योगी का बड़ा बयान: Halal Certification पर पूर्ण प्रतिबंध!

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने Halal Certification पर सख्त रोक की घोषणा की। जानें कैसे इसका दुरुपयोग आतंकवाद एवं धर्मांतरण में हो रहा था। #HalalBan #UPGovernment
गोरखपुर 22 Oct : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हलाल सर्टिफिकेशन पर राज्य सरकार का स्पष्ट और कड़ा रुख रखते हुए घोषणा की है कि इस पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। सीएम योगी ने इस ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ को एक ‘बड़ा षड्यंत्र’ करार देते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए आतंकवाद के लिए धन जुटाया जा रहा है तथा इसका इस्तेमाल धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे कार्यों में किया जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित ‘विचार-परिवार कुटुम्ब स्नेह मिलन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा, “सामान खरीदते समय हलाल सर्टिफिकेट जरूर चेक करें। इसके नाम पर साजिश चल रही है। हलाल के नाम पर आतंकवाद के लिए पैसे जुटाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल धर्मांतरण और लव जिहाद के लिए होता है।”
साबुन और माचिस तक में Halal Certification पर सीएम योगी ने जताया आश्चर्य
अपने संबोधन में सीएम योगी ने गैर-खाद्य पदार्थों पर हलाल सर्टिफिकेशन पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा, “आपको आश्चर्य होगा कि साबुन और कपड़ों का भी हलाल। दियासलाई का भी हलाल। मैं भौचक्का था। मैंने कहा कि ये तो कुटिल षड्यंत्र है। मैंने कहा कि माचिस तो झटका वाला है, आप एक झटके में लगाएँगे, तभी जलेगा। आप हलाल करते रहेंगे तो कभी नहीं जलेगी माचिस।”
हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़े आर्थिक षड्यंत्र का हुआ खुलासा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब राज्य सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की तो एक बड़ा आर्थिक षड्यंत्र सामने आया। उन्होंने बताया, “जब हमने कार्रवाई की तो देखा कि ₹25 हजार करोड़ देश के अंदर हलाल सर्टिफिकेशन से होता है। और भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी भी एजेंसी ने उसे मान्यता नहीं दी है। ये सारा का सारा पैसा आतंकवाद के लिए, लव जिहाद के लिए, धर्मांतरण के लिए दुरुपयोग होता है। इसीलिए यूपी सरकार ने इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।”
यूपी सरकार ने पहले ही लगाया था प्रतिबंध
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नवंबर 2023 में ही राज्य में हलाल-सर्टिफाइड उत्पादों के उत्पादन, भंडारण और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं के बीच फैले भ्रम को दूर करना और खाद्य पदार्थों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित मानकों को ही एकमात्र मान्यता देना था। सरकार का मानना था कि हलाल सर्टिफिकेशन एक ‘अलग पंथी-प्रणाली’ बन गई थी, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी।
क्या है हलाल सर्टिफिकेशन?
हलाल सर्टिफिकेशन एक प्रक्रिया है जिसके तहत किसी उत्पाद को यह प्रमाणित किया जाता है कि वह इस्लामिक नियमों के अनुसार तैयार किया गया है। यह प्रमाणपत्र विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के उपभोक्ताओं को लक्षित करता है। भारत में जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट जैसी संस्थाएं यह सर्टिफिकेशन जारी करती हैं। हालाँकि, सरकार का तर्क है कि चूंकि FSSAI जैसी राष्ट्रीय एजेंसी पहले से ही खाद्य सुरक्षा मानक तय करती है, इसलिए एक अलग धार्मिक प्रमाणीकरण अनावश्यक है और इससे एक समानांतर व्यवस्था उभर रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस ताजा बयान से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश सरकार हलाल सर्टिफिकेशन के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करने वाली है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक शोषण से जोड़कर देख रही है।
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