KGMU sexual harassment: फरार डॉक्टर रमीजुद्दीन दोषी, दाखिला रद्द!

: केजीएमयू के जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमीजुद्दीन पर यौन शोषण व मतांतरण(KGMU sexual harassment) के आरोपों की जांच पूरी। विशाखा कमेटी ने दोषी ठहराया, अब दाखिला रद्द होगा। पूरी खबर पढ़ें।
लखनऊ 8 jan : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU ) में एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर लगे यौन शोषण, धमकी और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के मामले में नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक के खिलाफ गठित विशाखा कमेटी की आंतरिक जांच ने उन्हें सभी आरोपों में दोषी पाया है। इसके चलते अब विश्वविद्य्यालय प्रशासन उनका दाखिला रद्द करने और निष्कासन की कार्रवाई की तैयारी में है।
KGMU में यौन शोषण व धर्मांतरण आरोपों के बाद फरार डॉक्टर दोषी, विश्वविद्यालय से होगा निष्कासन
जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय की सात सदस्यीय विशाखा कमेटी ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को सौंप दी। इस जांच में पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा लगाए गए हर आरोप का गहनता से परीक्षण किया गया। कमेटी ने पीड़िता, संबंधित विभाग के डॉक्टरों और स्टाफ के बयानों तथा मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया है। हालांकि, कमेटी आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन का बयान दर्ज नहीं कर पाई, क्योंकि पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद से वह फरार चल रहा है। उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी है और 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया जा चुका है।
क्या हैं आरोप?
पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इनमें शादीशुदा होने की सच्चाई छुपाना, संबंध बनाने के बाद अश्लील वीडियो बनाकर उसे सार्वजनिक करने की धमकी देना, ब्लैकमेल करना और जबरन गर्भपात के लिए दबाव डालना शामिल है। सबसे गंभीर आरोप ‘लव जिहाद’ या जबरन धर्मांतरण के प्रयास का है। मामला सामने आने के बाद से ही यह केजीएमू कैंपस में चर्चा का केंद्र बना हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी।
त्रिस्तरीय जांच, अब निष्कासन की कार्रवाई
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसकी त्रिस्तरीय जांच चल रही है। विश्वविद्यालय की आंतरिक विशाखा कमेटी के अलावा, पूर्व डीजीपी भावेश सिंह की अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय सात सदस्यीय समिति भी जांच कर रही है। साथ ही, पुलिस की अपनी अलग कानूनी जांच भी जारी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केजीएमयू प्रशासन विशाखा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अब डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीजीएमई) को जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमीजुद्दीन के निष्कासन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि गुरुवार को ही यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।
शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा का सवाल
KGMU का यह मामला एक बार फिर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों में महिला छात्राओं एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा त्वरित आंतरिक जांच करवाकर और कठोर कार्रवाई की तैयारी कर एक स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है। विशाखा दिशा-निर्देशों के तहत गठित कमेटी ने लगभग 15 दिनों में अपनी जांच पूरी कर दी, जो एक त्वरित प्रक्रिया मानी जा सकती है।
अब नजर पुलिस की गिरफ्तारी और उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। यह मामला न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की एक कसौटी है, बल्कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नैतिकता और अनुशासन के मानकों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ रहा है। पीड़िता को न्याय मिलना और आरोपी का निष्कासन व गिरफ्तारी, संस्थान की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
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