भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम!

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भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम!

 श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट ने IKS एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य पर FDP आयोजित किया। जानें प्राचीन ज्ञान के आधुनिक प्रभाव के बारे में।

लखनऊ, 24 जनवरी 2026: समकालीन शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपराओं के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, लखनऊ ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health): प्राचीन जड़ें, आधुनिक प्रभाव” विषय पर एक सप्ताह-व्यापी राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) पर आयोजित किया राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम

भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम!

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी प्राचीन अवधारणाओं, सिद्धांतों एवं व्यवहारों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और अनुसंधान कार्यों से जोड़ना था। यह पहल इस विश्वास से प्रेरित थी कि आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण एक समग्र और स्थायी विकल्प प्रस्तुत कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान, त्रिपुरा विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के प्राणी विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी विशेषज्ञता साझा की। उनके व्याख्यानों ने ‘Indian Knowledge System’ और ‘Public Health’ के बीच के अटूट संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों में वर्णित स्वच्छता, आहार-विहार, जल संरक्षण, औषधीय पादपों के उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के सिद्धांतों का विश्लेषण करते हुए उनकी वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम!

इस एफडीपी में केवल सैद्धांतिक चर्चा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई व्यावहारिक सत्र भी शामिल थे। आयुष (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा आदि) पद्धतियों के वैज्ञानिक आधार, पर्यावरणीय स्वास्थ्य का भारतीय दर्शन में महत्व, और महामारी प्रबंधन के ऐतिहासिक उदाहरणों पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्मी शंकर अवस्थी, डीन (एकेडमिक्स), लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ तथा डॉ. आनंद कुमार राय, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस विभाग, लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ ने भी विशेष वक्ता के रूप में सहभागिता कर अपने विचार रखे।

श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के डीन (एकेडमिक्स) एवं इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक, डॉ. विवेक मिश्रा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम एक सेतु का कार्य करेगा। हमारा लक्ष्य शिक्षकों को इस योग्य बनाना है कि वे अपने-अपने विषयों में भारतीय ज्ञान के तत्वों को सहजता से समाहित कर सकें। ‘Public Health’ एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ ‘Indian Knowledge System’ के सिद्धांत सीधे तौर पर लागू होते हैं और वैश्विक स्वास्थ्य समाधानों में योगदान दे सकते हैं।”

इस कार्यक्रम का दीर्घकालिक प्रभाव शैक्षणिक शोध एवं पाठ्यक्रम विकास में देखने को मिलेगा। प्रतिभागियों ने इन प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने, केस स्टडीज़ विकसित करने और अंतःविषय शिक्षण पद्धतियाँ अपनाने का संकल्प लिया। यह पहल न केवल शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति नवीन पीढ़ी में जागरूकता और गौरव का संचार भी करेगी।

निष्कर्षतः, श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय एफडीपी शिक्षा जगत में एक प्रगतिशील पहल साबित हुई है। यह कार्यक्रम इस बात का सबूत है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही एक स्वस्थ और सतत भविष्य का निर्माण कर सकता है। ऐसे आयोजन भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

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