5.7 Mag. Earthquake in Bangladesh , कोलकाता समेत पूर्वी भारत में महसूस हुए हल्के झटके!

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5.7 Mag. Earthquake in Bangladesh , कोलकाता समेत पूर्वी भारत में महसूस हुए हल्के झटके!


Bangladesh में 5.7 तीव्रता के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके कोलकाता, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में महसूस किए गए। जानिए पूरी खबर और क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता के बारे में।

कोलकाता 21 Nov । (शुक्रवार) ) आज सुबह बांग्लादेश में आए 5.7 तीव्रता के भूकंप के हल्के झटके पूर्वी भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 10:08 बजे ढाका से लगभग 10 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व में आया।

इस भूकंप के झटके पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में साफ तौर पर महसूस किए गए। शहर के निवासियों ने बताया कि झटके के दौरान पंखे और दीवार पर लगे सजावट के सामान हिलते देखे गए। भूकंप के झटकों के बाद लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।

सोशल मीडिया पर कोलकाता और आसपास के इलाकों के लोगों ने इस घटना के दृश्य साझा किए, जिनमें लोगों को सतर्कता बरतते हुए देखा जा सकता है। केवल कोलकाता ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण और उत्तर दिनाजपुर तथा कूचबिहार जिलों के साथ-साथ मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी इन हल्के झटकों को महसूस किया गया।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और अधिक जानकारी का इंतजार है।

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Earthquake in Bangladesh
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यह घटना इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता की एक और याद दिलाती है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-ग्रस्त क्षेत्रों में शामिल हैं। यहाँ भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं, जिसके कारण यह क्षेत्र अक्सर मध्यम से तीव्र स्तर के भूकंपों का अनुभव करता है।

इससे पहले, गुरुवार को पाकिस्तान में 3.9 तीव्रता का एक भूकंप (Earthquake)दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के एक बयान के अनुसार, यह भूकंप महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई में आया था, जिसके कारण इसके झटके अधिक महसूस किए गए। उथली गहराई वाले भूकंप आमतौर पर अधिक खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि इनकी भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुँचने के लिए कम दूरी तय करनी होती है, जिससे जमीन पर अधिक हलचल होती है और संरचनाओं को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

इस तरह की घटनाएं इस बात पर जोर देती हैं कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए हमेशा सतर्क और तैयार रहने की आवश्यकता है। नागरिकों को भूकंप रोधी निर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी भी करते रहना चाहिए।


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