Police Medal for Gallantry: छपरा जेल कब्जा मुक्ति पर 3 पुलिसकर्मियों को सम्मान!

Photo Jagran
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2002 में छपरा जेल को कैदियों के कब्जे से मुक्त कराने वाले IPS कुंदन कृष्णन, दारोगा अर्जुन लाल और जितेंद्र सिंह को Police Medal for Gallantry से सम्मानित किया। पढ़ें पूरी वीरता की कहानी।
नई दिल्ली 25 Jan। किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म के दृश्यों जैसी वह वास्तविक घटना आज भी बिहार पुलिस के इतिहास में साहस और कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल के तौर पर दर्ज है। करीब 24 साल पहले, साल 2002 में छपरा मंडल जेल में हुए उग्र कैदियों के विद्रोह को कुचलने और जेल को उनके कब्जे से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाने वाले तीन पुलिस जवानों को अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री’ (Police Medal for Gallantry) से सम्मानित किया है। इनमें बिहार कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन (वर्तमान में डीजी, एसटीएफ), दारोगा अर्जुन लाल और सिपाही जितेंद्र सिंह शामिल हैं।
Police Medal for Gallantry
बिहार कैडर के तेजतर्रार आईपीएस कुंदन कृष्णन (वर्तमान में डीजी, एसटीएफ) समेत तीन जवानों की असाधारण वीरता को मिला राष्ट्रीय सम्मान
यह सम्मान उस असाधारण वीरता और नेतृत्व को मान्यता देता है, जिसका प्रदर्शन 28 से 30 मार्च, 2002 के उन तनावपूर्ण घंटों में किया गया था। घटना उस समय की है जब छपरा जेल के करीब 1200 कैदियों ने स्थानांतरण आदेश के विरोध में बड़े पैमाने पर विद्रोह कर दिया। कैदियों ने न केवल जेल परिसर पर, बल्कि आसपास के इलाके पर भी अवैध रूप से जुटाए गए हथियारों और विस्फोटकों के बल पर कब्जा जमा लिया। उन्होंने जेल सुरक्षा में तैनात पुलिस और कर्मचारियों पर हमला किया और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। पूरा जेल परिसर लगभग 48 घंटे तक उपद्रवी कैदियों के नियंत्रण में रहा।
राज्य सरकार के आदेश पर 30 मार्च की सुबह जेल को मुक्त कराने का ऑपरेशन शुरू किया गया। इस कठिन और जोखिम भरे अभियान की कमान उस समय सारण जिले के एसपी रहे कुंदन कृष्णन के हाथों में थी। अपनी टीम के साथ उन्होंने जेल परिसर में दखल देते हुए अदम्य साहस और रणनीतिक नेतृत्व का परिचय दिया। उपद्रवी कैदियों ने पुलिस दल पर गोलीबारी और बमबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस को आत्मरक्षा में आंसू गैस और हथगोले इस्तेमाल करने पड़े। करीब तीन से चार घंटे तक चली इस भीषण मुठभेड़ के बाद ही पुलिस प्रशासन ने जेल पर दोबारा अपना नियंत्रण हासिल किया और एक बड़ी तबाही को टालने में सफलता पाई।
इस ऑपरेशन में स्वयं एसपी कुंदन कृष्णन सहित जिला पुलिस, सैन्य पुलिस और गृह रक्षकों के 28 जवान घायल हुए थे। पुलिस की कार्रवाई में चार कैदियों की मौत हुई थी, जबकि सात घायल हुए थे। कैदियों के पास से बाद में 33 चक्कर (रिवॉल्वर), 312 बोर और 12 बोर के खोखे (कॉंट्राबैंड आयुध) तथा बम के अवशेष बरामद किए गए थे, जो उस खतरे का अंदाजा देते हैं जिसका सामना पुलिस दल ने किया था।
22 साल बाद मिले इस Medal for Gallantry का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है, क्योंकि यह अतीत की उस बहादुरी को याद कराता है जो समय के साथ धूमिल नहीं पड़ी। आज डीजी, एसटीएफ के पद पर तैनात कुंदन कृष्णन का कहना है कि यह पदक उस सामूहिक साहस और बलिदान को समर्पित है, जो उस दिन उनके साथ मौजूद हर जवान ने दिखाया था। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत बहादुरी, बल्कि बिहार पुलिस की सामूहिक प्रतिबद्धता और जनता की सेवा में अपनी जान जोखिम में डालने की भावना का प्रतीक है।
इस घोषणा के साथ ही, छपरा जेल की उस ऐतिहासिक घटना और उसमें शामिल जवानों के योगदान को एक राष्ट्रीय पहचान मिल गई है। Police Medal for Gallantry जैसा सम्मान पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाता है और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि कर्तव्यपथ पर की गई वीरता कभी अप्रासंगिक नहीं होती।
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