कैसे है Premanand Maharaj ? जनिये HEALTH UPDATE !

वृंदावन के Premanand Maharaj का स्वास्थ्य चिंता का विषय। जानें उनकी पॉलीसिस्टिक किडनी बीमारी, डायलिसिस और किडनी दान न लेने के कारणों के बारे में। #PremanandMaharaj
वृंदावन: प्रेमानंद महाराज के गंभीर स्वास्थ्य संकट से भक्त चिंतित, जानें किडनी फेल्योर की पूरी कहानीवृंदावन 14 OCT । आध्यात्मिक गुरु और संत प्रेमानंद महाराज के बिगड़ते स्वास्थ्य ने उनके लाखों भक्तों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियोज़ में महाराज के सूजे हुए चेहरे और कंपकंपी भरी आवाज़ ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चर्चा तेज कर दी है। इन वीडियोज़ में महाराज खुद कहते नज़र आए, “दोनों किडनी फेल हैं, अब ठीक होने को कुछ नहीं बचा है, अब तो जाना है।” इस खुलासे के बाद से ही एक सवाल भक्तों के मन में घर कर गया है: क्या प्रेमानंद जी महाराज जीवित हैं? और दूसरा बड़ा प्रश्न: प्रेमानंद महाराज बिना किडनी के कैसे जिंदा हैं?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल प्रेमानंद जी की दोनों किडनी फेल हैं और उन्हें रोजाना डायलिसिस पर रहना पड़ता है। यह जानकारी स्वयं महाराज ने ही सार्वजनिक की है। इससे पहले, एक वीडियो के वायरल होने के बाद श्री हित राधा केली कुंज परिवार ने एक बयान जारी कर कहा था कि प्रेमानंद महाराज स्वस्थ हैं और अपनी दिनचर्या जारी रखे हुए हैं। प्रशासन ने भी लोगों से अफवाहें न फैलाने की अपील की थी। लेकिन बाद में महाराज के अपने बयान ने स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं की पुष्टि कर दी।
क्या है पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज?
प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) नामक एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है। इस बीमारी में किडनी में कई सारी सिस्ट (तरल पदार्थ से भरी थैलियां) बन जाती हैं, जो समय के साथ किडनी के सामान्य ऊतकों को नष्ट कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे किडनी अपना काम करना बंद कर देती है। यह बीमारी महाराज को कई साल पहले हुई थी। प्रोफेसर डॉ. बीपीएस त्यागी के अनुसार, एक बार पेट में दर्द के कारण महाराज ने दिल्ली के डॉक्टर से जांच कराई। जांच में ही पता चला कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं और उनके पास सिर्फ 2 से 2.5 साल का जीवन बचा है। हालांकि, महाराज ने इस निदान को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि जीवन में जो कुछ भी है, वह भगवान की इच्छा है।
क्यों नहीं ली किडनी दान की पेशकश?
यह एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसने महाराज की आध्यात्मिक छवि को और भी ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहुत से लोगों ने उन्हें किडनी दान करने की पेशकश की, लेकिन महाराज ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि वह किसी और को दर्द देना या किसी के शरीर से अंग लेना नहीं चाहते। यही कारण है कि वह डायलिसिस पर निर्भर हैं, न कि किसी दान की गई किडनी पर।
क्या हैं पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के लक्षण?
इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में उच्च रक्तचाप, पीठ या कमर के साइड में दर्द और पेट का फूलना शामिल है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पेशाब में खून आना, बार-बार यूरिन इंफेक्शन और किडनी में पथरी की समस्या हो सकती है। अंततः यह बीमारी किडनी फेल्योर का कारण बनती है। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, यानी यदि माता-पिता में से किसी एक को यह बीमारी है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना लगभग 50% होती है।
प्रेमानंद महाराज का जीवन आज भी उनके भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शारीरिक पीड़ा और गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद, उनकी आध्यात्मिक दृढ़ता और दूसरों के प्रति करुणा अटूट है। उन्होंने अपनी स्थिति को भगवान की इच्छा के रूप में स्वीकार करते हुए आत्मसमर्पण और सकारात्मकता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। पूरा भक्त समुदाय उनके बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना कर रहा है।
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