उत्तर प्रदेश: अब हर गांव बनेगा ‘ UPSC कोचिंग सेंटर’,11350 ग्राम पंचायतों में खोली जाएगी डिजिटल लाइब्रेरी!

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योगी सरकार ने 11350 ग्राम पंचायतों में खोली जाएगी डिजिटल लाइब्रेरी। ग्रामीण छात्रों को मिलेगा UPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुफ्त संसाधनों तक आसान पहुंच। #UPDigitalLibrary,#UPSCVillages,

लखनऊ 17 DEC । उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की सभी 11,350 ग्राम पंचायतों में अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य गांव के छात्रों को बिना शहरों की ओर पलायन किए ही संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध कराना है।

इस योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में बनने वाले डिजिटल शिक्षण केंद्र और Digital Library पर करीब 4 लाख रुपये का निवेश किया जाएगा। इस राशि का सुनियोजित बंटवारा किया गया है। 2 लाख रुपये प्रतियोगी और अकादमिक पुस्तकों के संग्रह पर, 1.30 लाख रुपये कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और अन्य आईटी उपकरणों पर, जबकि 70 हजार रुपये आधुनिक फर्नीचर और बैठने की व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे। ये केंद्र न सिर्फ पारंपरिक पुस्तकालय होंगे, बल्कि डिजिटल शिक्षा के हब के रूप में काम करेंगे, जहां छात्रों को ई-बुक्स, ऑनलाइन वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट और 20 हजार से अधिक डिजिटल शैक्षणिक सामग्रियां मुफ्त में उपलब्ध होंगी।

डिजिटल लाइब्रेरी में स्मार्ट प्रबंधन और निगरानी की व्यवस्था

पंचायतीराज निदेशालय के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इन केंद्रों के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को सौंपी गई है। हालांकि, संसाधनों के उचित उपयोग और रखरखाव की निगरानी के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह योजना केवल कागजों तक सीमित न रह जाए। और छात्र UPSC जैसे exam की तैयारी कर सकें !

35 जिलों में पूरी हो चुकी है पहली चरण की तैयारी

सरकार ने इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाते हुए पहले चरण में 35 जिलों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की पुस्तकों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इनमें लखनऊ, प्रयागराज, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, आजमगढ़, बलिया, बरेली, बिजनौर, फतेहपुर, गाजियाबाद, कानपुर देहात, मुरादाबाद, रायबरेली और सीतापुर जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। इस चरणबद्ध कार्यान्वयन से योजना की गुणवत्ता और प्रभावकारिता बढ़ने की उम्मीद है।

‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम

यह पहल केवल पुस्तकालय बनाने तक सीमित परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा क्रांति की नींव है। सरकार का मानना है कि जब गांव का युवा उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण ज्ञान-संसाधनों से लैस होगा, तो वह शहरी युवाओं के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला साबित होगी। डिजिटल लाइब्रेरी का यह नेटवर्क न केवल UPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को गति देगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और सूचना के अंतर को पाटने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि अब गांवों से होने वाला शैक्षिक पलायन रुकेगा और युवा अपने ही गांव में रहकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने के लिए तैयार होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की यह कोशिश निश्चित रूप से समावेशी विकास और शिक्षा के समान अवसर के मॉडल को एक नई दिशा देगी।

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