Supreme Court ने बिहार मतदाता सूची में 65 लाख नामों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया!

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सुप्रीम कोर्ट(supreme court) ने बिहार की मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। जानें क्या है पूरा मामला। #BiharVoterList #SupremeCourt
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नई दिल्ली: 14 Aug सुप्रीम कोर्ट( SupremeCourt )ने बिहार की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बिहार की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 65 लाख लोगों के नामों को सार्वजनिक करे। साथ ही, इन नामों को हटाए जाने के कारणों को भी जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए।
“22 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो बूथ स्तर पर खुलासा क्यों नहीं?”
SupremeCourt के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने चुनाव आयोग के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर 22 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो इसकी जानकारी बूथ स्तर पर क्यों नहीं दी गई? पीठ ने कहा, “हम नहीं चाहते कि नागरिकों का अधिकार राजनीतिक दलों पर निर्भर हो।”
बूथवार सूची (BiharVoterList)प्रदर्शित करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पंचायत भवनों और प्रखंड विकास कार्यालयों में बूथवार 65 लाख लोगों की सूची प्रदर्शित की जाए, ताकि आम जनता को इसकी जानकारी मिल सके। साथ ही, चुनाव आयोग को स्थानीय समाचार पत्रों, दूरदर्शन, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया गया है।
22 अगस्त को अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को सभी बूथ और जिला स्तर के अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट लेकर 22 अगस्त तक पेश करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।
क्या है पूरा मामला?
BiharVoterList के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के तहत 65 लाख नामों को हटाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था। चुनाव आयोग ने दावा किया था कि इनमें से 22 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष नामों को डुप्लीकेट या फर्जी होने के आधार पर हटाया गया। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग किस तरह से इस निर्देश का पालन करता है और क्या बिहार की मतदाता सूची में फिर से बड़े बदलाव होंगे।
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