Big Breaking यूपी में SIR Deadline बढ़ी: अब 11 दिसंबर तक जमा होंगे फार्म !

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SIR Deadline

यूपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम तिथि (Deadline) एक सप्ताह बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी गई है। BLOs पर काम के दबाव और एक शिक्षक की आत्महत्या के बाद यह फैसला।

यूपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण की डेडलाइन बढ़ी, बीएलओ पर दबाव के बीच चुनाव आयोग ने उठाया कदम

लखनऊ 30 Nov । उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा करवाए जा रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (इंटेंसिव स्पेशल सारांश रिवीजन – SIR) अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को देखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। चुनाव आयोग ने एसआईआर कराने की अंतिम तारीख को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है। अब नागरिक 11 दिसंबर तक अपने मतदाता सूची संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इस निर्णय के पीछे बीएलओ की ओर से लगातार की जा रही काम के बोझ और मानसिक तनाव की शिकायतों को माना जा रहा है। इसी क्रम में मुरादाबाद में एक बीएलओ द्वारा आत्महत्या किए जाने की दर्दनाक घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया था।

तारीखों में हुआ बदलाव

SIR की डेडलाइन बढ़ाए जाने के साथ ही मतदाता सूची जारी करने की अन्य तारीखों में भी बदलाव किया गया है। अब मतदाता सूची का ड्राफ्ट रोल 9 दिसंबर के स्थान पर 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। इसी प्रकार, संशोधन के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी की बजाय 14 फरवरी को जारी की जाएगी। यह विस्तार बीएलओ को कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से पूरा करने और नागरिकों को अपने नाम दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से किया गया है।

मुरादाबाद की त्रासदी ने उजागर किए हालात

चुनाव आयोग के इस फैसले की पृष्ठभूमि में मुरादाबाद का एक दुखद मामला सामने आया है। जिले के भगतपुर टांडा ब्लॉक स्थित जाहिदपुर सीकमपुर गांव के एक कंपोजिट विद्यालय में तैनात 46 वर्षीय सहायक अध्यापक सर्वेश सिंह ने रविवार सुबह अपने घर में आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पुलिस और परिजनों को मिले एक सुसाइड नोट ने इस पूरे अभियान के दौरान बीएलओ पर पड़ रहे मानसिक दबाव की पोल खोल दी है।

सर्वेश सिंह ने अपने आत्महत्या नोट में लिखा था कि उन्हें 7 अक्टूबर को बीएलओ का अतिरिक्त दायित्व दिया गया था। नोट में उन्होंने साफ-साफ लिखा कि SIR का लक्ष्य पूरा न हो पाने और इसके चलते उत्पन्न तनाव के कारण वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं। इस घटना ने प्रशासनिक machinery में हड़बड़ी मचा दी और बीएलओ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे।

क्या है SIR अभियान?

गहन विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव आयोग की एक विशेष पहल है, जिसके तहत मतदाता सूचियों की शत-प्रतिशत शुद्धता सुनिश्चित की जाती है। इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं, नए मतदाताओं के नाम दर्ज करते हैं और गलत या डुप्लीकेट एंट्रीज को हटाते हैं। हालांकि, लक्ष्यों को पूरा करने का दबाव और अतिरिक्त कार्यभार अक्सर इन कर्मचारियों, जो कि स्थानीय शिक्षक या सरकारी कर्मचारी होते हैं, के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

आगे की राह

चुनाव आयोग द्वारा तारीख बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया जा रहा है। यह कदम न केवल बीएलओ के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य-दबाव को स्वीकार करता है, बल्कि एक अधिक सटीक और व्यापक मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से भी अनुकूल है। इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दिया है कि चुनावी तैयारियों के दौरान जमीनी स्तर के कर्मियों के कल्याण और उनके काम के हालात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। आशा की जा रही है कि यह अतिरिक्त समय मतदाता सूची के इस महत्वपूर्ण संशोधन कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करने में सहायक होगा।

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