SP नेता R.K.Chaudhry का विवादित बयान: शवदाह व होलिका दहन से वायु प्रदूषण?

SP सांसद R.K.Chaudhry ने शवदाह व होलिका दहन को वायु प्रदूषण का कारण बताया। जानिए पूरा विवाद और दिल्ली-एनसीआर की AQI रिपोर्ट।
दिल्ली 19 Dec -एनसीआर में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर के बीच समाजवादी पार्टी (SP) के नेता व सांसद R.K.Chaudhry ने एक ऐसा विवादास्पद बयान दिया है, जिसने पर्यावरण चर्चा को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। चौधरी ने सीधे तौर पर शवदाह (अंतिम संस्कार) और होलिका दहन जैसी धार्मिक एवं सामाजिक प्रथाओं को वायु प्रदूषण बढ़ाने का एक प्रमुख कारण बताते हुए देशवासियों की पर्यावरण के प्रति गंभीरता पर सवाल उठाए हैं। सवाल ये है क्या कल को वोट बैंक की राजनीति हवन आदि पर भी सवाल उठायेगी !
SP नेता R.K.Chaudhry ने अपने तर्क में कहा कि जब दाह संस्कार के लिए शवों को जलाया जाता है, तो उस प्रक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं, जिससे वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। उन्होंने यह दावा करते हुए बात को आगे बढ़ाया कि होलिका दहन के दौरान भी ऐसा ही होता है, जहाँ देशभर में लाखों-करोड़ों स्थानों पर एक साथ लकड़ी जलाई जाती है। उनका मानना है कि इससे निकलने वाली गैसें वातावरण में घुलकर प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं।
SP नेता R.K.Chaudhry क्या बोले
“यह धर्म का मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण का मामला है,” चौधरी ने जोर देकर कहा। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि यदि ये प्रथाएं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं, तो हमें इनके वैकल्पिक, अधिक पर्यावरण-अनुकूल तरीकों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। उनके अनुसार, शवों को लकड़ी पर जलाने के अलावा भी अन्य तरीके मौजूद हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है।बड़ा सवाल ये है कि R.K.Chaudhry जैसे नेता इससे समाजवादी पार्टी का क्या भला करेंगे !
इस बीच, सपा (SP) अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रदूषण के मुद्दे को उठाते हुए केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली का प्रदूषण अब लखनऊ तक पहुंच गया है। इसीलिए लखनऊ में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं हो पा रहा है।’ यादव ने आरोप लगाया कि यह कोहरा नहीं बल्कि स्मॉग है और उनकी पूर्व सरकार द्वारा बनवाए गए पार्कों को भी भाजपा सरकार ने बर्बाद कर दिया है।
इन राजनीतिक दावों-प्रतिदावों के पृष्ठभूमि में दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली का शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 358 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदूषण के लिए वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण धूल और पराली जलाना प्रमुख कारण हैं।
आरके चौधरी (R.K.Chaudhry) के इस बयान ने सामाजिक-धार्मिक परंपराओं और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच एक जटिल बहस को फिर से शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ कुछ लोग इसे एक साहसिक और विचारणीय दृष्टिकोण मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे सांस्कृतिक मूल्यों के साथ छेड़छाड़ और प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों से ध्यान भटकाने का प्रयास बता रहे हैं। निस्संदेह, यह विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए एक समग्र, वैज्ञानिक और सभी हितधारकों को साथ लेकर चलने वाली नीति की आवश्यकता है।
Poosha Amavasya 2025: शुक्रवार अमावस्या के दुर्लभ संयोग में करें पितृ तर्पण, घर में आएंगी लक्ष्मी !
Discover more from Utthan Xpress
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
