Vinod Khosla AI prediction: 2030 तक IT और BPO उद्योग होंगे खत्म

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Vinod Khosla AI prediction: 2030 तक IT और BPO उद्योग होंगे खत्म

Vinod Khosla ने AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि AI के बढ़ते दबदबे से 2030 तक IT सर्विसेज और BPO सेक्टर खत्म हो जाएंगे। जानिए पूरी खबर।

नई दिल्ली 17 Feb : देश की राजधानी में चल रहे AI Impact Summit 2026 में एक बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय-अमेरिकी अरबपति उद्यमी और प्रसिद्ध वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला (Vinod Khosla) ने एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव से आने वाले पांच वर्षों में भारत का आईटी सर्विसेज और बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) उद्योग लगभग समाप्त हो जाएगा।

खोसला वेंचर्स के संस्थापक और सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक विनोद खोसला ने सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा, “भारत में लोग आईटी क्षेत्र में AI के प्रभाव से ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, लेकिन मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 2030 तक आईटी सेवाएं या बीपीओ जैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं बचेगी। ये सब खत्म हो चुके होंगे।”

कॉल सेंटर्स का भविष्य अधर में

उन्होंने विशेष रूप से कॉल सेंटर्स और बीपीओ कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सेगमेंट सबसे पहले प्रभावित होंगे। एआई की बढ़ती क्षमताएं, विशेष रूप से जेनरेटिव एआई, अब ऐसे कार्य करने में सक्षम हो गए हैं जो पारंपरिक रूप से मनुष्यों द्वारा किए जाते थे। Vinod Khosla AI prediction के अनुसार, अगले पांच सालों में ये पारंपरिक नौकरियां पूरी तरह से स्वचालित (Automated) हो जाएंगी।

उन्होंने कहा, “आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री 2030 तक पूरी तरह से बाधित (Disrupt) हो जाएगी। एआई इतना शक्तिशाली हो जाएगा कि वह न सिर्फ कॉल का जवाब देगा, बल्कि जटिल समस्याओं का समाधान भी इंसानों से बेहतर तरीके से करेगा।”

कौन हैं विनोद खोसला?

विनोद खोसला का नाम वैश्विक तकनीकी उद्योग में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पुणे में जन्मे और आईआईटी दिल्ली से स्नातक खोसला अमेरिका की सिलिकॉन वैली में एक प्रभावशाली विचारक और निवेशक माने जाते हैं। वह खोसला वेंचर्स के संस्थापक हैं और अमेरिका के सबसे अमीर भारतीयों में उनकी गिनती होती है। उनकी भविष्यवाणियों को तकनीकी दुनिया में काफी गंभीरता से देखा जाता है।

‘2050 तक नौकरियों की जरूरत ही नहीं रहेगी’

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपने संबोधन के दौरान विनोद खोसला ने एक और बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा, “2050 तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसी को भी पारंपरिक नौकरियों की जरूरत नहीं रहेगी।” उनका मानना है कि एआई इतना विकसित हो जाएगा कि वह अर्थव्यवस्था के लगभग सभी कार्यों को अपने हाथ में ले लेगा, जिससे मनुष्यों के लिए रचनात्मक और नवोन्मेषी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर किए जा रहे हालिया प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पास इस बदलाव का नेतृत्व करने की क्षमता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भारत ने खुद को एआई क्रांति के अनुरूप ढालने में देरी की, तो यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है।

क्या कहते हैं उद्योग जगत के जानकार?

हालांकि विनोद खोसला के इस बयान ने आईटी उद्योग में हलचल मचा दी है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्रमिक होगा। उनका कहना है कि एआई नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उनकी प्रकृति को बदलेगा। इस बदलाव के लिए युवाओं को एआई टूल्स को मैनेज करने और उनके साथ काम करने वाले कौशल (AI-Assisted Skills) सीखने होंगे। फिलहाल, Vinod Khosla AI prediction ने भारत के 50 लाख से अधिक आईटी और बीपीओ कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

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