Legendary singer Zubeen Garg के अचानक निधन से फैंस सदमे में, ‘या अली’ से किया था दिलों पर राज

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Zubeen Garg

गैंगस्टर” के या अली फेम सिंगर Zubeen Garg का सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग हादसे में निधन हो गया। असम से लेकर बॉलीवुड तक अपनी आवाज़ से लाखों दिल जीतने वाले इस लेजेंडरी सिंगर ने संगीत जगत में अपूरणीय खालीपन छोड़ दिया है।

लखनऊ 20, सितम्बर, 2025: भारतीय संगीत इंडस्ट्री और खासकर असमिया समाज के लिए 19 सितंबर 2025 की तारीख कभी नहीं भुलाई जा सकेगी। मशहूर गायक Zubeen Garg, जिन्होंने बॉलीवुड फिल्म गैंगस्टर के फेमस गाने ‘या अली’ से युवाओं के दिलों पर राज किया था, अब इस दुनिया में नहीं रहे। खबर है कि सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुए हादसे में उनकी मौत हो गई।

उनकी अचानक मौत ने न केवल उनके परिवार और प्रशंसकों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे संगीत जगत को हिला दिया है।

हादसा कैसे हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Zubeen Garg सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में भाग लेने गए थे, जहां उनका लाइव परफॉर्मेंस होना था। खाली समय में उन्होंने स्कूबा डाइविंग का प्लान बनाया, लेकिन इसी दौरान पानी में हादसा हो गया।

  • सिंगापुर पुलिस ने उन्हें तुरंत समुद्र से बाहर निकाला।
  • उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
  • इंटेंसिव केयर में घंटों इलाज चला, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

19 से 20 सितंबर के बीच उनका पार्थिव शरीर सिंगापुर से असम लाया जाएगा और यहीं उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

नेताओं और इंडस्ट्री का शोक संदेश

Zubeen Garg

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (Twitter) पर लिखा:
“लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के आकस्मिक निधन से स्तब्ध हूं। उन्हें संगीत में उनके अमूल्य योगदान के लिए याद किया जाएगा।’ Shocked by the sudden demise of popular singer Zubeen Garg. He will be remembered for his rich contribution to music. His renditions were very popular among people across all walks of life. Condolences to his family and admirers. Om Shanti. — Narendra Modi (@narendramodi)September 19, 2025”

कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने X अकाउंट पर गायक जुबिन गर्ग के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘जुबीन गर्ग की मौत एक भयानक त्रासदी है। उनकी आवाज ने एक पीढ़ी को परिभाषित किया और उनकी प्रतिभा सचमुच बेजोड़ थी।’  ‘The passing of Zubeen Garg is a terrible tragedy. His voice defined a generation, and his talent was truly unmatched.He overcame personal tragedies to reshape the landscape of Assamese music. His perseverance and courage have left an enduring mark.He will live on in our hearts and minds forever.… pic.twitter.com/aijxHsnosY

शान ने उनकी पुरानी तस्वीरें साझा कर भावुक नोट लिखा:
“Zubeen सच में बादशाह था, अपनी शर्तों पर जिया और चला गया। बहुत अफसोस है कि मैंने उसे अक्सर याद करने के बावजूद कभी फोन नहीं किया। अब लगता है अगली बार किसी और दुनिया में मिलेंगे।”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इंस्टाग्राम पर लिखा:
‘असम ने अपने सबसे प्यारे सपूतों में से एक को खो दिया है। मेरे पास बताने के लिए शब्द नहीं है कि जुबीन हमारे लोगों के लिए क्या मायने रखते थे। उन्होंने हमें बहुत जल्दी छोड़ दिया। यह जाने का समय नहीं था।’

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा:
‘Union Minister Kiren Rijiju tweets, “Khelo India singer is no more! We have lost a magical voice and a versatile personality. I’m deeply shocked by the tragic demise of Zubeen Garg. His evergreen songs will inspire talented artists for generations to come. I pray for his departed soul.”

जुबिन नौटियाल ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा:
“एक सच्ची प्रतिभा बहुत जल्दी चली गई। आपके सुर हमेशा जिंदा रहेंगे।”

कौन थे Zubeen Garg?

