पूजा करती हैं और अपने क्षेत्रीय लोकगीत गाती हैं।
  • जंगलों और प्राकृतिक स्थलों के पास पूजा करना आम परंपरा है।

5. महाराष्ट्र और दक्षिण भारत

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हालाँकि यहाँ तीज का स्वरूप उत्तर भारत जैसा प्रचलित नहीं है, लेकिन कई जगह हरतालिका पूजा के रूप में मनाया जाता है।

  • महाराष्ट्र की महिलाएँ भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को मिट्टी से बनाकर उनकी पूजा करती हैं।
  • कई जगह नवविवाहिताएँ इस व्रत को विशेष रूप से रखती हैं।

सांस्कृतिक महत्व

  • हरितालिका तीज नारी शक्ति और वैवाहिक जीवन का प्रतीक है।
  • यह त्योहार सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करता है, क्योंकि महिलाएँ सामूहिक रूप से गीत, नृत्य और पूजा में भाग लेती हैं।
  • यह पर्व लोक संस्कृति और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का माध्यम है।

आध्यात्मिक संदेश

यह पर्व स्त्री शक्ति और तपस्या की महानता को दर्शाता है। माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए तप किया, उसी प्रकार हर स्त्री को अपने जीवन में धैर्य, श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए।

Hartalika Teej 2025 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और स्त्री शक्ति का प्रतीक है। इस दिन का व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण को मजबूत करता है। चाहे सुहागिन महिलाएं हों या अविवाहित कन्याएं, हरितालिका तीज व्रत का पालन करके शिव-पार्वती के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकती हैं।

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