गणेश चतुर्थी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इतिहास का Ultimate गाइड

गणेश चतुर्थी 2025 पर जानिए शुभ तिथि, पूजा का सही मुहूर्त, महाराष्ट्र के टॉप पंडाल, और लोकमान्य तिलक द्वारा शुरू की गई इस परंपरा का इतिहास।
लखनऊ 18 अगस्त 2025: देशभर में गणेश चतुर्थी बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में इसकी रौनक देखने लायक होती है। इस दौरान भक्त रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की 10 दिनों तक स्थापना कर आराधना करते हैं और चारों ओर गूंजता है: “गणपति बप्पा मोरिया!”
गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि अनुसार:
- भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त 2025 दोपहर 01:54 बजे से प्रारंभ होकर 27 अगस्त दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी। इस आधार पर, गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व 27 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा।
- विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) 6 सितंबर 2025 को होगा।
शुभ मुहूर्त:
- मध्याह्न काल—सुबह 11:05 से दोपहर 01:40 तक—सबसे उत्तम पूजा समय माना जाता है, क्योंकि यह समय गणेशजी के जन्म काल के समान माना जाता है।
मून साईटिंग से बचें:
पौराणिक मान्यता के अनुसार 26 अगस्त दोपहर 1:54 PM से रात 8:29 PM और 27 अगस्त सुबह 9:28 AM से रात 8:57 PM के बीच चंद्र दर्शन मिथ्या दोष (false accusation) को आमंत्रित करता है, इसलिए इस दौरान चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।
इस दिन बन रहे शुभ योग

27 अगस्त 2025 जैसे बुधवार को गणेश चतुर्थी मनाना विशेष शुभ मना जाता है। इस दिन बन रहे चार योग इस पर्व को और भी दिव्य बनाते हैं:
- शुभ योग
- शुक्ल योग
- सर्वार्थ सिद्धि योग
- रवि योग
साथ ही हस्त और चित्रा नक्षत्र का संयोग भी है, जो दिन को अत्यधिक शुभ बनाता है।
पूजा विधि – चरणबद्ध निर्देश
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की भव्यता – एक सामाजिक दस्ताने

- लोकमान्य तिलक की दूरदर्शिता (1893 से शुरुआत)
- पहले गणेश चतुर्थी मुख्यतः घर-घर में मनाई जाती थी।
- 1893 में बाल गंगाधर तिलक ने इसे निजी पूजा से निकालकर सार्वजनिक त्योहार का रूप दिया।
- उनका उद्देश्य था लोगों को एक जगह एकत्रित करके राष्ट्रीयता की भावना जगाना।
- सार्वजनिक पंडालों की परंपरा
- तिलक ने बड़े-बड़े पंडालों में विशाल गणेश प्रतिमाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया।
- इसके साथ ही 10वें दिन विसर्जन यात्रा की परंपरा शुरू की गई।
- यह एक ऐसा आयोजन बना, जिसमें सभी वर्ग और समाज एक साथ आते थे।
- ब्रिटिश सरकार की नीतियों को चकमा
- अंग्रेजी राज में बड़े राजनीतिक या सामाजिक सम्मेलनों पर प्रतिबंध था।
- लेकिन धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं थी।
- तिलक ने इस मौके का फायदा उठाकर गणेशोत्सव को सामाजिक और राजनीतिक एकजुटता का मंच बना दिया।
- पहला सार्वजनिक गणेश मंडप – पुणे में
- पुणे में भाऊ रंगारी (बालासाहब जावले) ने पहला सार्वजनिक गणेश मंडप स्थापित किया।
- यह कदम गणेशोत्सव की लोकप्रियता और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
- त्योहार का सामाजिक प्रभाव
- यह आयोजन धीरे-धीरे महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया।
- इसमें भजन, कीर्तन, नाटक, व्याख्यान और लोकनृत्य शामिल किए गए।
- गणेशोत्सव एक धार्मिक पर्व से बढ़कर स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया।
नतीजा यह हुआ कि गणेश चतुर्थी आज केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता का उत्सव बन चुकी है।
महाराष्ट्र के 5 प्रसिद्ध गणेश पंडाल 2025 (Top 5 Famous Ganesh Pandals of Mumbai)

- लालबागचा राजा (मुंबई) – भारत का सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडाल, लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
- गिरीगांवचा राजा (मुंबई) – अपनी भव्य सजावट और थीम आधारित मंडप के लिए मशहूर।
- गणेश गली मंडल (मुंबई) – 100+ साल पुराना मंडल, विशाल प्रतिमा के लिए लोकप्रिय।
- श्रीमान गणेश मंडल (पुणे) – पुणे का ऐतिहासिक मंडल, जहां तिलक ने शुरुआत की थी।
- अंधेरीचा राजा (मुंबई) – अपनी अनोखी सजावट और भक्तों की आस्था के लिए खास।
पौराणिक मान्यताएँ: जन्म और महाभारत लेखन का संबंध

- गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म दिवस माना जाता है। यही कारण है कि आरंभ, बुद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक हैं गणपति।
- एक कथा अनुसार, महाभारत की रचना के दौरान वेदव्यास ने गणेश से लिखने का आग्रह किया; गणेश ने दस दिनों तक बिना रुके लिखी, पर फिर ताप बढ़ जाने पर उन्हें स्नान कराना पड़ा। यह भी गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा से जुड़ा है।
सम्पूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

- यह पर्व हिंदू धर्म का एकता का प्रतीक है, जहाँ हर वर्ग, हर पंथ से लोग एक साथ जुड़ते हैं।
- पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और पारिवारिक मेल-जोल इसे और दिलचस्प बनाते हैं।
- पर्यावरण-सचेत आयोजनों जैसे क्ले (mitti) की मूर्ति, प्लास्टिक-मुक्त सजावट भी बढ़ रही है।
तारीख-सारांश टेबल
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| चतुर्थी तिथि | 26 अगस्त 2025 01:54 PM से 27 अगस्त 2025 03:44 PM तक |
| स्थापना दिन | 27 अगस्त 2025, बुधवार |
| शुभ पूजा मुहूर्त | 11:05 AM से 01:40 PM तक |
| विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) | 6 सितंबर 2025 |
गणेश चतुर्थी 2025 सिर्फ पूजा-पाठ का त्योहार नहीं, यह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान का पर्व है। शुभ योगों, इतिहास, पूजा विधि और महाराष्ट्र में इसकी अनूठी भव्यता को जानना इसे और भी खास बनाता ह
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