Zubeen Garg

संगीत की विरासत

Zubeen Garg का जन्म 18 नवंबर 1972 को मेघालय के तुरा में एक असमी ब्राह्मण परिवार में हुआ।

  • पिता मोहिनी मोहन बोरठाकुर मजिस्ट्रेट होने के साथ कवि और गीतकार भी थे।
  • मां इली बोरठाकुर खुद सिंगर थीं।
  • छोटी बहन जोंगकी बोरठाकुर एक्ट्रेस और सिंगर थीं, जिनका 2002 में कार एक्सीडेंट में निधन हो गया।
  • उनकी एक और बहन डॉ. पाल्मे बोरठाकुर भी हैं।

उनका नाम मशहूर संगीतकार जुबिन मेहता के नाम पर रखा गया था। यानी संगीत उनके खून में ही था।

पढ़ाई और करियर की शुरुआत

  • उन्होंने तामुलपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की।
  • बी. बरूआ कॉलेज में साइंस पढ़ाई शुरू की, लेकिन संगीत के जुनून के चलते पढ़ाई बीच में छोड़ दी।
  • 1992 में यूथ फेस्टिवल में गोल्ड मेडल जीतकर उनका करियर शुरू हुआ।
  • उसी साल उनका पहला असमिया एल्बम अनामिका रिलीज हुआ।

शुरुआती एल्बम और संघर्ष

90 के दशक में उन्होंने कई असमिया एल्बम रिलीज किए:

  • जापुनोर जुर (1992)
  • जुनाकी मोन (1993)
  • माया (1994)
  • आशा (1995)

1995 में वे मुंबई शिफ्ट हुए और इंडीपॉप एल्बम चांदनी रात से शुरुआत की। इसके बाद जलवा (1998)युही कभी (1998)जादू (1999) और स्पर्श (2000) जैसे एल्बम आए।

फिल्मों में शुरुआत

Zubeen Garg

उन्होंने बॉलीवुड में कई फिल्मों में आवाज दी:

  • गद्दार (1995)
  • दिल से (1998)
  • डोली सजा के रखना (1998)
  • फिजा (2000)
  • कांटे (2002)

लेकिन उन्हें असली पहचान मिली फिल्म गैंगस्टर (2006) के गाने ‘या अली’ से।

या अली से मिली शिखर की पहचान

Zubeen Garg

गाना या अली उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गाने के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का GIFA अवार्ड मिला।

इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट गाने गाए:

  • दिल तू ही बता (कृष 3)
  • जीना है (दम मारो दम)
  • क्या राज है (राज 3)
  • सपना सारे (मुद्दा – द इश्यू)
  • होली रे (मुंबई से आया मेरा दोस्त)

उनकी आवाज में एक अलग दर्द और जादू था, जिसने उन्हें लाखों दिलों का चहेता बना दिया।

बंगाली और क्षेत्रीय सिनेमा में योगदान

Zubeen Garg सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थे। उन्होंने बंगाली, नेपाली, कन्नड़, ओड़िया, मणिपुरी, खासी, संस्कृत और यहां तक कि इंग्लिश में भी गाया।

बंगाली फिल्मों के लिए उन्होंने मोनप्रेमीरोमियोपगली तोरे रखबो एडोर जैसे कई सुपरहिट गाने दिए।

पर्सनल लाइफ – गरिमा और परिवार

Zubeen Garg

2002 में उन्होंने फैशन डिजाइनर गरिमा सैकिया गर्ग से शादी की।

  • गरिमा ने कंचनजंघामिशन चाइना जैसी फिल्मों में काम किया।
  • वह खुद भी असमिया संस्कृति को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहीं।

इस कपल का एक बेटा है – गौतम गर्ग

ट्रैजेडीज और स्ट्रगल

Zubeen Garg की जिंदगी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं रही।

  • 2002 में बहन जोंगकी की कार एक्सीडेंट में मौत।
  • कई बार व्यक्तिगत परेशानियां।
  • फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और संगीत को जीते रहे।

फैंस और इंडस्ट्री का रिएक्शन

Zubeen Garg के निधन से सोशल मीडिया पर शोक की लहर है।

  • फैंस ने उन्हें Voice of Assam और Soul of Northeast कहा।
  • कई लोग लिख रहे हैं कि “हमारे दिलों की धड़कन अब खामोश हो गई।”

क्यों खास थे Zubeen Garg?

40 से ज्यादा भाषाओं में गाने – संगीत की कोई सीमा नहीं

Zubeen Garg को “भाषाओं का पुल” कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने सिर्फ असमी या हिंदी ही नहीं, बल्कि 40 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाए। कन्नड़, नेपाली, ओड़िया, बंगाली, भोजपुरी, मणिपुरी, खासी, संस्कृत और यहां तक कि अंग्रेज़ी में भी उन्होंने अपनी आवाज़ दी।
उनकी खासियत यह थी कि चाहे कोई भी भाषा हो, Zubeen की आवाज़ दिल तक पहुंचती थी। शायद इसी वजह से उन्हें सुनने के लिए भाषा समझना जरूरी नहीं था—बस दिल होना चाहिए था।

असमिया म्यूजिक को नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाना

असम का म्यूजिक लंबे समय तक सिर्फ सीमित दायरे में ही जाना जाता था। लेकिन Zubeen Garg ने इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

  • उनके बिहू एल्बम उजान पिरिति ने असमिया संगीत को घर-घर पहुंचा दिया।
  • बॉलीवुड में जब उन्होंने या अली गाया, तो अचानक पूरा देश उनकी आवाज़ का दीवाना हो गया।
    उनकी वजह से नॉर्थ ईस्ट के गाने और संस्कृति को वो पहचान मिली, जिसकी सालों से जरूरत थी।

हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहना

सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी Zubeen Garg कभी अपनी जमीन नहीं भूले।

  • वे अक्सर कहते थे: “मैं जितना मुंबई का हूं, उतना ही गुवाहाटी का भी हूं।”
  • वे असमिया भाषा और संस्कृति को अपने हर काम में जगह देते थे।
  • बड़े शो, ग्लैमर और बॉलीवुड की चकाचौंध के बीच भी उनका दिल हमेशा बिहू और लोकगीतों से जुड़ा रहता था।

उनकी यही सादगी और अपनापन उन्हें लाखों दिलों के और करीब ले जाता था।

इंडस्ट्री में एक सरल और बेबाक शख्सियत

Bollywood और म्यूजिक इंडस्ट्री चमक-दमक और दिखावे से भरी होती है। लेकिन Zubeen Garg अपनी अलग ही पहचान रखते थे।

  • वे बेबाक राय रखने वाले कलाकार थे।
  • चाहे राजनीति हो, समाज की कोई समस्या या संगीत की बात—वे खुलकर अपनी बात रखते थे।
  • साथ ही, वे बेहद सरल और हंसमुख इंसान थे।

उनके साथी कलाकार कहते हैं कि “Zubeen से मिलना ऐसा था जैसे आप किसी पुराने दोस्त से मिल रहे हों।” उनमें कोई स्टारडम का घमंड नहीं था।

क्यों उनका जाना इतना बड़ा नुकसान है?

Zubeen Garg

Zubeen Garg का जाना सिर्फ एक गायक का खोना नहीं है, बल्कि यह पूरे नॉर्थ ईस्ट और भारतीय संगीत के लिए एक भावनात्मक आघात है।

  • उन्होंने असम और बॉलीवुड के बीच एक सेतु बनाया था।
  • उनकी आवाज़ ने लाखों दिलों को पहली मोहब्बत की याद दिलाई, दर्द को आवाज़ दी और उम्मीद जगाई।
  • आज भी “या अली” बजते ही दिल रो पड़ता है—और अब यह गाना और भी ज्यादा दर्दभरा हो गया है, क्योंकि इसे गाने वाला अब हमारे बीच नहीं है।

उनकी सादगी, उनकी मुस्कान और उनके सुर अब सिर्फ यादों में रह जाएंगे। यही कारण है कि उनके निधन पर सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि पूरा देश रो रहा है।

Zubeen Garg खास इसलिए नहीं थे कि उन्होंने हिट गाने दिए, बल्कि इसलिए थे कि उन्होंने हर गाने में अपनी आत्मा डाली। और यही आत्मा अब संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी।

अधूरी रह गई धुनें

Zubeen Garg का जाना भारतीय संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने असमिया संस्कृति को नया आयाम दिया और बॉलीवुड में भी अपनी जगह बनाई।

उनकी आवाज, उनकी धुनें और उनका जुनून हमेशा जिंदा रहेगा। फैंस के दिलों में “या अली” की गूंज हमेशा गूंजती रहेगी।

लेकिन अब हर बार जब यह गीत बजेगा, तो सुरों के साथ एक टीस भी उठेगी—क्योंकि इस गाने के पीछे की आत्मा अब हमारे बीच नहीं है।
उनकी अधूरी रह गई धुनें मानो हवा में तैरते हुए हमारे कानों तक आती रहेंगी, लेकिन कलाकार खुद उन सुरों को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।

लाखों फैंस के लिए Zubeen सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं का हिस्सा थे।
उनकी मुस्कान, उनकी आवाज़ और उनकी आत्मा हमेशा अमर रहेगी।
आज भले ही मंच पर उनकी जगह खाली है, लेकिन दिलों की गैलरी में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में हमेशा लिखा रहेगा।

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